Uttarakhand

संवेदनहीन सरकार: इलाज के अभाव में रेलवे का सेवानिवृत्त कर्मचारी कल करेगा आत्मदाह

एक तरफ कोरोना काल में सरकार जहां यह दावा करती है कि हर बीमार तक डॉक्टर पहुंचेगा तथा किसी को भी कोई असुविधा नहीं होगी। यहां तक की सरकार कोरोना काल में एक खांसी होने वाले मरीज तक को घर से ले जाकर उसका हॉस्पिटल में इलाज कराती है। वहीं दूसरी तरफ उत्तराखंड के हरिद्वार जिले के रुड़की में एक रेलवे के पूर्व कर्मचारी हैं जो इलाज के लिए दर-दर भटक रहे हैं।

कोरोना काल में जब रेलवे के सेवानिवृत्त कर्मचारी को हृदयाघात का दौरा पड़ा तो रेलवे के डॉक्टर उन्हें देखने और इलाज करने की बजाय 200 किलोमीटर दूर दिल्ली रेफर कर देते हैं। यही नहीं बल्कि जब रेलवे के इस हॉस्पिटल में रेलवे के पूर्व सेवानिवृत्त कर्मचारी दवाई लेते हैं तो उन्हें दवाई तक नहीं दी जाती है। इसके चलते मजबूर रेलवे के सेवानिवृत्त कर्मचारी को अब्दुल मलिक को आत्मदाह जैसा कदम उठाने को मजबूर होना पड़ रहा है।

रुड़की निवासी अब्दुल मलिक ने करीब 1 सप्ताह पहले ही रेलवे के सभी उच्च अधिकारियों को इस बाबत बता दिया था कि वह इलाज के अभाव में 22 अक्टूबर को हरिद्वार रेलवे स्टेशन पर आत्मदाह करेंगे। बावजूद इसके किसी भी अधिकारी और कर्मचारी ने उनसे कोई बात तक करना मुनासिब नहीं समझा । इस मामले में सरकार की संवेदनहीनता भी सामने आ रही है ।

हालांकि, दूसरी तरफ रुड़की के विधायक प्रदीप बत्रा ने अब्दुल मलिक के आत्मदाह मामले पर केंद्रीय रेल मंत्री को एक पत्र लिखकर इस मामले से अवगत कराया है । लेकिन इसके बावजूद भी रेलवे प्रशासन के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही है। इस मामले में ‘दि संडे पोस्ट’ ने जब रेलवे के आरोपी हरिद्वार मंडल अधिकारी डॉ आशुतोष से बात की तो उन्होंने कहा कि इस संबंध में कुछ बात नहीं करेंगे । आपको जो भी बात करनी हो ऊपर कीजिए ।

इसके बाद ऊपर यानि की रेलवे के मुरादाबाद मंडल के डीआरएम अजय सिंघल से बात की गई। सिंघल ने कहा कि अब्दुल मलिक ने उन्हें आज तक नहीं बताया कि कौन सी दवाई उनके हॉस्पिटल में नहीं मिल रही है। इसके साथ ही उन्होंने सेवानिवृत्त कर्मचारी को हरिद्वार के सीएमओ के संपर्क में भी बताया ।

अधिकारी ने यह भी कहा कि इस मामले में हमने एक जांच कमेटी गठित की है जो अब्दुल मलिक का बयान लेगी । लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि डेढ़ माह पूर्व यह जांच कमेटी गठित हो गई है। लेकिन जांच कमेटी अभी तक भी सेवानिवृत्त कर्मचारी मरीज का बयान तक लेने नहीं पहुंच सके हैं। पीड़ित मरीज की आत्मदाह की चेतावनी की समय सीमा समाप्त होने में अब 24 घंटे का भी समय नही बचा है,  लेकिन इसके बाद भी रेलवे का कोई अधिकारी अब्दुल मलिक को उसके इलाज और आरोपी डाँक्टर पर कार्यवाही का आश्वासन तक नही दे रहा है।  इसे सरकार की संवेदनहीनता नहीं तो और क्या कहेंगे ?

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