तीन अक्टूबर 2014 को सुबह-सुबह लोगों में बहुत उत्साह देखा गया । लोग टीवी चैनल और रेडियो के सामने उतावले हो कर बैठ गए । तब यह पहला दिन था जब देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ की शुरुआत की थी। तब इस कार्यक्रम की शुरुआत में प्रधानमंत्री मोदी को लोगों ने काफी सराहा। यही नहीं बल्कि आकाशवाणी से शुरू हुआ यह कार्यक्रम धीरे धीरे सोशल मीडिया पर पहले नंबर पर चर्चित होने लगा था । टीवी चैनलों में इस कार्यक्रम को दिखाने के बाद बडी बडी डिबेट होती थी । जिसमें मोदी की तारीफों के पुल बांध दिए जाते थे।
देश में ‘मन की बात’ की सफलता को इस बात से देखा जा सकता है कि जनवरी 2015 में अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा भी इस कार्यक्रम में शरीक हुए थे। तब ओबामा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ ही अपनी मन की बात कहते हुए भारत की जनता के पत्रों के जवाब दिए थे । तब से लेकर अब तक 68 बार मोदी मन की बात कह चुके हैं।

लगातार 6 साल पहले पायदान पर रहने के बाद अचानक ‘मन की बात’ पर मोदी का ग्राफ गिरा है। यह सोशल मीडिया यूट्यूब पर देखा जा सकता है। जहां पीआईबी इंडिया के साथ ही भारतीय जनता पार्टी और खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के यूट्यूब चैनल पर लोगों ने मन की बात को लाइक कम और अनलाइक ज्यादा किया है। पीआईबी इंडिया में मन की बात को 3800 लोगों ने लाइक किया है। जबकि अनलाइक करने वालों में 9600 लोग शामिल है।
इसी तरह भारतीय जनता पार्टी के यूट्यूब चैनल पर 49000 लोगों ने मन की बात को लाइक किया है। जबकि 373 हजार यानी कि 3 लाख 73000 लोगों ने मन की बात को सिरे से खारिज कर दिया है। इसी के साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के यूट्यूब चैनल पर जहां 34000 लोग मन की बात को पसंद कर रहे हैं तो वहीं दूसरी तरफ 84000 लोगो ने इसे नापसंद किया है ।
इसका सीधा संदेश है कि देश की जनता को अब प्रधानमंत्री के मन की बात सुखद नहीं लगती। वह जनता को मनाया की बात में एक सपना दिखाते हुए लगते हैं । जनता अब खुलकर कहने लगी है कि मोदी जी सपने दिखाना बंद करो और हकीकत में काम करके दिखाओ।
यह जनता का वह आइना है जिसमें देश की सत्ता पर दूसरी बार काबिज भारतीय जनता पार्टी भय के साए में है। खासकर बिहार के विधानसभा चुनाव को लेकर । अगले वर्ष की शुरुआत में बिहार के विधानसभा चुनाव होने हैं। जिसमें मन की बात से निकल रही नकारात्मक बातें भाजपा के लिए बेचैन करने वाली है ।

मोदी सरकार पार्ट टू का एक वर्ष के शासन में भी लोगों को लगने लगा है कि वे जितनी शीघ्रता से और अधिक बदलाव उम्मीद कर रहे थे। ऐसा संभव नहीं हुआ और जो थोड़ा बहुत हुआ है उससे आम आदमी के दैनिक जीवन में किसी बड़े परिवर्तन को नहीं देखा जा सकता है। हालांकि इस बात उम्मीद बहुत ज्यादा थी क्योंकि पिछले तीन दशक में पहली बार एक पार्टी के बहुमत वाली सरकार आई। पर ऐसा लगता है कि बहुत सारा समय और ऊर्जा गैर-जरूरी मसलों पर जाया हो गए।
इसके अलावा चीन मामले पर भी मोदी की स्पष्ट विदेश नीति खुलकर सामने नही आ सकी है। गत 15-16 जून को लद्दाख के गलवान घाटी में एलएसी पर हुई झड़प में भारतीय सेना के एक कर्नल समेत 20 सैनिक शहीद हो गए थे । भारत का दावा था कि चीनी सैनिकों का भी नुक़सान हुआ है लेकिन इसके बारे में चीन की तरफ़ से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया था। तब चीन ने अपनी सेना को किसी भी तरह का कोई नुक़सान होने की बात नहीं मानी।
इसके बाद दोनों ही देशों में पहले से मौजूद तनाव और बढ़ चुका है। दोनों ही देश एक-दूसरे पर अपने इलाक़ों के अतिक्रमण करने का आरोप लगा रहे है। हालांकि भारत की तरफ से पहले कहा गया कि चीन ने उनकी कोई जमीन नहीं कब्जाई। लेकिन इसके बावजूद मीडिया ने कई बार दिखाया कि भारत ने चीन को खदेड कर अपने हिस्से पर कब्जा किया। हालात यह है कि तीन माह बाद आज भी भारत चीन सीमा पर स्थिति सामान्य नही हो सकी है।

मन की बात के चैनल पर देखने पर स्पष्ट हो रहा है कि देश के अधिकतर लोग उन्हें नापसंद कर रहे हैं । मोदी को नापसंद करने की वजह तो बहुत है। जिनमें एक वजह कोरोना काल की शुरुआत में 21 मार्च को मन की बात में देश को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहां का था कि सिर्फ 21 दिन का लॉकडाउन इस बीमारी पर अंकुश पा लेगा।
लेकिन आज 6 माह बाद अंकुश लगाना तो दूर यह बीमारी नियंत्रण से बाहर होती जा रही है। रोजाना रिकार्ड 78000 मरीज कोरोना वायरस से संक्रमित पाए जा रहे हैं। भारत में 3 लाख 62 हजार केस अब तक आ चुके है। जबकि मौतों का आंकड़ा 64, 469 से ऊपर पहुंच चुका है।
इसके साथ ही प्रधानमंत्री मोदी की मन की बात को लेकर अब कुछ चुभते सवाल भी किए जाने लगें हैं कि क्या इस सरकार ने जल्द से जल्द काम शुरू करने के लिए मौके का इस्तेमाल किया? क्या भारत का बेहतर भविष्य बनाने के लिए सरकार ने सही दिशा में अगुवाई की? इसका जवाब नहीं में है। वास्तव में राजस्व संकट से जूझ रही सरकार ने सामाजिक क्षेत्र पर खर्च में कटौती की है।
https://twitter.com/NitinRaut_INC/status/1300276448154906624?s=19
दूसरी तरफ देश में युवा वर्ग असमंजस की स्थिति में हैं। वह इसलिए कि जिस महत्वपूर्ण परीक्षा के लिए वह पिछले 1 साल से तैयारी कर रहा था। उस पर अभी तक सरकार अडी खडी है। मन की बात में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहीं भी अपने संबोधन में जेईई-नीट परीक्षाओं का ज़िक्र नहीं किया। जबकि देश का भविष्य छात्र चाहते थे कि पीएम इस बारे में बात करें।
दरअसल, 1 सितंबर से जेईई की परीक्षा है। फिर 13 सितंबर को नीट की परीक्षा है। कोरोना वायरस के रोज़ाना बढ़ते रिकॉर्ड मामलों के बीच होने जा रही इन परीक्षाओं को लेकर कई छात्र चिंतित हैं।
इन परीक्षाओं को स्थगित करने की मांग कई दिन से उठ रही है। विपक्ष भी इन परीक्षाओं को निरस्त कराने के लिए मैदान में आ डटा है। ये परीक्षाएं पहले भी दो बार स्थगित हो चुकी हैं। लेकिन इस बार सरकार परीक्षा स्थगित करने के पक्ष में नहीं है।
JEE-NEET aspirants wanted the PM do ‘Pariksha Pe Charcha’ but the PM did ‘Khilone Pe Charcha’.#Mann_Ki_Nahi_Students_Ki_Baat
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) August 30, 2020
यह मामला सुप्रीम कोर्ट में भी गया था । जहां कोर्ट ने परीक्षा स्थगित करने की याचिका यह कहते हुए ठुकरा दी कि छात्र अपना पूरा एक साल गंवा देंगे। कोर्ट ने कहा कि कोविड-19 के समय में भी ज़िंदगी चलती रहनी चाहिए। हम परीक्षाएं नहीं रोक सकते, हमें आगे बढ़ना होगा।
इस मामले पर कांग्रेस नेता राहुल ने ट्वीट किया है कि जेईई-नीट के छात्र चाहते थे कि पीएम परीक्षा पर चर्चा करें, लेकिन पीएम ने खिलौनों पर चर्चा की। दिग्विजय सिंह ने बीबीसी हिंदी की एक खबर को शेयर करते हुए लिखा है कि नरेंद्र मोदी के मन की बात को यूट्यूब पर किया जा रहा है ‘नापसंद’।
वहीं कांग्रेस के एक अन्य नेता अखिलेश प्रताप सिंह ने भी ट्वीट किया कि नरेंद्र मोदी के मन की बात को यूट्यूब पर किया जा रहा है ‘नापसंद’। अखिलेश प्रताप सिंह ने लिखा कि नापसंद को नापसंद करने की शुरुआत. जाग रहा है नवजवान। पूर्व भाजपा नेता डा उदित राज ने कहा मोदी जी मन की बात में खिलौना का जिक्र किया। लोगों को खिलौना ही मानते हैं । वर्ना जिस दिन 80000 पार कर गया हो कोरोना , उसकी चर्चा तक नही किया।
मोदी जी मन की बात में खिलौना का जिक्र किया।ओ लोगों को खिलौना ही मानते हैं वर्ना जिस दिन 80000 पार कर गया हो कोरोना , उसकी चर्चा तक नही किया।
— Dr. Udit Raj (@Dr_Uditraj) August 31, 2020
कुछ इसी तरह देश के लोगों की टिप्पणियां पीआईबी इंडिया , भारतीय जनता पार्टी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के यूट्यूब चैनल पर आई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के यूट्यूब चैनल पर मनीष सोनी लिखते हैं कि आत्मनिर्भर भारत हम बना लेंगे मोदी जी , पर हमें फ्रीडम चाहिए। कभी भी लॉकडाउन कभी भी कुछ ना कोई फेस्टिवल । ना कोई प्रोग्राम। प्लीज मोदी जी हमें पहला जैसे कर दो । इसी तरह अमित गुप्ता कहते हैं कि आप हारने के लिए तैयार हो जाओ मोदी जी। क्योंकि बेरोजगारी आपकी हारने की सबसे बड़ी वजह होगी ।
इसी तरह भारतीय जनता पार्टी के यूट्यूब चैनल पर एक युवक लिखते हैं कि देश का अगला प्रधानमंत्री मैरिड होना चाहिए, जो मन की बात बीवी से करें और काम की बात देश से । इस चैनल पर ही विश्वजीत गजभैया लिखते हैं कि काम की बात करो । देश के युवाओं को यह लवडा सुनने में कोई दिलचस्पी नहीं है। विवेक श्रीवास्तव ने लिखा कि सपने बेचना बंद करें मोदी जी। सरकारी नौकरी में हो रही कटौती, निजी करण से देश को बेचना , यह है अच्छे दिन। पूछता है भारत ????
इसके अलावा अन्य लोगों ने भी कुछ इसी तरह से लिखा। जिसमें रामप्रकाश यादव लिखते हैं कि मन की बात तो बहुत कर ली मोदी जी अब कुछ काम की बात कर लीजिए । 2 करोड लोगों के रोजगार वाली बात याद है या भूल गए। कम से कम देश के युवाओं के बारे में तो सोचिए। इसके अलावा प्रिया रंजन लिखती हैं कि
तेरी बढ़ी हुई दाढ़ी के सदके हजार होंगे…
नंगे ,भूखे , बेरोजगार तंग हाल और बीमार होंगे…
रहेगा खौफ फिजाओं में बर्बादी को देखकर…
तेरी जुबान पर फिर भी झूठ शानदार होंगे…

