देहरादून। उत्तराखण्ड की राजनीति में आम आदमी पार्टी के दखल के बाद से बड़ी बेचैनी देखने को मिल रही है। खास तोर से सत्ताधारी भाजपा में नए राजनीतिक प्रतिद्वंदी को लेकर कुछ ज्यादा ही कसमसाहट है। इसी का असर है कि भाजपा लोहाघाट के अपने ही विधायक के खिलाफ अनुशासनात्कम कार्यवाही करने से पीछे हट गई है और अब पार्टी पूरण फर्त्याल को मनाने के लिए सांसद अजय भट्ट और अजय टम्टा को जिम्मेदारी देकर मामले को रफा-दफा करना चाहती है।

उल्लेखनीय है कि लोहाघाट के भाजपा विधायक पूरण फर्त्याल द्वारा जौलजीवी-टनकपुर सड़क निर्माण के टेंडर में ठेकेदार को अनुचित लाभ पहुंचाने के आरोप लगाए गए थे। फर्त्याल ने इस मामले में पूरे दस्तावेज के साथ आरोप लगाया था कि अधिकारियों द्वारा ठेकेदार को फायदा पहुंचाने के लिए बड़ा घोटाला किया गया है।
फर्त्याल के आरोपों के चलते प्रदेश सरकार की जबर्दस्त किरकिरी हुई थी। फर्त्याल हाल ही में हुए एक दिवसीय मानसून सत्र में भी इस मामले को नियम 58 के तहत सवाल उठाने का प्रयास किया। जिस पर सदन में सरकार पूरी तरह से असहज हो गई थी।
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बंशीधर भगत ने विधायक फर्त्याल के सदन में इस मामले को उठाने पर अनुशासनहींनता मानते हुए उन्हें कारण बताओ नेटिस जारी कर जवाब देने को कहा। फर्त्याल ने अपना जवाब पार्टी को भेज दिया जिसमें उन्हांने साफ तौर पर कहा कि वे प्रधानमंत्री मोदी से प्रेरणा लेकर इस भ्रष्टाचार के मामले को उजागर कर रहे हैं और प्रदेश सरकार की भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति का ही पालन कर रहे हैं। फर्त्याल के जवाब से यह तो साफ हो गया कि वे इस मामले में अब पीछे हटने वाले नहीं हैं और उनके जवाब के बाद तो साफ हो गया कि भाजपा भी अब फर्त्याल के खिलाफ कड़ी कार्यवाही कर सकती है।
इसे लेकर पार्टी की बैठक हुई जिसमें फर्त्याल के मामले में गहन विचार-विमर्श किया गया। आखिरकार यह निर्णय लिया कि फर्त्याल को सांसद अजय भट्ट और अजय टम्टा समझाने के लिए मिलेंगे तथा इस मामले का हल निकाला जाएगा।

इस प्रकरण में सबसे ज्यादा बैकफुट पर अगर कोई रहा है तो वह भाजपा का प्रदेश संगठन ही रहा है। पहले ही इस मामले में सरकार की जमकर खिंचाई हो चुकी है और इसके बावजूद संगठन ने पूरण फर्त्याल को कारण बताओ नेटिस जारी कर सरकार और संगठन दोनों की ही फजीहत करवा डाली।
राजनीतिक जानकारों की मानें तो जिस तरह से भाजपा प्रदेश संगठन और सरकार के पक्ष में काम करते दिख रहे हैं उससे संगठन में भी नाराजगी बनी हुई है। एक विधायक द्वारा अपने ही विधानसभा क्षेत्र के मामले को सदन में उठाने पर किसी तरह की पाबंदी नहीं है। बावजूद इसके संगठन ने विधायक पर दवाब बनाने के लिए कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया, जबकि भाजपा के कई लोग यह मानते हैं कि फर्त्याल को कारण बताओ नोटिस जारी करने में प्रदेश अध्यक्ष ने कुछ ज्यादा ही जल्दबाजी दिखाई।
अब इसे राजनीतिक तौर पर देखें तो विधायक पूरण फर्त्याल ने मामले को लेकर जिस तरह से मुखरता दिखाई है उससे यह और भी चर्चाओं में आ चुका है। उन्हें कई राजनीतिक दलों का समर्थन भी मिल रहा है। खास तौर पर आम आदमी पार्टी तो इस मामले में सरकार के खिलाफ हमलावर हो चुकी है।

सूत्रों की मानें तो भाजपा फर्त्याल के खिलाफ कड़ी कार्यवाही का मन बना चुकी थी। लेकिन भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने पर उनको दंड देने से सरकार पर भ्रष्टाचार को संरक्षण देने के आरोपां की पुष्टि होने का भय सरकार और संगठन दोनों को होने लगा।
आम आदमी पार्टी पहले ही प्रदेश में विधानसभा चुनाव लड़ने की घोषणा कर चुकी है। पार्टी के सैकड़ों कार्यकर्ता जनता के छोटे-मोटे मुद्दों को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोले हुए है। गढ़वाल और कुमाऊं में जिस तरह से आम आदमी पार्टी के विरोध-प्रदर्शनों को समर्थन मिल रहा है यह भाजपा संगठन के लिए एक चुनौती बन चुका है। हालांकि भाजपा बाहरी तौर पर आम आदमी पार्टी को प्रदेश की राजनीति में कुछ खास तवज्जो नहीं दे रही है। लेकिन भीतरी तौर पर आम आदमी पार्टी की बढ़ती गतिविधियां और भ्रष्टाचार के खिलाफ मोर्चा खोलने से बुरी तरह से सहमी हुई है।
राजनीतिक जानकारों की मानें तो जिस तरह से आम आदमी पार्टी प्रदेश सरकार की नीतियों और कार्यशैली को लेकर मुखर हो रही है उससे भाजपा की दिक्कतें बढ़ जाएंगी। ‘आप’ कोरोना से निपटने और रोजगार देने के मामले में सरकार पर भ्रष्टाचार को संरक्षण देने का आरोप लगा रही है। फर्त्याल के खिलाफ कार्यवाही होने से इन आरोपों को एक तरह से बल मिलता है। इससे सरकार के खिलाफ माहौल बनने की आशंका बन रही थी। इससे बचने के लिए ही अब भाजपा संगठन ने बीच का रास्ता निकालते हुए फर्त्याल को मनाने का प्रयास फिर से आरंभ कर दिया है। अब देखना दिलचस्प होगा कि फर्त्याल इस मामले में क्या रुख अपनाते हैं जिससे भाजपा संगठन और सरकार दोनों की ही राह आसान होगी।

