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पंचतत्व में विलीन हुए प्रणव मुखर्जी 

देश के पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का पूरे राजकीय सम्मान के साथ लोधी रोड स्थित श्मशान घाट में अंतिम संस्कार किया कर दिया गया है। अंतिम संस्कार के दौरान कोरोना वायरस से जुड़े दिशा निर्देशों का  भी पालन किया गया।  प्रणब मुखर्जी का परिवार और रिश्तेदार इस दौरान पीपीई किट में वहां मौजूद रहें। कल 31 अगस्त को  84 वर्ष  की आयु  में प्रणब मुखर्जी का निधन हो गया था।

पूर्व राष्ट्रपति बीते  10 अगस्त से सेना के रिसर्च एंड रेफरल अस्पताल में भर्ती थे। उनके  निधन पर देश में सात  दिन के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की गई है।

इससे पहले राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और तीनों सेनाओं के प्रमुखों सहित कई गणमान्य व्यक्तियों ने आज  पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के अंतिम दर्शन किए और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

पूर्व राष्ट्रपति के पार्थिव शरीर को उनके सरकारी निवास 10, राजाजी मार्ग लाया गया था, जहां गणमान्य व्यक्तियों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी प्रणब मुखर्जी को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने प्रणब मुखर्जी की तस्वीर पर श्रद्धासुमन चढ़ाए ।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, प्रमुख रक्षा अध्यक्ष जनरल बिपिन रावत, थल सेना अध्यक्ष जनरल एम एम नरवणे, वायुसेना प्रमुख आरकेएस भदौरिया, नौसेना प्रमुख करमबीर सिंह सहित अन्य प्रमुख हस्तियों ने भी मुखर्जी को श्रद्धांजलि अर्पित की।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, केंद्रीय मंत्री निर्मला सीतारमण और हर्ष वर्धन, कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव डी राजा ने भी दिवंगत नेता के दर्शन किए और उन्हें श्रद्धांजलि दी। केंद्र सरकार ने पूर्व राष्ट्रपति के निधन पर 31 अगस्त से छह सितंबर तक सात दिन के राजकीय शोक की घोषणा की है।

बता दें कि प्रणब मुखर्जी वर्ष 2012 से 2017 तक देश के 13वें राष्ट्रपति रहे,लंबे समय तक कांग्रेस के नेता रहे मुखर्जी सात बार सांसद भी रहे।  भाजपा-नीत केंद्र सरकार ने साल 2019 में उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ से नवाजा था।

पश्चिम बंगाल में जन्मे इस राजनीतिज्ञ को चलता फिरता ‘इनसाइक्लोपीडिया’ भी कहा जाता था और हर कोई उनकी याददाश्त क्षमता, तीक्ष्ण बुद्धि और मुद्दों की गहरी समझ का मुरीद था।

मुखर्जी भारत के एकमात्र ऐसे नेता थे जो देश के प्रधानमंत्री पद पर न रहते हुए भी आठ वर्षों तक लोकसभा के नेता रहे। वे वर्ष 1980 से 1985 के बीच राज्यसभा में भी कांग्रेस पार्टी के नेता रहे।

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