आज से ठीक नौ साल पहले यानी 02 अप्रैल, 2011 की रात 28 साल के बाद देश को दोबारा विश्व कप जीतने की खुशी मिली थी। आज के रात ही पूरे देश में जश्न मनाया गया। आज ही के दिन महेन्द्र सिंह धोनी के अगुवाई में भारतीय टीम ने वर्ल्ड कप जीता था। इसके पहले 25 जून, 1983 में भारत ने पहला वर्ल्ड कप जीता था। इसके बाद ये जश्न मानने में 28 वर्षों का वनवास लग गया। ये सचिन तेंदुलकर का छठा और आखिरी वर्ल्ड कप था। महेंद्र सिंह धोनी के उस छक्के के साथ ही सचिन तेंदुलकर का सपना आखिर में पूरा हुआ। उसके बाद सभी खिलाड़ियों की आंखे ख़ुशी के आंसुओं से सराबोर हो गए। उस दौरान मैदान में मौजूद सभी क्रिकेट फैंस ने वो लम्हा अपने-अपने कैमरे में कैद किया।
धोनी और गंभीर का कमाल
यह फाइनल मैच मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में खेला गया। फाइनल में भारत का सामना श्रीलंका से था। श्रीलंका ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 274 रन बनाए थे। पर भारत ने 48.2 ओवर में 4 विकेट खोकर लक्ष्य को हासिल कर लिया। भारत ने इस मैच में 6 विकट से जीत दर्ज की। धोनी ने हर बार की तरह अपने ही स्टाइल में छक्का लगाकर मैच और टूर्नामेंट को खत्म किया। साथ ही इस मैच में धोनी को ‘मैन ऑफ द मैच’ भी चुना गया।
धोनी ने 79 गेंदों में नाबाद 91 रन की पारी खेली। वहीं गौतम गंभीर ने 97 रनों की अहम पारी खेली। इस मैच में सहवाग पहले ही ओवर में आउट हो गए और सचिन भी जल्द आउट हो गए। उसके बाद गौतम गंभीर और विराट कोहली ने पारी को संभाल पर विराट कोहली आउट हो गए। लेकिन उन्होंने आउट होने से पहले तीसरे विकेट के लिए 83 रन जोड़े। जिसके बाद युवराज सिंह को आना था पर उनके जगह कप्तान धोनी आ गए।
धोनी-गंभीर ने 109 रनों की साझेदारी कर मैच को भारत की झोली में डाल दिया। सचिन और सहवाग पैवेलियन में एक ही जगह बैठे रहे। यहाँ तक सचिन तेंदुलकर ने सहवाग को टॉयलेट तक नहीं जाने दिया। जैसे ही धोनी में छक्का लगाया सब खिलाड़ी मैदान के तरफ दौड़ पड़े और सहवाग टॉयलेट के तरफ।
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धोनी का विजयी छक्का
मैच में जब विराट कोहली आउट हुए उसके बाद युवराज सिंह को आना था पर उसके जगह धोनी क्रीज पर उतरे तो सब चौंक गए। क्योंकि इस टूर्नामेंट में धोनी का बल्ला पूरी तरह ख़ामोश था। वहीं युवराज सिंह शानदार फॉर्म में चल रहे थे। इस पर उस समय मैच के दौरान कई सवाल भी खड़े कर दिए। धोनी ने वर्ल्ड कप जीतने के 7 साल बाद बताया कि आखिर वो युवराज से पहले बल्लेबाजी करने क्यों उतर गए।
धोनी ने खुलासा किया, “मुथैया मुरलीधरन IPL में चेन्नई सुपरकिंग्स की ओर से खेलते थे। इसलिए मैंने उन्हें नेट्स पर काफी खेला हुआ था, मैं उनकी गेंदबाजी को अच्छी तरह से जानता था। वो फाइनल मैच में श्रीलंका के सबसे अहम गेंदबाज भी थे। इसलिए मैंने उनके खिलाफ टीम की जिम्मेदारी लेने के बारे में सोचा।”
धोनी की ये रणनीति काम भी कर गई क्योंकि फाइनल मुकाबले में मुरलीधरन को एक भी विकेट नहीं मिला। भारत के तरफ से जहीर खान ने वर्ल्ड कप 2011 में जबरदस्त गेंदबाजी की। वह 9 मैचों में 21 विकेट अपने नाम करने में कामयाब हुए। जहीर खान ने वर्ल्ड कप के दौरान अपनी एक अलग तरह की गेंद से सभी को हैरान कर दिया था। जहीर ने वर्ल्ड कप में नकल गेंद का इस्तेमाल किया।

