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भारत से गई बयार से क्‍या बनेगा ‘न्‍यू पाकिस्‍तान ’ : चुनाव 2018

पाकिस्‍तान  में आम चुनावों की तारीख जैसे जैसे नजदीक आ रही है वहां चुनावी गतिविधियां भी तेज होती जा रही हैं। लेकिन चुनावी पंडितों के अनुसार इस बार पाकिस्‍तान के चुनावों में मुद्दे पहले के मुकाबले कुछ अलग हैं। कुछ विशेषज्ञों ने इसे भारत के 2014 के चुनावों का प्रभाव भी कहा है। जिस तरह से विकास के और आम जन को प्रभावित करने वाले मुद्दों ने जनता को अपनी ओर खींचा पाकिस्‍तान  के नेताओं ने भी कुछ ऐसा ही करने की कोशिश की है। वहां इस बार विपक्षी दलों ने भ्रष्‍टाचार को और देश के विकास को मुख्‍य मुद्दा बनाया है।

पाकिस्‍तान  के एक नेता ने तो जनता से सिर्फ साफ क्षेत्र के लिए वोट मांगा है। और अपने इस अंदाज के लिए वह इतना फेमस हो गए कि अब वह जहां भी चुनाव प्रचार के लिए जाते हैं लोग उनके साथ सेल्‍फी लेने के लिए लाइन लगा लेते हैं।

अयाज मेमन मोतीवाला नाम के इस नेता ने कूढे के ढेर में और सीवर के अंदर जाकर लाहौर में ऐसे चुनाव प्रचार किया की आज वो वायरल हो गए और सब उन्‍हें जानने लगे। इन्‍होंने लाहौर के लोगों से चुनाव जीतने पर केवल साफ क्षेत्र देने का वादा किया है। इन बातों से जिस तरह वो पॉपुलर हुए हैं लगता है वो चुनाव भी जीत ही जाएंगे।

इतना ही नहीं इमरान खान ने भी पूरी तरह से अपने कम्‍पेन को पॉजिटिव रखा है। नरेद्र मोदी के ‘न्‍यू इंडिया’ की तर्ज पर उन्‍होंने भी ‘न्‍यू पाकिस्‍तान ’ से सपने दिखाने शुरू कर दिए हैं। इसकी शुरूआत अपने घोषणा पत्र जारी करने के साथ कर दी और अपने घोषणा पत्र  का नाम ‘द रोड टू न्‍यू पाकिस्‍तान ’ रखा है। यह बदली बदली हवा ही है कि पिछले चुनावों में कश्‍मीर मुद्दे पर दंभ भरने वाले इमरान खान के घोषणा पत्र  से इस बार कश्‍मीर मुद्दा गायब ही रहा।

इसके अलावा भी बलूचिस्‍तान जैसे कई घिसे पिटे मुद्दे हैं जिस पर किसी भी नेता ने हाथ नहीं डाला। जो मुस्‍लिम लीग यहां गठबंधन की सरकार बना चुकी है उसके घोषणा पत्र से भी बलूचिस्‍तान गायब रहा। जबकि पिछले चुनावों में इस पार्टी ने वहां के लोगों के अधिकारों को पुर्नस्‍थापित करने का वादा किया था।

इसके बाद अफगानिस्‍तान की बारी आती है। पिछला ऐसा कोई चुनाव नहीं रहा जिसमें नेताओं ने अफगानिस्‍तान की बात न की हो। पाकिस्‍तान  हमेशा से खुद को अफगानिस्‍तान की शांति प्रक्रिया के लिए एक महत्‍वपूर्ण कड़ी मानता रहा है। इतना ही नहीं यह मामला गरम होने तथा वर्तमान सरकार की अमेरिका के विशेष दूत से बैठक के बाद मौजूदा सरकार की ताजा कोशिश के बाद भी यह मुद्दा सभी पार्टियों के घोषणा पत्र से बाहर है।

यह साफ संकेत है कि पाकिस्‍तान  के तमाम हुक्‍मनार ये समझ चुके हैं कि जनता को ऐसे मामलों से कोई सरोकार नहीं है जो राजनैतिक हो। वहां की जनता अब समाजिक विकास चाहती है जो कि शायद पाकिस्‍तान  की आजादी के बाद से ही ठप पड़ा है। इस परिवर्तन की बयार कहा से चली यह समझना ज्‍यादा मुश्‍किल नहीं है लेकिन पाकिस्‍तान  की राजनीति में इसकी शुरूआत करने वाले इमरान खान हैं।

उन्‍होंने ही इस बार चुनाव प्रचार में सबसे पहले देश में गले तक पहुंच चुके भ्रष्‍टाचार को मुद्दा बनाया। उसके बाद उनकी रैलियों में लगने वाली लोगों की भीड़ ने यह बता दिया कि जनता का मूड कैसा है और धीरे धीरे यह बात सबके समझ में आ गई।

सभी चुनावी पंडित यह मान चुके हैं कि अगर बहुत उलट फेर न हुए तो इमरान खान इस बार पाकिस्‍तान  के आम चुनाव जीतने वाले हैं और अगर वह अपने वादे के अनुसार एक न्‍यू पाकिस्‍तान  की शुरूआत भी कर पाए तो यह जितना अच्‍छा पाकिस्‍तान  के लोगों के लिए होगा उतना ही अच्‍छा हिन्‍दुस्‍तान के लिए भी क्‍योंकि एक अच्‍छा पड़ोसी किसी भी देश के विकास में अहम भूमिका निभाता है।

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