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बड़े बेआबरू होकर नोएडा से निकले IAS बीएन सिंह

बड़े बेआबरू होकर नोएडा से निकले IAS बीएन सिंह

तारीख 30 मार्च, स्थान जीबीएन सभागार गौतमबुद्ध नगर। जिले के आला अधिकारियों की एक मीटिंग जिसमें मुख्यमंत्री योगी अदित्यनाथ कहते हैं, “आपकी आदत बहुत खराब है, काम करते नहीं है। लेकिन आवाज बहुत ज्यादा निकालते हैं। आखिर दो महीने से क्या कर रहे थे आप लोग। कंट्रोल रूम को तो मैं स्वयं काफी पहले कह चुका हूं। हरेक जनपद के लिए कहा था, अब तक कंट्रोल रूम क्यों प्रारंभ नहीं हो पाया यहां पर। डीएम बकवास बंद करो अपना, ये बकवास कर-कर के माहौल खराब किया है आपने यहां पर। जिम्मेदारियों का निर्वहन डालने की बजाय एक-दूसरे के ऊपर डालना। दो महीने पहले अलर्ट जारी किया था पूरे प्रदेश के लिए।” योगी ने यह फटकार कोरोना वायरस के गौतमबुद्ध नगर में होते विस्तार पर लगाम लगाने में नाकाम रहे जिलाधिकारी बीएन सिंह को लगाई।

योगी की फटकार के बाद पूर्व जिलाधिकारी बीएन सिंह ने राज्य के मुख्य सचिव को एक खत लिखा। उन्होंने पत्र में लिखा कि मैं व्यक्तिगत कारणों से नोएडा के डीएम पद पर नहीं रहना चाहता हूं। इतना ही नहीं, उन्होंने 3 महीने की उपार्जित छुट्टियों की भी दरख्वास्त कर दी। पूर्व डीएम बीएन सिंह ने पत्र लिखकर कहा, ‘व्‍यक्‍तिगत कारण से मैं जिलाधिकारी गौतमबुद्ध नगर पद पर नहीं रहना चाहता हूं। अत जिलाधिकारी के पदीय दायित्‍व से मुक्‍त करते हुए 3 माह का उपार्जित अवकाश स्‍वीकृत करने का कष्‍ट करें।”

क्योंकि वर्तमान में कोविड-19 को ध्‍यान में रखते हुए किसी भी प्रकार की प्रशासनिक शिथिलता न हो इस हेतु आवश्‍यक है कि जिलाधिकारी गौतमबुद्ध नगर के पद पर किसी अन्‍य अधिकारी को तैनात करने का कष्‍ट करें। जिसके बाद सिंह को जिलाधिकारी पद से हटा दिया गया है। उन्हें राजस्व विभाग में भेज दिया गया है। साथ ही बीएन सिंह पर विभागीय कार्यवाही करने के भी आदेश जारी कर दिए गए है। इसके बाद गौतमबुद्ध नगर का जिलाधिकारी सुहास एलवाई को बना दिया गया है।

कहने की बात नहीं है यूपी की नौकरशाही में नोएडा की प्रशासनिक मशीनरी की ऊंची कुर्सी पर काबिज होना अफसरशाही में पहले से ही फक्र का सबब रहा है। इसलिए वहां तैनाती में जाति-जुगाड़ के समीकरण अहम किरदार निभाते रहे हैं। पर जब डीएम सरीखे उच्च पद पर तैनात शख्स इस महाविपदा काल में तीन महीने की छुट्टी की मांग करे तो उस शख्स की योग्यता के संग उसे तैनाती देने वालों पर भी गंभीर सवाल उठना स्वाभाविक है।

फिलहाल बीएन सिंह को लेकर चर्चा बनी हुई है कि योगी का खास होने के बावजूद भी उन्हें इस तरह अधिकारियों की मीटिंग के बीच फटकार क्यों लगाई गई। आखिर मुख्यमंत्री योगी उनकी किस बात से इतना खफा हो गए कि ‘बकवास बंद करने’ तक की बात कह डाली। इसके पीछे की कहानी में कई ट्विस्ट आ रहे हैं। पहला यह कि गौतम बुद्ध नगर के जिलाधिकारी जैसे महत्वपूर्ण पद पर रहते बीएन सिंह को तीन साल हो गए थे। इस दौरान उनका तानाशाही पूर्ण रवैया जनता के लिए कष्टदायक बन गया था। जो भी कोई व्यक्ति उनके पास समस्या लेकर जाते उसे पहले वह हडकाते थे।

ज्यादातर मामले कागजों में ही सिमटकर रह जाते थे। हालांकि, कुछ समस्याओं का अगर समाधान भी हो जाता तो जनता के बीच सरकार की छवि पर असर पड़ता स्वाभाविक था। बीएन सिंह पर किसान विरोधी होने के लगातार आरोप लगते रहे हैं। कहा जाता है कि किसानों के आंदोलनों को वह अपनी हठधर्मिता से कुचलने का काम करते रहे। चाहे ग्रेटर नोएडा के किसान हो या हाइटेक वेव सिटी के किसान सभी के साथ वह असहयोगात्मक रवैया अपनाते रहे थे।

ऐसा नहीं है कि लोग इसकी शिकायत नहीं करते थे। पिछले कुछ दिनों से बीएन सिंह की शिकायत सीधे सीएम कार्यालय जाने लगी थी। इसी बीच सुप्रीम कोर्ट के एक वरिष्ठ अधिवक्ता यामिनी रमन आचार्य ने बकायदा ट्वीट करके बीएन सिंह की शिकायत पहले उत्तर प्रदेश आईएएस एसोसिएशन में की। इसके बाद उन्होंने सीएम योगी आदित्यनाथ को ट्वीट किया। जिनमें उन्होंने गौतम बुद्ध नगर के जिलाधिकारी रहते बीएन सिंह के हिटलरशाही आदेशात्मक रवैये पर आपत्ति की थी। बताया जा रहा है कि इस मामले पर भी एसोसिएशन के साथ ही सीएम बीएन सिंह से नाराज थे।

इसके अलावा दूसरा मामला नोएडा की सीज फायर कंपनी का था। इस कंपनी के मालिक की लापरवाही के चलते जिस तरह से अपने दर्जनों कर्मचारियों को कोरोना वायरस पाजिटिव कराया उस आधार पर सख्त कार्यवाही नहीं की गई। गौरतलब है कि गौतमबुद्ध नगर के अब तक पाए गए 72 कोरोना वायरस के पॉजिटिव मामलों में आधे लोग इस कंपनी के मालिक की लापरवाही का ही नतीजा रहा है।

जिस तरह से पहले कंपनी मालिक विदेश से आया और बाद में एक ब्रिटिश जॉन नामक युवक को ऑडिट कराने के लिए अपनी कंपनी में बुलाया और बिना कोई मेडिकल जांच कराए ही अपने कर्मचारियों के बीच कोरोना फैलाया। वह कड़ी से कर्रवाई कार्यवाही का हकदार था। लेकिन बावजूद इसके कंपनी मालिक पर पूर्व जिलाधिकारी बीएन सिंह का दोस्ताना व्यवहार रहा। यहां तक कि कंपनी के मालिक के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने में भी महीनों तक रहस्यमय चुप्पी साधना भी सीएम योगी आदित्यनाथ को काफी अखर गया।

इस पर भी चौंकाने वाली बात यह थी कि कंपनी को सील तक नहीं किया गया। पूर्व जिलाधिकारी बीएन सिंह की सबसे बड़ी लापरवाही यह रही कि सीज फायर कंपनी के सभी कर्मचारियों की न तो मेडिकल जांच कराई गई और न ही उन्हें ट्रेस तक किया गया। आज उसी का नतीजा है कि उत्तर प्रदेश में जिला गौतमबुद्ध नगर पहला जिला ऐसा है जहां 70 से अधिक मामलों में कोरोना वायरस पॉजिटिव पाया गया है।

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