बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती इन दिनों राजनीतिक वनवास पर हैं। उत्तर प्रदेश में दलित राजनीति की सिरमौर रहीं मायावती का कोर वोट बैंक उनसे खिसक चुका है तो पार्टी के भीतर ही उनकी कार्यशैली के चलते बगावत के सुर एक बार फिर से बुलंद होने लगे हैं। 2017 में हुए विधानसभा चुनाव से ठीक पहले मायावती को तगड़ा झटका दशकों से पार्टी के वफादार रहे स्वामी प्रसाद मौर्य से लगा था। तत्कालीन नेता प्रतिपक्ष मौर्य ने मायावती का दामन झटक भाजपा की शरण ले सबको चैंका दिया था। मौर्य से पहले भी कई बड़े बसपा नेता मायावती से नाराज हो पार्टी को अलविदा कह चुके थे लेकिन बहन जी के तौर तरीके जरा नहीं बदले। अब पार्टी के विधायक दल में फूट पड़ गई है। राज्य विधानसभा में बसपा के मात्र 18 विधायक हैं। राज्यसभा की 10 सीटों के लिए चुनाव अवसर पर इनमें से 6 विधायक बागी हो गए। इन विधायकों ने आरोप लगाया है कि मायावती ने भीतर खाने भाजपा के समक्ष घुटने टेक डाले हैं। मायावती ने बसपा का एक उम्मीदवार इन चुनाव में खड़ा किया है। एक राज्यसभा सदस्य चुने जाने के लिए 37 विधायकों का वोट जरूरी है। बागी विधायकों का कहना है कि मायावती ने भाजपा के सहारे इस चुनाव में अपना कैंडिडेट खड़ा किया जो उन्हें मंजूर नहीं। सत्ता के गलियारों में चर्चा गर्म है कि बसपा विधायकों के विरोध को सपा प्रमुख अखिलेश यादव की शह है। हालांकि सपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार का पर्चा रद्द होने के चलते मायावती के कैंडिडेट का राज्यसभा तो पहुंचना तय है लेकिन विधायकों की बगावत ने साफ कर दिया है कि बसपा सुप्रीमो का जलवा पहले जैसा रहा नहीं। यह चर्चा भी जारों पर है कि आने वाले समय में बसपा के कई बड़े नेता समाजवादी पार्टी का दामन पकड़ने जा रहे हैं।

You may also like

MERA DDDD DDD DD