पिछले साल सितंबर में मानसून सत्र के दौरान केंद्र सरकार द्वारा पास किए गए नए कृषि कानूनों को लेकर देशभर के किसान दो महीने से आंदोलित हैं। कल 29 जनवरी से संसद का बजट सत्र शुरू होने वाला है।जो दो चरणों में होगा। कोरोना संक्रमण के कारण संसद की कई परंपराओं को दरकिनार करते हुए नए प्रोटोकोल के हिसाब से संसद का बजट सत्र चलेगा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण एक फरवरी को बजट पेश करेंगी ,लेकिन उससे पहले सरकार सदन में आर्थिक सर्वेक्षण पेश करेगी। कृषि कानूनों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन को देखते हुए बजट सत्र के हंगामेदार होने के आसार अभी से नजर आ रहे हैं। किसान आंदोलन ,भारत -चीन सीमा विवाद ,देश की चरमराई अर्थव्यवस्था और व्हाट्सएप चैट्स लीक होने के मामले जैसे कई मुद्दों पर विपक्ष सदन में केंद्र की मोदी सरकार को घेरने की तैयारी में है।
भारतीय परंपरा के अनुसार ही इस साल के इस पहले संसद सत्र की शुरुआत महामहिम राष्ट्रपति के अभिभाषण से होगी। उस दिन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद संसद के दोनों सदनों के संयुक्त अधिवेशन को संबोधित कर सरकार की योजनाओं का ब्यौरा पेश करेंगे। ऐसा पहली बार ही होगा जो संसद में राष्ट्रपति के अभिभाषण के दौरान भी सदस्य सेंट्रल हॉल के अलावा लोक सभा और राज्य सभा में बैठेंगे। सत्र के पहले ही दिन सरकार 2020 -21 के लिए आर्थिक सर्वेक्षण भी संसद में पेश करेगी। बजट सत्र दो भागों में होगा। पहला सत्र 15 फरवरी तक चलेगा जबकि दूसरे दौर में आठ मार्च से आठ अप्रैल तक चलेगा।

विपक्षी नेताओं के साथ बैठक करेंगे पीएम
किसान आंदोलन के बीच शुरू हो रहे संसद का बजट सुचारू तरीके से चले इसको लेकर पीएम मोदी ने तीस जनवरी को संसद में विपक्ष के नेताओं की बैठक बुलाई है। माना जा रहा है कि एनडीए के घटक दल और विपक्षी पार्टियां भी अलग से बैठकें आयोजित करेंगी जिससे पूरा सत्र बिना किसी रुकावट के चल सके। वहीं विपक्ष संसद में सरकार को घेरने की रणनीति बनाने में जुटा है। इसके लिए विपक्षी दलों ने अपनी मंशा भी जाहिर कर दी है।
अहम रहेगा किसानों का मुद्दा
बजट सत्र के दौरान सदन में विपक्ष जिन मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की तैयारी कर रहा है उनमें नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का आंदोलन सबसे अहम है। कांग्रेस के लोकसभा में मुख्य सचेतक कोडिकुनिनल सुरेश ने पहले ही साफ कह दिया है कि सरकार नए कृषि कानूनों को निरस्त करने की मांग को नहीं मानेगी तो संसद सत्र में किसानों के आंदोलन के मुद्दे को हमारी पार्टी जोरशोर से उठाएगी। कांग्रेस ने कहा है कि संसद सत्र के लिए एक संयुक्त रणनीति बनाने के लिए समान विचारधारा वाले दलों के साथ भी संपर्क में हैं और मुख्य मुद्दा किसान आंदोलन है। कांग्रेस के अलावा समाजवादी पार्टी भी कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के समर्थन में लगातार उत्तर प्रदेश की सड़कों पर आंदोलन कर रही है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव किसानों के मुद्दे पर सरकार को घेरने में जुटे हैं। ऐसे में कहा जा रहा है कि सपा भी संसद में कृषि कानूनों के खिलाफ आवाज उठाएगी। तृणमूल कांग्रेस के सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने कहा है कि ममता बनर्जी की भूमि और किसानों के मुद्दे पर प्रतिबध्द है। संसद सत्र में केंद्र सरकार को कृषि कृषि कानूनों को निरस्त करने के लिए एक विधेयक पेश करना चाहिए और इसे अधिनियम में बदलना चाहिए। दूसरी ओर किसानों के आंदोलन पर इस बार सदन में बीजेपी को एनडीए के अपने पुराने सहयोगी रहे राजनीतिक दलों के विरोध का सामना करना पड़ सकता है। शिवसेना और अकाली दल इनमें से प्रमुख है जो सरकार इस कोशिश में लगी है कि किसानों के मुद्दे पर विपक्षी की रणनीति से कैसे निपटा जाए ताकि संसद में बांधा ना आ सके।

भारत चीन सीमा विवाद पर विपक्ष के निशाने पर सरकार
बजट सत्र में भारत -चीन सीमा विवाद का मुद्दा भी अहम रहने वाला है। कांग्रेस से लेकर सपा तक चीन मुद्दे पर सरकार को देश की सुरक्षा करने में असफल बताती आ रही है। ऐसे में विपक्ष सदन में इस मुद्दे को उठा सकते हैं। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी लगातार चीन मुद्दे पर सरकार के खिलाफ हमलावर हैं। उन्होंने अरुणाचल की जमीन चीनी गांव के निर्माण को लेकर सीधे प्रधानमंत्री पर सवाल खड़े किए हैं।

देश की लगातार गिरती अर्थव्यवस्था पर सरकार को घेरेगा विपक्ष
पिछले एक साल से कोरोना महामारी से खस्ताहाल पड़ी देश की अर्थव्यवस्था को लेकर विपक्ष संसद में सरकार के खिलाफ हमलावर हो सकता है। आरजेडी नेता और राज्य सभा के सदस्य मनोज झा ने कहा है कि देश की लगातार गिरती अर्थव्यवस्ता सबके लिए बड़ी चिंता का विषय है। पहले ही देश की अर्थव्यवस्था लचर थी और उस पर महामारी का प्रकोप होने से देश के युवाओं के सपनों के साथ -साथ कामगारों की भी कमर टूट गई है। बड़े स्तर पर लोगों का रोजगार चला गया है और उनके सामने कोई विकल्प नहीं है। सरकार भी अभी तक इस पर कुछ नहीं बोल रही है ,जिससे लोगों की हिम्मत बढ़े। यह मसला अतिआवश्यक है और हम इसे सदन में उठाकर सरकार को जगाएंगे। इस मसले पर कांग्रेस भी सरकार के खिलाफ जिस तरह से आक्रमक रुख अपनाया है ,उससे जाहिर है कि सदन में देश की चरमराई अर्थव्यवस्था को लेकर घमासान हो सकता है।