पश्चिम बंगाल इस समय पूरी तरह चुनावी रंग में रंग चुका है। सभी पार्टियां जीत के लिए कमर कस चुकी हैं। लेकिन असली टक्कर बीजेपी और टीएमसी के बीच है इसलिए आरोप प्रत्यारोप का सिलसिला तो चल ही रहा है साथ ही हर मुद्दे को भुनाने के कवायद भी जारी है। इसी क्रम में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक नई बहस छेड़ दी है। उन्होंने देश की राजधानी को लेकर एक नई बहस की शुरू करने का प्रयास कर दिया है। उन्होंने एक नहीं, बल्कि 4 राजधानियों की माँग की, जो रोटेट होती रहें यानी क्रम अनुसार चलती रहे। कोलकाता को अंग्रेजों की राजधानी होने का हवाला देकर उन्होंने पश्चिम बंगाल की राजधानी को राष्ट्रीय राजधानी बनाने का इशारा किया। आइए हम समझते हैं कि ममता बनर्जी को एक नहीं, बल्कि 4-4 राष्ट्रीय राजधानी की आवश्यकता क्यों महसूस हो रही है ?
ममता क्यों महसूस हुई चार राजधानी की जरूरत ?
यह समझना बेहद आवश्यक है कि आखिरकार ममता बनर्जी ने नेताजी सुभाष चंद्र की जयंती के अवसर पर यह मांग क्यों की। कोलकाता में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 125 वीं जयंती के अवसर पर उन्होंने यह घोषणा की। दोनों पार्टियां यानी टीएमसी और बीजेपी नेताजी की विरासत पर अपना दावा कर रही हैं। ममता ने पहले भी कई बार आरोप लगाया है कि बीजेपी को बंगाल के महापुरुषों के बारे में समझ नहीं है। इस तरह वह बंगाली अस्मिता का कार्ड खेल रही है। अब 4-4 राजधानियों की मांग भी उसी बंगाली पहचान पत्र का विस्तार है। पश्चिम बंगाल में कुछ महीनों में विधानसभा चुनाव होने हैं। ममता 4-4 राजधानियों का शिगुफा लहराकर कोलकाता को राष्ट्रीय राजधानी बनाने की राह देख रही हैं।

ममता बनर्जी ने नेताजी की जयंती को ‘पराक्रम दिवस’ घोषित करने के मोदी सरकार के फैसले की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि हम पराक्रम दिवस का अर्थ नहीं समझते हैं। हम इस दिन को ‘देशनायक दिवस’ के रूप में मनाते हैं। उन्होंने कहा, ‘क्या आप जानते हैं कि हम इस दिन को देशनायक दिवस के रूप में क्यों मनाते हैं – इसका कारण यह है कि रवींद्रनाथ टैगोर नेताजी को इसी नाम से पुकारते थे। नेताजी को भावना से समझा जाना चाहिए। इसके जरिए ममता ने यह दिखाने की भी कोशिश की कि बीजेपी को बंगाल और नेताजी के बारे में पूरी समझ नहीं है।
रोटेटिंग कैपिटल का कॉन्सेप्ट नहीं है नया
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा, ‘मेरा मानना है कि भारत के पास 4-4 राजधानियां होनी चाहिए, जिनका रोटेशन जारी रहे। अंग्रेजों ने पूरे देश पर कोलकाता से ही शासन किया। हमारे देश में केवल एक राजधानी क्यों होना चाहिए? हालाँकि, रोटेशन की अवधारणा नई नहीं है। जम्मू और कश्मीर की भारत में भी दो राजधानियाँ हैं – श्रीनगर और जम्मू। गर्मियों के दौरान जम्मू में श्रीनगर राज्य की राजधानी बना हुआ है। आंध्र प्रदेश की जगन मोहन रेड्डी सरकार भी राज्य के लिए 3-3 राजधानियाँ बनाना चाहती है। हालाँकि, ये उदाहरण राज्य की राजधानियों के हैं। राष्ट्रीय राजधानी की बात अलग है।

