राजनीतिक पार्टियों के बीच आरोप-प्रत्यारोप कोई नई बात नहीं है। आरोप लगते थे और उनका खंडन भी कर दिया जाता था, लेकिन पिछले कुछ वर्षों से यह परंपरा राजनीति में टूटने-सी लगी है। अब तो राजनेता हर बात पर सीधे कोर्ट में जा रहे हैं या फिर एफआईआर करवा रहे हैं। कुछ साल पहले दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर मानहानि के कई मुकदमे हुए। जिनमें उन्होंने यह कहकर माफी मांग ली थी कि कोर्टों में समय खराब करने के वजाए जनता की सेवा में लगना ज्यादा अच्छा है।
मध्य प्रदेश में भी इन दिनों मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के बीच घमासान चल रहा है, लेकिन इस घमासान के बीच मामले दर्ज होने पर कोई पीछे हटने को तैयार नहीं हैं, बल्कि एक-दूसरे को उसी की भाषा में जवाब देने की रणनीति दिखाई देती है। राज्य में भाजपा के कुछ नेताओं ने मुख्यमंत्री शिवराज चौहान के खिलाफ एक फेक वीडियो शेयर किए जाने पर पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के खिलाफ भोपाल के एक थाने में एफआईआर दर्ज करवाई है, उनके विरुद्ध आईपीसी की धारा 500, 501, 505 (2), 465 के तहत मामला दर्ज किया गया है।
दूसरी तरफ दिग्विजय भी हार मानने को तैयार नहीं हैं। उन्होंने ऐलान किया है कि 2019 में राहुल गांधी के खिलाफ एक फेक वीडियो ट्वीट किये जाने को लेकर वे शिवराज के खिलाफ उसी थाने में जाएंगे जिसमें उनके खिलाफ एफआईआर करवाई गई है। शिवराज यहीं नहीं रुके, बल्कि आक्रामक तेवर दिखाते हुए हमला भी कर डाला है कि उन्होंने शिवराज सरकार द्वारा की जा रही लूट को लेकर आवाज उठाई तो उन्हें धमकाने की नीति अपनाई जा रही है।
दिग्विजय ने कहा कि वे भाजपा के खिलाफ सड़क से लेकर संसद तक आवाज उठाते रहे हैं। यही वजह है कि उनकी आवाज दबाने की कोशिशें हो रही हैं, लेकिन वे इस लड़ाई में पीछे नहीं हटेंगे। दिग्विजय सिंह के खिलाफ एफआईआर करने वाले भाजपा नेताओं का आरोप है कि उन्होंने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के 21 जनवरी 2020 के एक वीडियो में छेड़छाड़ कर उसे अपने ट्विटर हैंडल से जारी किया जिसे बाद में हटा लिया गया। इस वीडियो में शिवराज कहते दिखते हैं कि ख़ूब शराब पिलाओ कि लोग पड़े रहें। दिग्विजय के साथ ही इस वीडियो को रिट्वीट करने वाले 11 लोगों के खिलाफ भी एफआईआर की गई है।
-दाताराम चोमाली