कश्मीर का डेली अंगेजी अखबार ‘राइजिंग कश्मीर’ के संपादक शुजात बुखारी की गोली मारकर हत्या कर दी गई है
कल ईद पर्व के बाद रमजान का पाक महीना खत्म हो जाएगा। रमजान के दौरान कश्मीर में सेना ने आतंवादियों के खिलाफ चला रहे आॅपरेशन को बंद कर दिया था पर इसका असर आतंवादियों पर नहीं पड़ा। इस दौरान वे लगातार हमला करते रहे। सबसे ताजा घटना कश्मीर का डेली अंगेजी अखबार ‘राइजिंग कश्मीर’ के संपादक शुजात बुखारी की गोली मारकर हत्या कर दी गई है।
जम्मू कश्मीर पुलिस ने गुरुवार रात को बाइक सवार तीन लोगों की तस्वीरें जारी की है। इस पर शुजात बुखारी की हत्या करने का संदेह है। पुलिस ने स्थानीय लोगों से कहा कि वे इन संदिग्धों की पहचान में मदद करें। सीसीटीवी फुटेज में तीन आतंकवादी दिखाई दे रहे हैं। दो तस्वीरों में तीन लोग मोटरसाइकिल पर जाते दिखाई दे रहे हैं, जिन्होंने अपने चेहरे ढके हुए थे।

संपादक शुजात बुखारी को जम्मू-कश्मीर की राजधानी श्रीनगर के प्रेस एवेन्यू में उनके आॅफिस के बाहर गोली मारी गई। इसमें बुखारी के अलावा उनके दो सुरक्षा कर्मी की भी मौत हो गई है। ईद से पहले और रमजान के पाक महीने में आतंकवादियों ने शुजात बुखारी को अपना निशाना बनाया। शुजात बुखारी पर यह पहली बार हमला नहीं हुआ है। इससे पहले भी 3 बार उनकी जान लेने की कोशिश की गई थी लेकिन वे हर बार बच गए। बताया जाता है कि उन्हें पाकिस्तानी आतंकवादियों ने भी धमकी दी थी।
पुलिस के आधिकारिक बयान में लिखा, श्रीनगर के प्रेस एनक्लेव हमले में शामिल संदिग्धों की पहचान के लिए आम लोगों से अपील की गई है। संदिग्धों को पहचान कर पुलिस की मदद करें। संदिग्धों की तस्वीर के बारे में कोई भी सूचना कोठीबाग पुलिस थाने के नंबर 9596770623 या श्रीनगर पीसीआर के नंबर 9596222550, 9596222551, 01942477568 या कश्मीर पुलिस के नियंत्रण कक्ष नंबर 100 पर दे सकते हैं।

पुलिस ने यह भी कहा है कि संदिग्धों के बारे में जानकारी देने वाले की पहचान गोपनीय रखी जाएगी। इफ्तार से ठीक पहले श्रीनगर स्थित प्रेस काॅलोनी में उनके आवास से बाहर आतंकियों ने उनपर गोलियां बरसा दीं, जिससे उनकी मौत हो गई। पहले बुखारी पर तीन बार हमले हो चुके हैं, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें सन 2000 से सुरक्षा प्रदान की थी।
बुखारी का घर उत्तर कश्मीर के किरी में है। उनके घर पर रिश्तेदारों, दोस्तों की भीड़ लगी हुई थी। आंगन में शुजात बुखारी का मृत शव कपड़े में लिपटा चारपाई पर रखा हुआ था। घर के बरामदे में कई महिलाएं बैठीं जोर-जोर से रो रही थीं।

