अमेरिका में जो बाइडेन युग शुरू होते ही लग रहा था की चीन के रिश्ते में सुधार होगा लेकिन ऐसा होता नजर नहीं आ रहा है क्योकि अमेरिका में नई सरकार आते ही चीन और यूएस के बीच एक बार फिर टकहराट बढ़नी शुरू हो गई है.विगत दो दिनों में लगातार चीनी लड़ाकू विमानों ने ताइवान की सीमा पार कर हवाई क्षेत्र में उड़ान भरी, तो अमेरिका ने भी अपना जंगी बेड़ा यूएस एयरक्राफ्ट कैरियर दक्षिणी चीन सागर में तैनात कर दिया | अमेरिका का कहना है कि उसके ये युद्धपोत ‘समुद्र की स्वतंत्रता’ मिशन को बढ़ावा देने के लिए आए हैं
असल में चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता हैं वह कई बार सीमा पार कर ताइवान के छेत्र में घुसता रहता हैं बीते शनिवार को चीन के कुछ फाइटर्स प्लेन ताइवान सीमा के अंदर घुसे | इन फाइटर्स प्लेन में कुछ विमान परमाणु हमला करने में भी सक्षम थे | जिसके तुरंत बाद अमेरीका के युद्धपोत भी दक्षिण चीन सागर में पहूच गए |
इसके बाद हरकत में आई ताइवानी वायु सेना ने अपनी मिसाइलों का मुंह चीन के विमानों की तरफ मोड़ दिया. इतना ही नहीं, ताइवानी एयरफोर्स के लड़ाकू विमानों ने तुरंत उड़ान भरकर चीन को जवाबी कार्रवाई की चेतावनी भी दी, जिसके बाद चीन के जहाज ताइवानी एयरस्पेस से भाग खड़े हुए. ताइवान ने प्रतास द्वीप समूह के आसपास के क्षेत्र में अपने वायु रक्षा पहचान क्षेत्र में चीनी बमवर्षक और लड़ाकू जेट के घुसपैठ को पकड़ा था.| अमेरिकी राजनयिक की ताइवान यात्रा से चीन भड़का हुआ है. इस कारण दोनों देशों के बीच तनाव में फिर से इजाफा देखा जा रहा है. गौरतलब है कि चीनी सेना ताइवान को लगातार युद्ध की धमकियां दे रही है।.
अमेरिकी मिलिट्री के मुताबिक ‘समुद्र सबका’ को लेकर ये कदम उठाया गया है. गौरतलब है कि हिंद महासागर में चीन की बढ़ती गतिविधियों पर लगाम लगाने के लिए अमेरिका ने अपने तीन एयरक्राफ्ट कैरियर्स को इस इलाके में तैनात किया है. इनमें यूएसएस निमित्ज वर्तमान में ईरान से तनाव के बीच खाड़ी देशों के पास तैनात है, वहीं यूएसएस रोनाल्ड रीगन हिंद महासागर में गश्त कर रहा है.दो तिहाई व्यापार इस क्षेत्र से होकर गुजरता है, इसलिए यह बहुत जरूरी है कि हम अपनी मौजूदगी यहां बरकरार रखें और कानून का राज कायम रखें |
