स्वतंत्र पत्रकार मनदीप पुनिया को रोहिणी कोर्ट से जमानत मिल गई है और वह अब बाहर आ चुके है। मनदीप पुनिया को दिल्ली पुलिस ने सिंघु बार्डर से गिरफ्तार किया था। मनदीप पिछले कई दिनों से किसान आंदोलन को कवर कर रहे है। उन पर सरकारी कर्मचारी के काम में बाधा डालने, सरकारी कर्मचारी पर हमला करने, जान-बूझकर व्यवधान डालने और गै़र-क़ानूनी हस्तक्षेप करने के आरोप लगाए गए थे। दिल्ली पुलिस ने मनदीप के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 186, 353, 332 और 341 के तहत मुकदमा दर्ज किया हैं।
जेल से रिहा होने के बाद पुनिया ने एक निजी समाचार टीवी चैनल से बातचीत में अपने पैर पर लिखे नोट्स दिखाएं। उन्होंने कहा कि ये जेल में बंद किसान प्रदर्शनकारियों के नोट्स हैं जिन्हें वे अपने रिपोर्ट में लिखेंगे। वह लिखते हैं, “एक पत्रकार के रूप में यह मेरी ज़िम्मेदारी थी कि मैं इस आंदोलन को सच्चाई और ईमानदारी से रिपोर्ट करूं। मैं ऐसा करने की कोशिश कर रहा था। मैं आंदोलन स्थल पर किसानों पर हमला करने में शामिल लोगों के बारे में पता लगाने की कोशिश कर रहा था। गिरफ़्तारी से मेरा काम बाधित हुआ और मेरा क़ीमती समय ख़राब हुआ। मुझे लगता है कि मेरे साथ ग़लत हुआ। पुलिस ने मुझे मेरा काम करने से रोका। यही मेरा अफसोस है। उस हिंसा का नहीं जो मेरे साथ हुई। इस घटना ने रिपोर्टिंग करने के मेरे संकल्प को मज़बूत किया है। ग्राउंड ज़ीरो से रिपोर्टिंग करना सबसे जोख़िम भरा, लेकिन पत्रकारिता का सबसे ज़रूरी हिस्सा है।”
शनिवार शाम एक वायरल वीडियो के ज़रिये पुनिया की गिरफ़्तारी का पता चला था, जिसमें पुलिस एक व्यक्ति को खींचकर ले जाने की कोशिश करती हुई दिख रही थी। हालांकि पहले लोगों को इसके बारें में बाबत जानकारी नहीं थी, लेकिन जैसे ही लोगों को पता चला तो सोशल मीडिया पर मनदीप की रिहाई की मांग उठने लगी। मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट ने रविवार को इस मामले की सुनवाई करते हुए उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया था। इसके बाद से मनदीप पुनिया तिहाड़ के केंद्रीय कारागार संख्या 8 में क़ैद थे। इसके बाद तमाम स्वतंत्र पत्रकारों ने मनदीप के समर्थन में मार्च निकाला। बाद में रोहिणी कोर्ट के चीफ़ मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट सतबीर सिंह लांबा ने मंगलवार को उन्हें 25000 रुपये के निजी मुचलके पर ज़मानत दी थी।
सरकार के खिलाफ बोलने पर कई पत्रकारों को जेल जाना पड़ रहा है। मनदीप पुनिया के अलावा 31 अगस्त 2019 को पत्रकार पंकज जायसवाल के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज कराई गयी। कारण यह था कि पंकज जायसवाल ने सरकारी स्कूल में व्याप्त अनियमितता और ‘मिड-डे’ मील में बच्चों को नमक रोटी खिलाए जाने से संबंधित ख़बर छापी थी। आज़मगढ़ के एक स्कूल में छात्रों से झाड़ू लगवाने की घटना को रिपोर्ट करने वाले छह पत्रकारों के ख़िलाफ़ 10 सितंबर, 2019 को एफ़आईआर दर्ज की गयी। पत्रकार संतोष जायसवाल के ख़िलाफ़ सरकारी काम में बाधा डालने और रंगदारी मांगने संबंधी आरोप दर्ज किये गए। हाल के समय में जिन पत्रकारों पर आपराधिक मामला दर्ज किया गया है उनमें ‘इंडिया टुडे’ के पत्रकार राजदीप सरदेसाई, ‘नेशनल हेराल्ड’ की वरिष्ठ सलाहकार संपादक मृणाल पांडे, ‘क़ौमी आवाज़’ के संपादक ज़फ़र आग़ा, ‘द कारवां’ पत्रिका के संपादक और संस्थापक परेश नाथ, ‘द कारवां’ के संपादक अनंत नाथ और इसके कार्यकारी संपादक विनोद के. जोस का नाम भी शामिल है।

