जिस अहम पल का पूरी दुनिया को इंतजार था, वह गुजर गया। अब उसके कदमों के निशान रह गए हैं जिसकी अपने-अपने ढंग से व्याख्या हो रही है। वह खास पल था अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उत्तर कोरिया के राष्ट्रपति किम जोंग की मुलाकात। अगर आप पिछले सात साल की राजनीतिक खबरों पर नजर डालें तो अंदाजा हो जाएगा कि कैसे ये दोनों राष्ट्राध्यक्ष एक-दूसरे के खिलाफ जहर उगलते रहे हैं। लगता रहा कि दोनों स्कड मिसाइल छोड़ रहे हैं।
सिंगापुर के सेटोसा आइलैंड पर मीटिंग के लिए किम 7 मिनट पहले ही पहुंच गए थे। 71 साल में ट्रंप और 34 वर्षीय किम लगभग बारह सेकेंड तक हाथ में हाथ लिए रहे। दोनों ने जमकर एक-दूसरे की तारीफें की। ट्रंप ने किम के कंधे पर हाथ रखकर अपनापन दिखाया। परमाणु बम परखने की बार-बार धमकी देने वाले किम ने अपने परमाणु हथियार खत्म करने की ओर कदम बढ़ाने का ऐलान किया। इसके जवाब में ट्रंप ने उत्तरी कोरिया की सुरक्षा का वादा किया।
इस बहुप्रतीक्षित शिखर सम्मेलन के बाद एक संयुक्त करार पर दस्तख्त भी किए गए। यह मसौदा परमाणु हथियारों को पूरी तरह खत्म करने के मुतल्लिक था। इस मुलाकात और संवाद के जरिए अमेरिका-उत्तरी कोरिया के दरम्यान पिछले 65 सालों से बंद बातचीत फिर से शुरू हो गई है। वर्ष 1953 में अमेरिकी राष्ट्रपति ड्वाइट आइजनहावर से लेकर बराक ओबामा तक ने उत्तर कोरिया को मनाने की कोशिश की, मगर वे नाकाम रहे। उत्तर कोरिया पिछले 33 सालों में 150 मिसाइल और 6 परमाणु परीक्षण कर चुका है। 89 मिसाइल और 6 परमाणु टेस्ट किम ने अपने सात साल के शासन के दौरान किए हैं। ऐसे में किसी शांति वार्ता के लिए मेज पर उनको बुलाया। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का यह प्रयास अब तक की सबसे बड़ी कामयाबी के तौर पर देखा जा रहा है। निश्चित तौर पर यह उनका कूटनीतिक कौशल है।