बिहार के राजनितिक गलियारों चर्चा हो रही है कि उपेंद्र कुशवाहा के कंधे पर बंदूक किसी और का है
ऐसा लगता है कि बिहार में राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के प्रमुख उपेंद्र कुशवाह ट्रैप में फंस गए। वह भी लोकसभा चुनाव के ठीक पहले। उनके दो विधायकों को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक तरह से हाईजैक कर लिया। यह बात नीतीश की छवि के विरूद्ध है।
उपेंद्र कुशवाह का इन दिनों लगातार सुर्खियों में बने रहना बिहार की राजनीति की नयी करवट का पैमाना है। पहले उनकी टसल भाजपा के साथ हुई। वे अपनी पार्टी के लिए चार सीटें चाहते थे। जबकि भाजपा एक या दो से ज्यादा सीट देने को तैयार नहीं हो रही है। इसी बीच उनकी मुलाकात नतीश कुमार से हुई। तब उन्होंने कहा भी जो उनके बीच आएगा वह फेर में पड़ जाएगा। लेकिन कुछ ही दिन बाद उनके दो विधायकों को तोड़ लिया गया। विरोध करने पर सरकार के इशारे पर उनके कार्यकर्ताओं पर लाठियां भी बरसाई गई।
नीतीश के फेर में पड़ गए उपेंद्र कुशवाह यह बात बाद में समझे। कुशवाहा को इस बात का इल्म नहीं था कि उनके साथ नीतीश इस तरह का गेम करेंगे। कहा तो यह भी जा रहा है कि उपेंद्र कुशवाह के पीछे कोई भाजपाई है जो नीतीश को साधने के लिए उपेंद्र कुशवाह के कंधे पर बंदूक रखकर चला रहा है। क्योंकि सीधे नीतीश कुमार से टकराना मुनासिब नहीं था। भाजपा की चाल सफल हो गई।
बिहार के राजनीतिक समीकरण बदलने को है। उपेंद्र कुशवाह इस बीच शरद यादव से भी मिले। दोनों की मुलाकात के कई राजनीतिक अर्थ लगाए जा रहे हैं। यह भी कहा जा रहा है कि एनडीए में टूट तय है। बहुत संभव है उपेंद्र कुशवाह राजग छोड़कर राजद यानी लालू प्रसाद के साथ चले जाएं। लेकिन राजद में भी इनको दो लोकसभा से ज्यादा सीट मिलने वाली नहीं है। अब यह उपेंद्र कुशवाह को तय करना है कि दुश्मनों की चालों से घायल होने के बाद वे राजग में बने रहे, राजद में जाएं या बिल्कुल अकेले ही रहे।

