उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की आईटी सेल में कार्य कर रहे 28 साल के एक नौजवान पार्थ श्रीवास्तव ने सुसाइड कर लिया। सुसाइड करने से पहले उसने दो पेज का पत्र लिखा है। जिसमें यह संकेत जा रहे हैं कि मुख्यमंत्री का आईटी सेल भी राजनीति से अछूता नहीं है। इसी राजनीति का शिकार हुआ पार्थ श्रीवास्तव। पार्थ श्रीवास्तव नाम के इस नौजवान ने लखनऊ स्थित अपने घर वैशाली एनक्लेव इंदिरानगर में रस्सी से फंदा बनाकर सुसाइड कर लिया।
पार्थ श्रीवास्तव की आत्महत्या को सीएम की सोशल मीडिया टीम में गुटबाज़ी और मानसिक दबाव में उठाया गया कदम माना जा रहा है। दो पृष्ठ के सुसाइड में लिखा है कि मेरी आत्महत्या को हत्या समझा जाये। सुसाइड नोट में बहुत कुछ साफ लिखा है।उसने जो सुसाइड नोट ट्वीट किया था उसमे अपनी टीम के दो सीनियर पर उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए थे। पाक ने जिन सीनियर पर आरोप लगाए हैं वह शैलजा और उनका साथ देने वाले पुष्पेंद्र सिंह है। शैलजा श्रीवास्तव माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय के एमबीए विभाग की पूर्व छात्रा रह चुकी है। इसके अलावा गोरखपुर के दो लोगों के नाम भी इस सुसाइड नोट में थे। सुसाइड नोट में और भी कई लोगों का नाम लिखा है।

28 साल के पार्थ के सुसाइड नोट के अनुसार उसे इस कदर प्रताड़ित किया गया कि उसने जिदंगी जीने से आसान मौत को गले लगाना समझा।
फिलहाल पार्थ के सुसाइड के बाद आत्महत्या से जुड़ा ट्वीट भी डिलीट कर दिया गया, जिससे इस मामले में संदेह और भी गहराता जा रहा है। एक प्रतिभाशाली युवा की आत्महत्या कई संदेहो और सवालों को जन्म देती है।
चौकाने वाली बात यह है कि पार्थ ने अपने जिस सुसाइड नोट को सीएम के साथ ट्वीट में सूचना निदेशक शिशिर सिंह को टैग किया था। वह ट्वीट ही रहस्यमय परिस्थितियों में डिलीट भी कर दिया गया। पार्थ के दोस्त आशीष पांडे ने सोशल मीडिया पर पार्थ के ट्विटर और फेसबुक पोस्ट का स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए “जस्टिसफॉरपार्थ” कैंपेन शुरू किया है। जिसके बाद यह सुसाइन नोट वायरल हो गया।

मौत से पहले पार्थ ने दो पेज का पत्र लिखा है। जिसमें उसने लिखा हैं की ‘प्रणय भैया ने मुझसे कहा था कि मुझसे बात करेंगे पर उन्होंने पुष्पेंद्र भैया से रात 12:40 पर क्रॉस कॉल करके उनसे अपनी सफाई दिलवाई। पुष्पेंद्र भैया ने जानबूझकर व्हाट्सएप कॉल किया ताकि उनकी बातें रिकॉर्ड न हो सकें। कॉल करके भी उन्होंने सारा दोष संतोष भैया पर डाला और इस बात का यकीन दिलाया कि वह मेरे शुभचिंतक ही रहे हैं। जबकि सत्य तो यह है कि वह सिर्फ और सिर्फ शैलजा जी के शुभचिंतक रहे हैं। हमेशा से पुष्पेंद्र भैया शैलजा जी के अलावा कभी और किसी के लिए चिंतित नहीं रहे। बाकियों की छोटी से छोटी गलती पर पुष्पेंद्र भैया हमेशा नाराज होते रहे। शैलजा जी और महेंद्र भैया सिर्फ उनका गुणगान करते रहें।

मुझे आश्चर्य प्रणय भैया पर होता है कि वह यह सब देखने समझने के बावजूद पुष्पेंद्र भैया का साथ कैसे व क्यों देते रहे। मैंने जब से यह कार्य शुरू किया तब से सबसे ज्यादा इज्जत प्रणय भैया को ही दी। मैंने उनसे सीखा कि सिर्फ काम बोलता है और इंसान को उसका काम ही पहचान दिलाता है। एक तरफ पुष्पेंद्र भैया जो सिर्फ दूसरों की कमियां निकालते दिखे तो दूसरी तरफ प्रणय भैया दिखे जो अपनी कार्य से अपना नाम बताते दिखे।

मैंने प्रणय भैया को अपना आदर्श माना और सिर्फ काम के द्वारा अपना नाम बनाना चाहा, मुझसे गलतियां भी हुई पर वह गलतियां न दोहराने की पूरी कोशिश की। परंतु शैलजा जी जो सिर्फ चाटुकारिता कर अपनी जगह पर थीं, उन्होंने मेरी छोटी से छोटी गलती को सबके सामने उजागर कर मुझे नकारा साबित कर दिया। शैलजा जी को बहुत-बहुत बधाई। मेरी आत्महत्या एक कत्ल है जिसके जिम्मेदार और सिर्फ राजनीति करने वाली शैलजा और उनका साथ देने वाले पुष्पेंद्र सिंह हैं। ।
अभय भैया और महेंद्र भैया को इस बात का हल्का सा ज्ञान भी नहीं कि लखनऊ वाले कार्यालय में क्या चल रहा था। मैं आज भी मरते दम तक महेंद्र भैया और अभय भैया की अपने माता-पिता जितनी इज्जत करता हूं।’
इसी के साथ पार्थ की बहन की एक वीडियो भी सामने आई है । जिसमें वह कह रही है कि पार्थ अपने काम के प्रति बहुत वफादार था। वह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कोई बुराई नहीं सुनता था । अगर हम सरकार की कोई कमी बताते थे तो वह तुरंत उसका ऑब्जेक्शन करता और कहता कि यह कमी बहुत जल्द पूरी हो जाएगी। साथ ही उसकी बहन का कहना है कि उसने अपने ऑफिस मैं कुछ सीनियर के द्वारा उसको मानसिक प्रताड़ना की बात कही थी। लेकिन हमें पता नहीं था कि मामला इतना गंभीर हो जाएगा। चूँकि यह मामला उच्च स्तर का है। इसलिए उम्मीद है की इसकी जाँच भी मुख्यमंत्री की तरफ से जल्द और निष्पक्ष कराई जायेगी।

