पूरे विश्व में कई बड़े मुल्क कोरोना महामारी के चलते अपनी इकॉनमी के गिरते स्तर को सुधार नहीं पा रहे हैं वहीँ दूसरी चीन ये दावा कर रहा है कि उनके देश से गरीबी जड़ से ख़त्म हो गयी है।लेकिन चीन के इस दावे पर अब चीन में ही विवाद पैदा हो गया है।

क्योंकि इस समय जब कोरोना काल में कई देशों की अर्थ व्यवस्था पटरी से उतर चुकी है। सरकार को भारी राजस्व का नुकसान उठाना पड़ा है। विश्व के अधिकतर देश कोरोना वायरस के खिलाफ जंग लड़ रहे हैं।
तमाम देश गिरती अर्थव्यवस्था से परेशान
तमाम देशों में कोरोना की रोकथाम के लिए सरकार पानी की तरह पैसा बहा रही है। भारत ,पाकिस्तान ,अमेरिका यहाँ तक कि रूस भी अपने गिरती अर्थव्यवस्था से परेशान है। उधर चीन का दावा है कि उसने अपने लक्ष्य जिसमें उन्हें अपने देश से गरीबी पूर्ण रूप से हटानी थी उसकी पूर्ति 2020 की डेडलाइन खत्म होने के एक महीने पहले ही कर ली है।

हालाँकि कोरोना वैक्सीन को लेकर शोध चल रहा है ताकि किसी भी तरह से कोरोना को काबू में किया जा सके। सरकारें अब नई नीतियां बनाकर फिर से अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने में जुटी हुई हैं।
चीन ने अपने देश में गरीबी को पूरी तरह से खत्म कर दिया है?
इस बीच चीन ने गरीबी से जंग जीतने का दावा करके भारत, पाकिस्तान और अमेरिका जैसे बड़े देशों को चौंका दिया है। चीन का कहना है कि उसने अपने देश में भीषण गरीबी को पूरी तरह से खत्म कर दिया है।
इस बात को लेकर कई जानकारों ने आश्चर्य जताया है क्योंकि वर्ष 2013 में चीन में 832 काउंटी जिले ऐसे थे जो भीषण गरीबी से जूझ रहे थे और इनमें 8 करोड़ से अधिक लोग भीषण गरीबी से परेशान थे।

उसी बीच बीजिंग और शंघाई को मिलाकर सिर्फ 9 प्रांत ऐसे थे जहां गरीबी का कोई नामोनिशान ही नहीं था। एक जानकारी के अनुसार कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना ने वर्ष 2012 में एक लक्ष्य तय किया था कि साल 2020 के आखिर तक वे अपने देश में घरेलू गरीबी को पूरी तरह से खत्म कर देंगे।
जिसके बाद से चीन ने तमाम तरह की नई नीतियों को लागू किया। अब दक्षिण-पश्चिमी प्रांत के लगभग 9 जिलों को बेहद गरीब क्षेत्र की लिस्ट से हटा लेने के बाद चीन ने अपने देश से दरिद्रता मिटने की घोषणा कर दी है। साल 2012 में जहां भीषण गरीबी में रहने वाले चीनी लोगों की संख्या लगभग 10 करोड़ थी वही 2019 के अंत तक ये संख्या महज साढ़े 50 लाख रह गई थी।

चीन के राष्ट्रीय सांख्यिकी ब्यूरो की तरफ से दी गई जानकारी के मुताबिक पिछले सात सालों से लगातार हर साल औसतन 1 करोड़ लोगों को गरीबी रेखा से ऊपर लाया गया है।
इस दावे पर विवाद क्यों ?
चीन की सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी से जुड़े अख़बारों में ही इस बारे में अलग-अलग रिपोर्टस छपी हैं। ग्लोबल टाइम्स ने विशेषज्ञों का हवाला देते हुए कहा है कि गरीबी हटाने में मिली सफलता की चीन को व्यापक समीक्षा करनी चाहिए। इसके बाद 2021 में उसे इस बारे में निष्कर्षों को अंतिम रूप से घोषित करना चाहिए। पहली खबर समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने दी थी।
लेकिन बाद में उसने भी एक रिपोर्ट प्रसारित की, जिससे संकेत मिला कि वह खुद अपनी पहली खबर का खंडन कर रही है। बाद वाली रिपोर्ट में कहा गया कि गरीबी मिटाने का काम अभी पूरी तरह संपन्न नहीं हुआ है।
विशेषज्ञों ने शिन्हुआ से कहा कि इस मामले में औचक निरीक्षण और जनगणना की जरूरत होगी, ताकि इस बात की कई बार पुष्टि हो सके कि सभी लोग गरीबी से उबर जाने की कसौटी पर खरे उतर रहे हैं।