म्यांमार में तख्तापलट होने के बाद वहां के लोगों द्वारा काफी प्रदर्शन हो रहे हैं। सेना के विरोध में साथ ही दुनिया भर में विभिन्न देशों ने भी आंग सान सू की का समर्थन कर म्यांमार की सेना को हिदायत देते हुए कहा है कि वे जल्द से जल्द म्यांमार में लोकतंत्रा को बहाल करें। सोशल मीडिया के जरिए, अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं। लेकिन म्यांमार में सेना द्वारा सोशल मीडिया पर उनकी आवाज दबाई जा रही है। बहरहाल 4 फरवरी की रात को ट्विटर पर भी पाबंदी लगा दी है। इस बात की जानकारी इंटरनेट की निगरानी करने वाले समूह ‘नेटब्लाक्स’ ने दी है। म्यांमार में चुने हुए नेताओं को सत्ता सौंपने की मांग के साथ 5 फरवरी को सैकड़ों की संख्या में छात्र और शिक्षक सड़कों पर उतरे थे।
म्यांमार की राजधानी नेपिदाऊ में सेना की कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद लोगों ने जमकर प्रदर्शन किया। साथ ही सुरक्षा- व्यवस्था समेत देश के अन्य भागों में विरोध प्रदर्शन हुए। यंगून के दो विश्वविद्यालयों में प्रदर्शनकारियों ने विरोध के तौर पर तीन उंगलियों से सलामी दी। यंगून विश्वविद्यालय में प्रोफेसर डाॅ नवि थाजिन ने सेना का विरोध जताते हुए कहा, ‘हम उनके साथ एकजुट नहीं हो सकते।’ आम लोगों के साथ ही विपक्ष ने भी देश के सबसे बड़े शहर यंगून में हर रोज शाम को खिड़कियों पर खड़े होकर बर्तन बजाना शुरू किया है। अब लोग तख्तापलट के खिलाफ सड़कों पर भी उतरना शुरू कर रहे हैं।
इस विरोध प्रदर्शन में छात्र और चिकित्साकर्मी भी शामिल हैं, जिनमें से कुछ ने काम करने से इंकार कर दिया है। पूर्व में सैन्य तानाशाही के खिलाफ हुए आंदोलन में भी छात्रों की अहम भूमिका रही है। सेना ने विरोध को दबाने के मकसद से विपक्ष के कुछ नेताओं को गिरफ्तार करने के साथ ही फेसबुक पर भी रोक लगा रखी है। ताकि प्रदर्शनकारी एकत्र होने की योजना न बना सकें। आपको बता दें कि 1 फरवरी 2021 को म्यांमार की सेना ने देश की स्टेट काउंसलर आंग सान सू की के समेत वहां राष्ट्रपति को गिरफ्तार कर नजरबंद कर दिया हैं साथ ही म्यांमार में सेना ने कार्यकारी राष्ट्रपति द्वारा एक वर्ष के आपातकाल की भी घोषणा की है।

