बीरोंखाल क्षेत्र ने प्रदेश को दो मुख्यमंत्री और बड़े-बड़े नेता दिए। लेकिन यहां विकास की हालत यह है कि बयालीस साल पहले जिस सड़क की नींव पड़ी थी, वह आज तक नहीं बन पाई है

पौड़ी गढ़वाल के चौबट्टाखाल विधानसभा में नौलापुर, केदारगली, नागरजाखाल मोटर मार्ग पिछले 42 वर्षां से अधूरा पड़ा है। यह एक ऐसा मार्ग है जिसकी नींव स्वतंत्रता संग्राम सेनानी एवं पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष स्व हरिदत्त शर्मा ने सन् 1970 के दशक में एक तहसील से दूसरी तहसील को मिलाने के उद्देश्य से रखी थी। इस रोड ने तहसील लैंसडाउन को तहसील थलीसैंण से जोड़ना था। जिसका वाया रूट रिखणीखाल, दुनाव, बीरोंखाल, केदारगली, कालिका, जोगीमढी, ढौंढ, गबनी होते हुए थलीसैंण मिलना था। सन् 1976 में बीरोंखाल की सीमा तक इस रोड की खुदाई हो चुकी थी और उसके बाद बीरोंखाल से केदारगली होते हुए कालिंका तक दुफुटी बना दी गई थी। बीरोंखाल से केदारगली तक टेंडर लग चुके थे तथा एक जॉब पर कटिंग आरंभ हो चुकी थी, परंतु कुछ विकास विरोधी तत्वों ने इस रोड को न बीरोंखाल में मिलने दिया और न इससे आगे केदारगली की ओर जाने दिया। उन्होंने रोड की खुदाई करने वाले मजदूरों के हथियार छीन लिए, फलस्वरूप रोड का काम बन्द हो गया।

सन् 1976 से सन् 1995 तक इस रोड पर काम विल्कुल बन्द रहा। इस रोड को बीरोंखाल से आगे नहीं बढ़ने दिया जा रहा था। सन् 1995 के बाद स्थानीय निवासी ग्राम खेतू से डॉ बिहारीलाल जलंधरी एवं केदारगली के दलवीर सिंह रावत ने इस रोड पर काम करना आरंभ किया। इस रोड पर एक अन्य मोटर मार्ग जो किनगोड़ीखाल से ललितपुर होते हुए कालिंका में इस रोड के साथ मिलना था उस रोड को बीरोंखाल मिलाने की कोशिश आरंभ की गई। कई बैठकों के बाद ग्राम सभा नाकुरी, ग्राम सभा रगडीगाड, ग्राम सभा डुमैला ने अपने अनापत्ति प्रमाण पत्र दिए तथा इस मार्ग को नागरजाखाल में राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 121 पर मिलाने की स्वीकøति के लिए सर्वे सम्पन्न हुआ।

सन् 2000 में कर्णप्रयाग विधानसभा क्षेत्र के तत्कालीन विधायक डॉ रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ को बंदरकोटू से केदारगली नागरजाखाल पॉलीटेक्निक तक मिलान के लिए बीस किलोमीटर रोड का प्रस्ताव दिया गया। अलग उत्तराखण्ड राज्य स्थापना के बाद बीरोंखाल विधानसभा क्षेत्र की विधायक अमृता रावत व सांसद मेजर जनरल भुवनचंद खंडूड़ी को भी प्रस्ताव दिए गए। बड़ी मेहनत मशक्कत के बाद बंदरकोटू से नौलापुर तक रोड स्वीकøत हुई व रोड की खुदाई भी संपन्न हुई। सन् 2006 में इस रोड का शिलान्यास का पत्थर राज्य की तत्कालीन कैबिनेट मंत्री अमृता रावत एवं सतपाल महाराज के हाथों बड़ी धूमधाम से बीरोंखाल में स्थापित कर दिया गया। सन् 2006 और आज 2018 तक खिलाड़ी भी वही हैं विसात भी वही है और मोहरे भी वही हैं। इस रोड को माध्यम बनाकर केवल क्षेत्र की जनता के साथ खेल खेला जा रहा है।

बीरोंखाल क्षेत्र से उत्तराखण्ड के दो मुख्यमंत्री बन चुके हैं और तीसरे की दावेदारी बदस्तूर जारी है। यहां आने वाले नेता कब तक क्षेत्र की जनता की भावनाओं को भुना कर अपनी रोटी सेंकते रहेंगे। क्या कारण है कि 1976 से सन् 2018 तक बयालीस वर्षों में भी यह रोड शिलान्यास तक सीमित है। यह रोड राष्ट्रीय राजमार्ग पर कब मिलेगी इस संबंध में सरकार और सरकार के प्रतिनिधि ही बखूबी बता सकते हैं।

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