जब देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 मार्च को लॉकडाउन के पार्ट-1 की घोषणा की तो देश के एजुकेशन हब कोटा में करीब 60 हजार छात्र फंस गए थे। यह छात्र वहां जेईई और नेट की तैयारी के लिए कोचिंग करने गए थे। ज्यादातर बच्चे बिहार और उत्तर प्रदेश के थे। इसके बाद जब लॉकडाउन पार्ट-1, 21 दिन के लिए शुरू हुआ तो छात्रों ने जैसे-तैसे करके अपना काम चलाया।
हालांकि, इस दौरान सभी कोचिंग सेंटर बंद किए जा चुके थे और वहां बने मेस भी बंद हो चुके थे। ऐसे में छात्रों के सामने भूखे मरने की नौबत आ गई। 14 अप्रैल को सुबह 10 बजे जैसे ही देश के प्रधानमंत्री मोदी ने लॉकडाउन पार्ट-2 की घोषणा की है तो छात्रों का सब्र का बांध टूट गया। इसके बाद कोटा में फंसे छात्रों ने वीडियो और ट्विटर के माध्यम से अपनी आपबीती बताई और सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया।

इसके साथ ही छात्रों ने ट्विटर पर #SendUsBackHome अभियान भी चलाया था। सोशल मीडिया पर छात्रों की दुख भरी दास्तान सुनकर बहुत लोगों का कलेजा बैठ गया। लेकिन वहीं दूसरी तरफ बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी है जिन्होंने छात्रों की करुण पुकार पर कोई ध्यान नहीं दिया और यहां तक कह दिया कि छात्रों को वह कोटा से बिहार में नहीं घुसने देंगे। हालांकि, बिहार के साथ ही उत्तर प्रदेश के छात्रों ने भी कोटा में फंसे होने के दौरान अपने-अपने वीडियो जारी कर घर जाने की गुहार लगाई और साथ ही ट्विटर पर अभियान छेड़ा।
ऐसे में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का अभिभावक मन जागा और उन्होंने कोटा में फंसे छात्रों को उत्तर प्रदेश में लाने की घोषणा कर दी। इसके तहत करीब 300 बसें आज राजस्थान के कोटा में जा रही है। बताया जा रहा है कि यहां उत्तर प्रदेश के करीब 7000 छात्र फंसे हुए हैं जिन्हें बसों के जरिए उनके घर तक पहुंचाया जाएगा।

जहां-जहां से बस छात्रों को लेने गई है वह हैं आगरा परिक्षेत्र के फोर्ड डिपो से 20, फाउंड्रीनगर डिपो से 15, ईदगाह डिपो से 30, ताज डिपो से 20, मथुरा डिपो से नौ और बाह डिपो से छह बसें मिलाकर कुल 100 बसें भेजी जा रही हैं। वहीं अलीगढ़ क्षेत्र के बुद्धविहार डिपो से 15, अलीगढ़ डिपो से 10, हाथरस डिपो से 17, कासगंज व एटा डिपो से 15-15 बसें मिलाकर कुल 72 बसें रवाना की जा रही हैं।
जबकि इटावा क्षेत्र के बेवर डिपो से पांच, छिबरामऊ से तीन, मैनपुरी डिपो से सात, इटावा, औरैय्या, शिकोहाबाद व फर्रुखाबाद डिपो से 15-15 बसें मिलाकर कुल 75 बसें भेजी जा रही हैं। इस तरह करीब 300 बसों का बीडा आज राजस्थान के कोटा में पहुंच जाएगा और कल सुबह बसें वहां से अपने गंतव्य की ओर चल देगी।

गौरतलब है कि इन छात्रों की समस्या को देखते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला पिछले 2 दिनों से केंद्र की एजेंसियों से बात करने की कोशिश कर रहे थे, मगर उन्हें भी निराशा हाथ लग रही थी। लेकिन अब योगी के कहने पर कोटा से बच्चों को निकालने की प्रक्रिया शुरू हुई है। इससे पहले खबर आई थी कि जम्मू कश्मीर प्रशासन कोटा में फंसे अपने राज्य के बच्चों को वापस बुलाना चाहती है। मगर उन्हें स्वीकृति नहीं मिल पा रही थी।
जबकि बिहार सरकार ने कोटा से आने वाले बच्चों को लेने से मना ही कर दिया था। बहरहाल, उत्तर प्रदेश सरकार की पहल के बाद अब जम्मू-कश्मीर प्रशासन की ओर से भी बच्चों को लाने की प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है। याद रहे कि राजस्थान के कोटा शहर में तेजी से कोरोना का संक्रमण भी बढ़ रहा है। यहां पर अभी 64 कोरोना के मरीजो को संक्रमण हो चुका हैं।

बताया जा रहा है कि सभी बसों को सैनिटाइज करके ही भेजा जा रहा है। गाड़ी में ड्राइवर, कंडक्टर को मास्क और ग्लब्स भी दिए गए हैं। सोशल डिस्टैसिंग का पालन करते हुए करीब 25 बच्चे ही एक बस में बैठकर आएंगे और उनको संबंधित जगह छोड़ दिया जाएगा।
वहीं इस व्यवस्था को देख रहे आईपीएस अधिकारी प्रमोद कुमार के अनुसार उन्होंने हर बस में एक पुलिसवाले के साथ एक होमगार्ड की भी ड्यूटी लगाई है। साथ ही 10 बसों पर एक सब इंस्पेक्टर को सुपरविजन के लिए तैनात किया गया है। बच्चों के खाने पीने के भी सभी इंतजाम किए गए हैं।