देश में कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ऐसे मुख्यमंत्री रहे हैं जिन्होंने 25 दिन तक बिना कैबिनेट की सरकार चलाई थी और 26वें दिन उन्होंने अपने मंत्रिमंडल का गठन किया था। जबकि मध्य प्रदेश में कोरोना संक्रमण और लॉकडाउन के चलते मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने अभी तक कैबिनेट गठन नहीं किया है। ऐसे में अगर आज शनिवार शाम तक वह कैबिनेट गठन नहीं करते हैं तो देश में पहले मुख्यमंत्री हो जाएंगे जिन्होंने इतने लंबे समय (27 दिन) तक बिना मंत्रिमंडल के सरकार चलाई हो।
मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने शिवराज सिंह चौहान पर कुछ दिनों पूर्व आरोप लगाए कि वह प्रदेश में कैबिनेट गठन नहीं कर रहे हैं। कोरोना जैसी महामारी के बीच मध्य प्रदेश देश में एक अकेला ऐसा प्रदेश है जहां स्वास्थ्य मंत्री की नियुक्ति नहीं है और इसी के साथ ही बिना कैबिनेट के सरकार चल रही है।
कमलनाथ के यहीं पर आरोप नहीं रुके बल्कि उन्होंने कहा कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 23 तारीख को शिवराज सिंह चौहान की सरकार बनाने के चक्कर में देश में लॉकडाउन लागू करने में देरी की थी। जिसके चलते देश में कोरोना महामारी का विस्तार हुआ।
इसी के साथ ही वह यह कहना नहीं भूले कि राहुल गांधी जी ने फरवरी में ही कह दिया था कि कोरोना बीमारी देश में महामारी बन सकती है। इसलिए इस पर रोकथाम लगाई जानी चाहिए। लेकिन कोरोना महामारी पर रोकथाम लगाने की बजाए मोदी जी दूसरे प्रदेशों की स्थाई सरकारों को उलटफेर करने में लगे रहे।

इस आरोप के बाद मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान जैसे सोते हुए से जाग उठे हैं। उन्होंने अब मध्य प्रदेश में कैबिनेट गठन का निर्णय ले लिया है। आज या कल में मध्य प्रदेश में मंत्रिमंडल का गठन तय हैं।
लेकिन इसी के साथ शिवराज सिंह चौहान के सामने मुश्किल यह है कि वह किस-किस को इस कैबिनेट गठन में स्थान देंगे। क्योंकि माधवराव सिंधिया जब कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में आए थे तो उनके 22 विधायक समर्थक भी उनके साथ आए थे। जिनमें से ज्यादातर को उन्हें मंत्री बनाना है।
यही नहीं बल्कि कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए माधवराव सिंधिया के समर्थकों में 6 विधायक तो ऐसे हैं जो कमलनाथ सरकार में मंत्री रहे थे। अपना मंत्री पद छोड़कर वह शिवराज सिंह चौहान की सरकार में अपना मंत्री पद बरकरार रखने के लिए माधवराव सिंधिया पर दबाव बना रहे हैं।
जबकि माधवराव सिंधिया मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर बार-बार अपने समर्थकों को ज्यादा से ज्यादा कैबिनेट में स्थान देने का प्रेशर डाल रहे हैं। उधर दूसरी तरफ पूर्व में जब शिवराज सिंह चौहान मध्य प्रदेश के मंत्री थे तो उनके कार्यकाल में कई ऐसे नेता थे जो मंत्रिमंडल में स्थान पा चुके थे।
फिलहाल, वह भी विधायक हैं तो ऐसे में कई वरिष्ठ विधायकों को वह मंत्रिमंडल में स्थान दे या न दे इसी उहापोह की स्थिति में आजकल मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अटके हुए हैं। फिलहाल उनके सामने कैबिनेट गठन के कई रास्ते हैं।

एक रास्ता वह है जो कांग्रेस से बीजेपी में आए विधायक और मंत्रियों को अपने मंत्रिमंडल में स्थान देना है। दूसरा रास्ता वह है जिसमें बीजेपी के सीनियर लीडर है, जिनको अपने मंत्रिमंडल में स्थान देना बहुत जरूरी है। इसी के साथ ही पूर्व में मुख्यमंत्री रहते हुए जो उनके सलाहकार और सिपहसलार मंत्री रहे थे उनको भी वह हर कीमत पर अपने साथ रखना चाहते हैं। शायद यही वजह है कि उनका मंत्रिमंडल समय पर गठन नहीं हो सका।
अब जब मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने उन पर आरोप लगा दिया तो ऐसे में वह कैबिनेट गठन करने को मजबूर हो गए हैं। कहा तो यहां तक जा रहा था कि लाकडाऊन का बहाना लेकर शिवराज सिंह चौहान अभी मंत्रिमंडल गठन करने के मूड में नहीं थे। लेकिन अब उनकी मजबूरी कहें या वर्तमान स्थितियां, प्रदेश की प्राथमिकता में कैबिनेट तो गठन करना ही है।
बहरहाल, मध्य प्रदेश में 15 महीनों से सत्ता से दूर बीजेपी में भी मंत्री पद के दावेदारों की फेहरिस्त अच्छी खासी लंबी है। चर्चा है कि कमलनाथ सरकार गिराने में बेहद अहम भूमिका निभाने वाले नरोत्तम मिश्रा का मंत्री बनना तय है। इसके अलावा पिछली शिवराज सरकार में मंत्री रहे नेता भी दौड़ में माने जा रहे हैं।
जिनमें नेता प्रतिपक्ष रहे गोपाल भार्गव, पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह, अरविंद सिंह भदौरिया, राजेंद्र शुक्ला, विश्वास सारंग, संजय पाठक, कमल पटेल, विजय शाह, हरिशंकर खटीक, गौरीशंकर बिसेन, अजय विश्नोई जैसे भाजपा के कई विधायक हैं, जिनके मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने के पूरी संभावना है।

गौरतलब है कि कमलनाथ सरकार के 6 मंत्रियों समेत 22 विधायकों के इस्तीफा देने से ही मध्य प्रदेश में शिवराज को सरकार बनाने का अवसर मिला था। इनमें प्रभुराम चौधरी, तुलसी सिलावट, इमरती देवी, गोविंद सिंह राजपूत, प्रद्युम्न सिंह तोमर और महेंद्र सिंह सिसोदिया कमलनाथ सरकार में मंत्री थे।
जिन्होंने इस्तीफा देकर बीजेपी की सरकार तो बनवा दी। ऐसे में अब किए गए वादों को पूरा करने की बारी शिवराज सरकार और बीजेपी की है। इस लिहाज से शिवराज सरकार में भी इनका मंत्री बनना पूरी तरह से तय है।
इसके अलावा कांग्रेस से बगावत करने वाले बिसाहूलाल सिंह, ऐंदल सिंह कंसाना, हरदीपसिंह डंग और राज्यवर्धन सिंह भी मंत्री पद के दावेदारों में शामिल बताए जा रहे हैं। इन नेताओं ने कमलनाथ सरकार से बगावत ही इसीलिए कि थी । कारण यह भी था कि कमलनाथ ने इन्हें मंत्री नहीं बनाया था।
ऐसे में इन्हें साधकर रखने के लिए शिवराज मंत्री पद का इनाम दे सकते हैं। हालांकि, शिवराज कैबिनेट में मंत्रियों के चयन प्रक्रिया में ज्योतिरादित्य सिंधिया का ही वर्चस्व कायम रहेगा । कहा जा रहा है कि बागियों में उन्हें ही मंत्री बनाया जाएगा, जिन पर सिंधिया मुहर लगाएंगे। ऐसे में अब देखना है कि सिंधिया के समर्थक 22 विधायकों में से कितने नेताओं को मंत्री बनाया जाएगा।

