दिल्ली के गोविंदपुरी में रामलीला की झाँकी निकल रही थी। कश्मीर का रहने वाला और जामिया मिल्लिया इस्लामिया से जनसंचार एवं पत्रकारिता की पढ़ाई करने वाला शादाब नजर उस राम झाँकी में झूम कर नाचा था। शादाब वही छात्र है जिसे ३० जनवरी को उस दौरान गोली लगी जब गोपाल शर्मा नाम के एक शख्स ने प्रदर्शनकारियों पर गोली चला दी थी। सीएए के विरोध में यह प्रदर्शन जामिया के बाहर हो रहा था।
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गोपाल शर्मा फ़िलहाल पुलिस की गिरफ्त में है और उसके प्रमाणित पहचान की अभी जाँच चल रही है। ३० जनवरी के दिन हुई इस घटना में शादाब ने बंदूकधारी गोपाल को रोकने की कोशिश की थी और सामने से हाथ उठा कर जैसे ही शादाब ने उसे हथियार नीचे करने को कहा उसने उस पर तुरंत गोली चला दी। गोली हाथ में लगी और लहू-लुहान हाथ लिए शादाब बैरिकेटिंग चढ़ कर इलाज के लिए वहां से बाहर निकला।
इस दौरान यह भी देखने को मिला कि पुलिस ने बैरिकेटिंग नहीं हटाई और यहीं पर एक सवाल यह उठता है कि मौके की नजाकत को समझते हुए पुलिस घायल शादाब के लिए बैरिकेटिंग हटा सकती थी फिर भी उसने ऐसा क्यों नहीं किया? आप किसी भी विचारधारा के हों पर बहस हथियार के बगैर भी तर्कपूर्ण हो सकता हैं। यह विडिओ वीडियो और तय कीजिये कि क्या भावनाओं में बह कर हम इस देश की मिट्टी को न समझने की गलती कर रहे हैं।

