समलैंगिक शादी को मान्यता मिलेगी या नहीं इसे लेकर सर्वोच्च न्यायालय की संवैधानिक बेंच का फैसला जल्द ही आ सकता है। चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ के नेतृत्व में पांच जजों की संवैधानिक बेंच द्वारा मामले की सुनवाई 18 अप्रैल से की गई थी और 11 मई को फैसला सुरक्षित रख लिया गया था । पांच जजों की बेंच में जस्टिस रविंद्र भट्ट भी है ,जो 20 अक्टूबर को रिटायर होने वाले हैं। ऐसे में कयास लगाया जा रहा है कि इस मामले पर फैसला बीस अक्टूबर से पहले ही आ सकता है।
सर्वोच्च न्यायालय में इस मामले के संबंध में करीब 20 अर्जी दाखिल हैं। इनमें सेम सेक्स कपल, ट्रांसजेंडर , LGBTQ+ आदि शामिल हैं। याचिकाओं में स्पेशल मैरिज एक्ट और हिंदू मैरिज एक्ट के प्रावधान को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता ने इसे चुनौती देते हुए सेम सेक्स शादी को मान्यता देने की गुहार लगाई है। सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार द्वारा कहा गया है कि यह मामला संसद के पाले में रहना चाहिए, वहीं याचिकाकर्ताओं का कहना है कि मामला मौलिक अधिकार से जुड़ा है। इसलिए इसे सुप्रीम कोर्ट को प्रोटेक्ट करना चाहिए।
याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जजमेंट का हवाला देते हुए कहा कि” सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि LGBTQ (लेस्बियन, गे, बाइसेक्सुअल और ट्रांसजेंडर) शख्स को समानता का अधिकार है और साथ ही उन्हें गरिमा के साथ जीने और निजता का भी अधिकार है। इसलिए याचिकाकर्ताओं के अनुसार अपनी पसंद की शादी का अधिकार LGBTQ को भी दिया जाना चाहिए।

