Uttarakhand

किसानो को हाथियों के आतंक से मिलेगा निजात…

   लगातार हाथी और अन्य जंगली जानवरों से किसानों की बेतहाशा फसल बर्बाद होते देख इस बार वन विभाग ने एक नया प्रयोग किया है, लंबे समय से हल्द्वानी से लालकुआ के बीच टाडा जंगल से सटे गांव में हाथियों के आतंक ने किसानों की सैकड़ों हेक्टेयर फसल को बर्बाद कर दिया, लंबे समय से किसान हाथियों से गन्ने धान और गेहूं की फसल को बर्बाद होने से रोकने के उपाय करने की वन विभाग से मांग करती रही है इस बार वन संरक्षक पश्चिमी व्रत डॉ पराग मधुकर धकाते के नेतृत्व में तराई केंद्रीय वन प्रभाग द्वारा हाथियों को जंगल से गांव में प्रवेश करने से रोकने के लिए अनायडर्स  (एनिमल इंट्यूशन डिटेक्शन एंड रिपेलेंट सिस्टम) लगाना शुरू किया है। जिसकी शुरुआत हल्दूचौड़ के जंगल से सटे गांव के किनारे से की गई। वन संरक्षक डॉ पराग मधुकर धकाते ने खुद इन अनायडर्स की शुरुआत की। इस दौरान डॉ पराग मधुकर ने बताया कि यह अनायडर्स एक निश्चित रेंज में काम करेगा और जैसे ही वन्यजीव या हाथी वहां से प्रवेश करेंगे तो अपने आप सेंसर से एक्टिवेट होने के बाद सायरन की आवाज से उनको रोकने का काम करेगा। वन संरक्षक पराग मधुकर धकाते ने बताया कि इसके अलावा हाथी सहित वन्यजीवों को किसानों की फसलों में उत्पात मचाने से रोकने के लिए वन विभाग मेन पावर सहित टेक्निकल फोर्स के साथ वन्यजीवों को गांव में प्रवेश करने से रोकेगा। फिलहाल वन विभाग ने दस अनायडर्स लगाने का फैसला लिया है यदि इसका प्रयोग सफल रहा तो वन विभाग प्रदेश के अन्य हाथी प्रभावित क्षेत्रों में इसका इस्तेमाल करेगा।

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