पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इन दिनों फुलफाॅर्म में ‘खेला’ खेलती नजर आ रही हैं। राज्य विधानसभा चुनावों में पीएम मोदी और गृह मंत्री शाह को परास्त करने वाली दीदी का टारगेट अब 2024 के आम चुनावों में विपक्ष का नेता बनना बताया जा रहा है। पार्टी सूत्रों की मानें तो दीदी ने इस लक्ष्य को साधने की नीयत के चलते ही लोकसभा एवं राज्यसभा में पार्टी सांसदों को पूरी ताकत के साथ तृणमूल का झंडा बुलंद करने की हिदायत दी है। मानसून सत्र के पहले ही दिन से तृणमूल सांसदों की आक्रामक शैली इस हिदायत का ही परिणाम है। पार्टी के राज्यसभा सांसद शान्तनु सेन ने जिस अंदाज में सदन भीतर वक्तव्य दे रहे नए आईटी मंत्री अश्विन वैष्णव के हाथों से उनका भाषण छीन फाड़ डाला उससे स्पष्ट है कि ममता इस मानसून सत्र के दौरान कांग्रेस व अन्य भाजपा विरोधी दलों को पछाड़ हर कीमत पर मुख्य विपक्षी चेहरा बनना चाह रही है। जानकारों का दावा है कि ममता की इस बाबत एनसीपी प्रमुख शरद पवार संग गुप्त डील भी हो चुकी है। इस डील के मुताबिक 2022 जुलाई में प्रस्तावित राष्ट्रपति चुनाव से ठीक पहले ममता बनर्जी की मदद से शरद पवार विपक्ष का साझा उम्मीदवार बनने का प्रयास करेंगे। शरद पवार का मानना है कि यदि 2022 में होने जा रहे पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में भाजपा का प्रदर्शन कमतर होता है तो जुलाई में रामनाथ कोविंद के स्थान पर भाजपा अपना उम्मीदवार जिता पाने में सफल नहीं होगी। इस गणित को सामने रख पवार स्वयं राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी कर सकते हैं। साथ ही शरद बाबू का पूरा प्रयास 2024 में ममता को विपक्षी दलों का संयुक्त पीएम चेहरा बनाना होगा।
ममता की निगाहें दिल्ली पर

