एक तरफ देश के केन्द्र सरकार कोरोना योद्धाओं पर दिनों दिन बढ़ती हमलाें की घटना पर नियंत्रण करने के लिए कानून बना रही हैं। जिसके चलते जो कोई भी डॉक्टरों और पुलिसकर्मियों एवं स्वास्थ्य कर्मियों पर हमला करेगा उसको 7 साल तक की सजा होगी। इसके साथ ही 50,000 का जुर्माना भी होगा।
लेकिन वहीं दूसरी तरफ दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इस मामले में सख्ती बरतने की बजाए सरकारी अस्पताल के डॉक्टरों नर्सों और मीडिया सेल को सख्त हिदायत दी है कि वह अपने साथ होने वाली ऐसी किसी भी घटना को मीडिया या सोशल मीडिया पर शेयर न करें।
प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग द्वारा गुरू तेग बहादुर हॉस्पिटल को भेजे गए एक पत्र में इसकी पुष्टि हो रही है। जिसमें चिकित्सा विभाग के मेडिकल डायरेक्टर सुनील कुमार ने सभी डॉक्टरों, नर्सों के साथ ही एचडी और मीडिया सेल को यह हिदायत दी है।
पत्र में उन्होंने सभी स्वास्थ्य कर्मियों को कोरोना वायरस से पीड़ित रोगियों का इलाज करते वक्त सावधानी बरतने की सलाह दी है। इसी के साथ उन्होंने कहा है कि सोशल मीडिया और मीडिया के साथ ही व्हाट्सएप या फेसबुक पर कोई ऐसा फोटो शेयर ना करें जिससे प्रदेश में कोई गलत मैसेज जाए।

इसका मतलब यह है कि अगर स्वास्थ्य कर्मियों के साथ कोई घटना घटती है तो वह उसको सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म या मीडिया के जरिए लोगों के सामने ना लाए। इसी के साथ प्रदेश के मेडिकल डायरेक्टर सुनील कुमार ने यह भी हिदायत दी है कि सोशल मीडिया या मीडिया में ऐसे मामले उजागर करने की बजाय अपने वरिष्ठ अधिकारियों से इस मामले की खबर दें।
यहां यह बताना जरूरी है कि यह आदेश 21 अप्रैल को दिया गया है। इस पत्र के सामने आते ही दिल्ली सरकार का वह भी रूप सामने आ रहा है जिसमें वह कोरोना योद्धाओं पर हो रही घटनाओं को दबाने के प्रयास में जुटी है। स्वास्थ्य कर्मियों का कहना है कि यह उनके साथ हिटलरशाही रवैया है।
उधर दूसरी तरफ इस मामले में मीडिया की बेरुखी भी सामने आ रही है। आदेश के तीन दिन बीत जाने के बाद भी मीडिया ने इस संबंध में कोई भी समाचार प्रकाशित नहीं किया है।
इसके पीछे कहा जा रहा है कि दिल्ली सरकार मीडिया को विज्ञापनों के जरिए मैनेज करने में जुटी है। दिल्ली सरकार पर आरोप है कि वह लाखों-करोड़ों रुपए के विज्ञापन देकर दिल्ली सरकार पत्रकारों को अपने मनमाफिक खबर लिखवाने का काम कर रही है।

