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तमिलनाडु में पोंगल पॉलटिक्स, बना सियासी त्यौहार 

तमिलनाडु की राजनीति के लिए यह साल बहुत महत्त्वपूर्ण है। क्योंकि तमिलनाडु में इस साल विधानसभा चुनाव होंगे। जिसमें सत्तारूढ़ अन्नाडीएमके और विपक्षी डीएमके मुख्य प्रतिद्वंदी हैं, तो दूसरी तरफ कांग्रेस डीएमके के साथ सत्ता में वापसी करने के लिए जोर लगा रही है। इस दौरान तमिलनाडु का सबसे बड़ा त्योहार पोंगल बहुत ही खास अंदाज में मनाया गया। हर बार की तरह इस बार भी राजनीतिक पार्टियां इसके जरिए अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचने का हर संभव प्रयास करती दिखी। खासकर राष्ट्रीय पार्टियाँ। बहरहाल , इस बार भाजपा और कांग्रेस ने इस त्यौहार को राजनैतिक रंग दे दिया। दोनों पार्टिया अपने-अपने तरीके से पोंगल पर जनता के बीच गई और एक दूसरे पर सियासी वार किए।  इस तरह तमिलनाडु में पोंगल पॉलटिक्स की सियासी शुरुआत हो गई।  इसे चुनावी रणभेदी के रूप देखा जा रहा है।

एक तरफ भाजपा के अध्यक्ष जे पी नड्डा थे तो दूसरी तरफ कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी थे। पोंगल का जश्न मनाने के बीच भाजपा – कांग्रेस की राजनीति भी दिखी। लेकिन जिस तरह से राहुल गांधी ने इस अवसर को भाजपा पर हमला करने के लिए चुना, वह एक अच्छी तरह से सोची समझी रणनीति का हिस्सा था। क्योंकि राज्य में विपक्ष नई शिक्षा नीति का विरोध कर रहा है और इसे राज्य की संस्कृति में एक उल्लंघन करार दे रहा है।  विदेश यात्रा के बाद राहुल ने पहली बार किसी सार्वजनिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम में हिस्सा लिया और मदुरै में पुरे चार घंटे रुके।  उन्होंने यहां का पारम्परिक खेल जल्लीकट्टू को देखा। साथ ही भाजपा पर जमकर वार किया।

तमिलनाडु में पोंगल जैसे पारंपरिक त्यौहार के जरिए जनता तक कैसे पहुंचा जाता है, इसकी शुरुआत डीएमके के दिग्गज नेता एम करुणानिधि ने बहुत दिनों पहले ही कर दी थी। करुणानिधि ने इस त्योहार पर समानता का विशेष आह्वान किया था। भाजपा ने इस बार दो कदम आगे बढ़ते हुए ‘नम्मा ओरु पोंगल’ (घर में पोंगल) की शुरुआत की है। इसके जरिए पार्टी ने अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचने का प्रयास किया है। यहां यह भी बताना जरुरी जरुरी है कि इसके पहले भाजपा ने कभी भी इस तरह के राजनीतिक प्रयास नहीं किए थे। इस तरह के  कार्यक्रम में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे पी नड्डा की मौजूदगी संकेत  देती है कि इस बार भाजपा तमिलनाडु को लेकर कितनी गंभीर। है

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