संघ एवं भाजपा से जुड़ी एक महिला कार्यकर्ता ने प्रदेश भाजपा संगठन महामंत्री संजय कुमार पर यौन उत्पीड़न के जो गंभीर आरोप लगाए हैं उससे उत्तराखण्ड के लोग हैरान हैं। आश्चर्यजनक यह है कि महिला अपनी पार्टी के बड़े नेताओं से महामंत्री की हरकतों की शिकायत करती रही। लेकिन उसकी बात सुनने के बजाए मामले को दबाने के प्रयास हुए। हालांकि चुनावी माहौल में प्रतिकूल असर पड़ता देख संजय कुमार को पद से हटा दिया गया है। लेकिन वोटों का समीकरण देखते हुए मामले को दबाने के आरोपी देहरादून महानगर अध्यक्ष विनय गोयल के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं हुई
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़े लोगों पर यौन उत्पीड़न और बलात्कार के आरोप लगें तो हैरानी होनी स्वाभाविक है। लोग हैरान हैं कि क्या संघ के भीतर बदलाव आ चुका है? संघ के पूर्व प्रांत प्रचारक और वर्तमान में भाजपा के राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री शिव प्रकाश पर पश्चिम बंगाल की एक महिला बलात्कार और गर्भपात करवाने का आरोप लगा चुकी है। पश्चिम बंगाल की एक महिला ने संघ के नेता अमलेन्दु चटोपाध्याय, विद्युत चटर्जी और शिव प्रकाश के खिलाफ 31 अगस्त 2018 को मुकदमा दर्ज करवाया है। जानकारी के अनुसार पुलिस ने धारा 120 बी, 417, 376, 313 और 406 में मुकदमा दर्ज किया है। अब भाजपा के उत्तराखण्ड प्रदेश महामंत्री (संगठन) संजय कुमार पर यौन उत्पीडन के आरोप स्वयं संघ ओैर भाजपा से जुड़ी एक महिला कार्यकर्ता ने लगाये हैं। चुनावी मौसम में अपने प्रदेश महामंत्री (संगठन) पर इस तरह से यौन उत्पीड़न के आरोप लगने के बाद भाजपा और संघ पूरी तरह से सकते में हैं। फजीहत से बचने के लिए संजय कुमार को तो पद मुक्त कर दिया गया। लेकिन इस पूरे मामले में कुछ ऐसा लगा कि सरकार, भाजपा संगठन और संघ पूरी तरह से संजय कुमार के बचाव में हैं।
हाल में भाजपा और संघ से जुड़ी एक महिला कार्यकर्ता ने संजय कुमार पर यौन उत्पीड़न करने का आरोप लगाकर सनसनी फैला दी। चुनावी मौसम के चलते प्रदेश भाजपा संगठन और सरकार के माथे पर परेशानी के बादल छाने लगे। बताया जाता है कि पीड़िता ने प्रमाण के साथ संजय कुमार पर आरोप लगाए। लेकिन भाजपा के देहरादून महानगर अध्यक्ष विनय गोयल ने इस मामले में कार्यवाही करने के बजाये इसे दबाने का प्रयास किया। इससे भाजपा में खासा हंगामा मचा हुआ है। यही नहीं संघ
प्रचारकों में भी इस मामले को लेकर खासा रोष है।
10 नवम्बर को पीड़िता ने देहरादून पुलिस को ई मेल से तहरीर दी। इस तहरीर के मुताबिक संजय कुमार उसके साथ अश्लील बातें और हरकतें करते थे जिसकी शिकायत पार्टी के बड़े पदाधिकारियों से की गई। लेकिन पीड़िता की किसी ने मदद नहीं की। इसके बाद उसने संजय कुमार की अश्लील बातों को फोन पर रिकॉर्ड करके प्रमाण बताये। लेकिन उसका फोन ही उससे छीन लिया गया। इसकी सूचना पीड़िता ने 4 अक्टूबर 2018 को धारा पुलिस चौकी में दी। लेकिन पुलिस ने केवल मोबाईल की सूचना दर्ज की। पुलिस द्वारा इस मामले की जांच पुलिस अधीक्षक देहात को सौंप देने से मामला और भी दिलचस्प हो गया है। अब कम से कम संजय कुमार के खिलाफ कानूनी कार्यवाही होने का रास्ता बनता दिख रहा है।
प्रदेश की राजनीति में हलचल मचाने वाले संजय कुमार का उत्तराखण्ड में ज्यादा पुराना राजनीतिक इतिहास नहीं है। वर्ष 2012 में उत्तराखण्ड भाजपा के प्रदेश महामंत्री (संगठन) के पद पर संजय कुमार की नियुक्ति होने के साथ ही उनका पदार्पण प्रदेश में हुआ। लेकिन जिस तरह से संजय कुमार ने प्रदेश भाजपा में अपना बड़ा दखल बनाया और सरकार के साथ-साथ संगठन में हर एक उनकी भाषा बोलने को मजबूर होने लगा उससे यह तो स्पष्ट है कि संजय कुमार का कद उत्तराखण्ड भाजपा और संघ में बेहद बड़ा रहा है।

संघ के तमाम नियमों और कायदों को दरकिनार करने वाले संजय कुमार संघ के इतिहास में शायद पहले ऐसे संगठन महामंत्री हैं जिनके लिए प्रदेश भाजपा कार्यालय में अति आधुनिक सुविधाओं से संपन्न आवास बनाया गया। जबकि संघ के नियमों के अनुसार प्रांत प्रचारक और संगठन मंत्री अपनी तैनाती वाले स्थान या प्रदेश में आवास नहीं रख सकता। यहां तक कि वह प्रतिदिन एक कार्यकर्ता के घर में विश्राम और जलपान आदि करने को बाध्य है। बावजूद इसके संजय कुमार ने अपने लिए कार्यालय के साथ-साथ एक निजी स्टाफ तक रखा हुआ था।
ऐसा नहीं है कि संजय कुमार के खिलाफ पहले कभी कोई मामला सामने नहीं आया हो। पूर्व में संजय कुमार के आवास में सीवर लाईन बंद होने पर सफाई करने पर उसमें फंसे हुये इस्तेमाल किये गये ढेर सारे गर्भनिरोध मिलने की बात सामने आई थी। यही नहीं एक बार उनके निजी कर्मचारी के एक महिला के साथ आवास में बंद कमरे में पकड़े जाने पर खासा विवाद हो चुका है। बावजूद इसके न तो भाजपा और न ही संघ द्वारा संजय कुमार पर कोई लगाम लगाई जा सकी।
सबसे बड़ी हैरानी तो इस बात की है कि जो भाजपा प्रधानमंत्री मोदी के ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ के नारे को अपने प्रचार में शामिल करती है उसी भाजपा के महानगर अध्यक्ष विनय गोयल अपनी कार्यकर्ता की यौन उत्पीड़न की शिकायत रफा-दफा करने का भरपूर प्रयास करते रहे। ऐसे सवाल भाजपा के अन्य बड़े नेताओं पर भी उठते हैं जिनके समक्ष उक्त महिला कार्यकर्ता ने इस मामले की शिकायत की थी।
सोशल मीडिया में संजय कुमार के अश्लील टेलीफोन रिकार्डिंग से साफ है कि वह किस हद तक उक्त महिला के साथ यौन संबंध बनाने को आतुर थे। इसके बावजूद भाजपा नेता और महानगर अध्यक्ष विनय गोयल मौन रहे। हालांकि निकाय चुनाव के चलते भाजपा ने इस मामले में कार्यवाही करते हुए संजय कुमार को पद से हटा दिया है। लेकिन महानगर अध्यक्ष विनय गोयल को हटाने में भाजपा की हालत पस्त हो चली है।
सूत्रां की मानें तो भाजपा ने देहरादून निकाय चुनाव में मेयर के उम्मीदवार सुनील गामा जो कि पर्वतीय मूल के हैं, को टिकट दिया है। जिसके चलते मैदानी मूल के नेताओं खास तौर पर बणिक वर्ग में रोष है। विनय गोयल को महानगर अध्यक्ष से हटाने पर रोष का असर मेयर के चुनाव पर पड़ सकता है। इसी भय से अभी तक भाजपा विनय गोयल पर कार्यवाही करने का साहस नहीं जुटा पा रही है। पार्टी सूत्रां की मानें तो निकाय चुनाव के बाद विनय गोयल पर गाज गिर सकती है।
आने वाले समय में प्रदेश भाजपा की राजनीति में इस मामले का बड़ा असर देखने को मिल सकता है। संघ और मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र रावत के संबधों में पहले ही गर्माहट गायब है। संघ पहले ही सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े कर चुका है। संजय कुमार के पक्ष में भाजपा और संघ का एक बड़ा धड़ा खड़ा हो चुका है। जबकि संघ के प्रचारकां में इस बात को लेकर खास रोष है कि कुछ व्यक्तियों के कारनामों से प्राचारकों के चरित्र पर सवाल उठाने का प्रयास किया जा रहा है। इसी को लेकर प्रचारकों ने एक बैठक करके संघ प्रमुख मोहन भावगवत को पत्र तक लिखा है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत के संबध संजय कुमार के साथ कुछ ज्यादा सहज नहीं बताए जाते हैं। माना जाता है कि सरकार को सलाह देने में तो संघ के नेता सबसे आगे रहते हैं लेकिन सरकार के पक्ष में कोई बात करने से बचते रहे हैं।
राजनीतिक जानकारों की मानें तो आज आरएसएस के प्रचारक ओैर संगठन के बड़े नेता सीधे तौर पर भाजपा की अंदरूनी राजनीति में हस्तक्षेप करने और अपने को राजनीतिक चेहरे के तौर पर स्थापित कर चुके हैं। संजय कुमार इसका सबसे बड़ा प्रमाण हैं। कायदे से संगठन महामंत्री को एक स्थान पर न रहकर अपने पूरे क्षेत्र के भ्रमण करना होता है। लेकिन संजय कुमार ने इसके विपरीत प्रदेश भाजपा कार्यालय में स्थाई तौर पर ठिकाना बनाया। भाजपा के हर वार्ता और मीडिया ब्रीफिंग में उन्हें प्रमुख वक्ता के तौर पर देखा जाता रहा है। इसी तरह आरएसएस के विभाग प्रचारक कभी मीडिया में भी नहीं दिखाई देते थे। लेकिन आज वे भाजपा के कार्यक्रमों में एक प्रमुख वक्ता के तौर पर देखे जा रहे हैं। विधानसभा चुनाव में टिकट बंटवारा रहा हो, या फिर भाजपा के सांगठानिक पदां की बात हो तकरीबन सभी में संघ पृष्ठभूमि के ही नेताओं का हस्तक्षेप दिखाई दिया है। एक तरह से यह भी कहा जा सकता है कि भाजपा के प्रदेश संगठन के समांतर संघ का भी संगठन चल रहा है। जो नेता संघ के नेताओं की गणेश प्रक्रिमा जितनी ज्यादा करेगा संगठन में उसको ही तवज्जो दी जायेगी। यह संदेश एक तरीके से संघ के नेताओं द्वारा कई बार दिया जा चुका है। अब देखना होगा कि भाजपा और संघ कैसे इस मामले से अपना दामन बचाते हैं।

