Uttarakhand

उत्तराखण्ड की पहली लीफ आर्टिस्ट

  •     संजय चौहान

 

उत्तराखण्ड में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। आवश्यकता है तो ऐसी प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने और उन्हें मंच प्रदान करने की। ऐसी ही एक प्रतिभा हैं जया वर्मा, जो उत्तराखण्ड की पहली लीफ आर्टिस्ट हैं। जया पत्ते पर चित्रकारी के लिए पूरे देश में प्रसिद्ध हैं। अपनी बेजोड़ कला से पीपल, अंजीर के पत्तों पर लोगों की सुंदर तस्वीर बनाती हैं। इसके अलावा उन्होंने व्हीट स्टिक यानी गेहूं की सूखी डंडियों से भी अद्भुत तस्वीर बनाने का रिकॉर्ड कायम किया है। जया वर्मा हल्द्वानी, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, देहरादून, हरिद्वार से लेकर दिल्ली, चंडीगढ में अपनी लीफ पेंटिंग की प्रदर्शनी लगा चुकी हैं। आज युवाओं के लिए जया प्रेरणा का स्रोत बन चुकी हैं। उनकी इस पहल को देखते हुए अब कई युवा लीफ आर्ट में अपना भविष्य देख रहे हैं

उत्तराखण्ड लोक विरासत के एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री धामी को उनकी तस्वीर भेंट करती जया

कागज पर रंगों के माध्यम से कलाकृति तो हर कोई इंसान बना सकता है, लेकिन जया वर्मा उत्तराखण्ड की पहली लीफआर्टिस्ट हैं जो, पीपल के पत्ते पर आपकी हूबहू तस्वीर बना देती हैं। जया बचपन से ही ड्राइंग करती हैं, लेकिन पिछले पांच सालों से उन्होंने लीफ आर्ट शुरू की। बकौल जया ‘मेरे लिए भी यह नया था और उत्तराखण्ड के लोगों के लिए भी यह आर्ट नई है। लीफ पेंटिंग दो तरीके से बनाई जा सकती है, पहले अगर हमें जाली पर पेंटिंग करनी है तो उसे भिगाकर उसकी जाली निकालने के बाद सुखाकर उस पर पेंटिंग की जाती है जबकि दूसरे तरीके में हरी पत्तियों पर ही पेंटिंग कर उसे सुखाया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया में 2 से 3 दिन लग जाते हैं।’

लीफ आर्टिस्ट जया का जीवन बेहद आभाव और संघर्ष में बीता। उत्तराखण्ड के सीमांत जनपद बागेश्वर के कांडा गांव में जया वर्मा का जन्म देवी लाल वर्मा और मां प्रेमा वर्मा के घर हुआ। पांच भाई-बहनों में दूसरी संतान जया की शादी छोटी उम्र में ही हो गई थी। उस समय वह महज 12वीं कक्षा में पढ़ती थीं। जया तब आगे पढ़ना चाहती थीं लेकिन आगे पढ़ न सकंी। अपनी जिद्द, जुनून और कड़ी मेहनत की बदौलत जया ने एम.ए, बी.एड. की पढ़ाई पूरी की। वर्तमान में वह एक स्कूल में टीचर के रूप में कार्यरत हैं। जया को बचपन से ही पेंटिंग का शौक था, लोग उन्हें पेंटिंग वाली चेली नाम से संबोधित करते थे। जया पिछले पांच सालों से लीफ आर्टिस्ट के रूप में कार्य कर रही हैं। जया की पीपल के पत्ते पर बनाई कलाकारी हर किसी को बेहद पसंद आ रही है। वह अपनी कला के प्रति बेहद समर्पित हैं। उन्होंने अब तक लगभग 1500 बच्चों को पीपल के पत्तों और गेहूं के भूसे से चित्रकारी बनाने का प्रशिक्षण दिया है। आज इनमें से कई बच्चों ने इस कला को आजीविका का साधन बना लिया है। जया वर्मा इसकी उदाहरण हैं कि अगर कोई चाहे तो खुद अपनी किस्मत लिख सकता है। पहाड़ में जन्मी जया को बहुत-सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। खुद अपनी किस्मत लिखी और आज हर कोई उनकी कला को सराह रहा है।


जया ने शुरू में कपड़ा कला (फेबरिक आर्ट) में विशेषज्ञता हासिल कर ली, लेकिन समय के साथ उन्होंने पेंटिंग में अपना ध्यान केंद्रित किया और लीफ आर्ट में महारत हासिल की। जया लीफ आर्ट के अलावा कैनवास, लकड़ी और कांच पर भी काम करती हैं। जया ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रसिद्ध उद्योगपति रतन टाटा, अभिनेता सोनू सूद और उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के अलावा विभिन्न हस्तियों की पत्तों पर पेंटिंग बनाई हैं। जया विभिन्न सोशल मीडिया से अपनी पेंटिंग को बेचती हैं जिससे उन्हें 500 से 3000 रुपए तक की कीमत मिल जाती है जिससे वह आत्मनिर्भर बन रही हैं। देश के विभिन्न राज्यों महाराष्ट्र, राजस्थान, दिल्ली, मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों के सैकड़ों लोग अब तक उनकी पेंटिंग खरीद चुके हैं। लीफ पेंटिंग्स के लिए आप जया वर्मा के इंस्टाग्राम अकाउंट Pahadi_klakar पर जाकर ऑर्डर दे सकते हैं।

पहले मैं फैबरिक आर्ट बनाती थी। जब मैं 10वीं कक्षा में थी तो मेरी बुआ मुझे चम्पावत ले गईं वहां अपनी आर्ट में रंग भरने सीखे। जब लॉकडाउन शुरू हुआ तो मेरा पूरा ध्यान लीफ आर्ट पर केंद्रित रहा। यहीं से प्रदेश के धार्मिक और ऐतिहासिक लीफ आर्ट बनाने शुरू किए। लीफ आर्टिस्ट मैंने साउथ से सीखी। जहां के ज्यादातर लोग जगन्नाथ जी की लीफ आर्ट बनाते हैं। अब काफी ऑर्डर आने लगे हैं।
जया वर्मा, लीफ आर्टिस्ट

 

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