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संकट में अरब मूल के अमेरिकी

इजरायल और हमास युद्ध अभी जारी है। इस युद्ध का खामियाजा अरब देशों के उन नागरिकों पर भारी पर रहा है जो पश्चिमी देशों में रहते हैं। इन देशों में न केवल अरब लोगों के प्रति घृणा की भावना तेज हो रही है, बल्कि अमेरिका में तो मुसलमान और यहूदी दोनों समुदायों के प्रति लगातार अपराध और उत्पीड़न की घटनाएं बढ़ती ही जा रही हैं। इस तरह के बढ़ते उत्पीड़न और अपराध इस बात की पुष्टि करते हैं कि अमेरिका में हो रहे अपराधों का कारण इजराइल और हमास युद्ध की शुरुआत ही है। इन घृणा के कारण बढ़ रहे अपराधों में सबसे ज्यादा अरब लोगों को निशाना बनाया जा रहा है

एंटी-डेफेमेशन लीग (एडीएल) और काउंसिल ऑन अमेरिकन- इस्लामिक रिलेशंस (सीएआईआर) द्वारा जारी एक ताजातरीन रिपोर्ट के अनुसार यहूदी तथा अरब विरोधी और कुछ हद तक मुस्लिम विरोधी घटनाओं में तेजी से वृद्धि देखी गई है। इन संस्थाओं की रिपोर्ट अनुसार 7 अक्टूबर को इजरायल पर हमास के हमले के बाद शुरू हुए इस युद्ध के बाद केवल दो महीनों में 5,031 मुस्लिम और यहूदी विरोधी घटनाएं दर्ज की गई हैं। इन घटनाओं में शारीरिक हमले, बर्बरता और समुदाय विरोधी रैलियां भी शामिल हैं। वर्ष 2022 में 465 यहूदी विरोधी घटनाओं और 1011 मुस्लिम विरोधी घटनाएं दर्ज की गई थी, लेकिन इजराइल और हमास युद्ध के बाद आए अपराध के आंकड़ों में 530 फीसदी से अधिक की वृद्धि देखी गई है।


बर्लिंगटन में फिलिस्तीनी मूल के तीन छात्रों को वर्मोंट में गोली लगने के बाद जांच करती पुलिस टीम

एडीएल के प्रवक्ता जेक हाइमन का कहना है कि ‘ये घटनाएं तो ऐतिहासिक हैं, लेकिन इसके बढ़ते हुए आंकड़ों को देखते हुए इसे सीधे तौर पर इजराइल-हमास युद्ध से जोड़ा जा सकता है क्योंकि अधिकांश घटनाओं में किसी न किसी रूप में संघर्ष का संदर्भ दिया है। हमने अरब विरोधी और मुस्लिम विरोधी अपराधों की रिपोर्टों में समान रूप से परेशान करने वाली वृद्धि पाई है।’ युद्ध के पहले महीने के दौरान पूर्वाग्रह की घटनाओं में ‘अभूतपूर्व’ वृद्धि दर्ज करने के बाद, अमेरिका के सबसे बड़े मुस्लिम वकालत समूह के अनुसार ‘7 अक्टूबर से दिसंबर 2023, तक देश भर में उसके राष्ट्रीय मुख्यालय और अध्यायों में मदद के लिए 15,171 रिपोर्ट दर्ज हुई हैं। ’

कहां से शुरू हुई घटनाएं
13 अक्टूबर 2023 को सैकड़ों लोग हैरिसबर्ग, पेन्सिलवेनिया में फिलिस्तीन के समर्थन में एक शांतिपूर्ण रैली के लिए एकत्र हुए थे। सभी लोग वहां जमा होकर फिलिस्तीन का समर्थन कर रहे थे और उनके हाथों में फिलिस्तीन का झंडा था। उसी समय एक व्यक्ति बंदूक तानते हुए इस्लाम विरोधी टिप्पणियां करने लगा। जिसके कारण अपनी जान जाने के भय से लोग इधर-उधर भागने लगे। इस घटना के बारे में 30 वर्षीय उमर मूसा बताते हैं कि ‘स्टेट कैपिटल की सीढ़ियों पर फिलिस्तीन समर्थकों का कार्यक्रम आयोजित किया गया था। हम सब शांतिपूर्ण तरीके से फिलिस्तीन के समर्थन में वहां इकठ्ठा हुए थे, अचानक ही वह व्यक्ति वहां बंदूक लेकर पंहुचा और हमें डराने लगा। वह हम सभी में भय और आतंक फैलाने के लिए इस रैली में आया था।’ इस घटना के बाद इस व्यक्ति के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी।

ब्रिजव्यू, इलिनोइस में एक मुस्लिम परिवार किराए के मकान में रहता था। जिसके मकान मालिक जोसेफ कजुबा ने 16 अक्टूबर, 2023 को चाकू से हमला कर 6 वर्षीय बच्चे की हत्या कर दी और उसकी मां को भी गंभीर रूप से घायल कर दिया। स्थानीय पुलिस का कहना है कि वह मुसलमानों के प्रति नफरत रखता था। अमेरिका में इस तरह की लगातार घटनाएं देखी जा रही हैं। पीड़ितों का कहना है कि ‘उन पर इन घटनाओं का इतना भय बढ़ गया है कि अब इनके खिलाफ कोई आवाज भी नहीं उठा रहा है और न ही रिपोर्ट दर्ज करा रहा है क्योंकि कानून के रक्षकों के द्वारा भी मुस्लिम समुदाय के लोगों को उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है।’

25 नवंबर 2023 को संयुक्त राष्ट्र अमेरिका के एक छोटे से शहर बर्लिंगटन, वर्मोंट में सड़क चलते तीन फिलिस्तीनी छात्रों की गोली मार कर हत्या करने की कोशिश की गई जिसमें तीनों की जान तो बच गई लेकिन इन तीनों में शामिल एक शख्स की छाती पर गोली लगने से उसका शरीर पूरी तरह लकवाग्रस्त हो गया। इस घटना के चश्मदीद गवाहों का कहना है कि ‘हमलावरों के द्वारा इन तीनों छात्रों की पहचान इनके कपड़ों और बात करने के तरीके से की गई थी। वह तीनों छात्र अरबी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं को मिलाकर बोल रहे थे तथा इन्होंने ‘फिलिस्तीनी लिबास पहना हुआ था जिसमें वह एक अलग किस्म का स्कार्फ पहनते हैं।’ इन तीनों छात्रों का नाम हिशाम अवतानी, किन्नान अब्दल हामिद और तहसीन अहमद बताया गया है। इस तरह की घटनाएं आए दिन अमेरिका की गलियों में देखने को मिल रही हैं।

अमेरिका में बढ़ता घृणा का पैमाना

फिलिस्तीनी मूल के छात्र हिशाम अवतानी, किन्नान अब्दल हामिद और तहसीन अहमद

अमेरिका में हो रही इन आपराधिक घटनाओं की बाबत विशेषज्ञ कहते हैं कि ‘बर्लिंगटन में हुई इस घटना के बारे में कई लोगों का मानना है कि तीन युवकों को उनकी फिलिस्तीनी पहचान के कारण निशाना बनाया गया था, अधिकारी अभी भी जांच कर रहे हैं। यह गोलीबारी मुस्लिम समुदाय में डर पैदा करने के लिए की जा रही हैं। इन घटनाओं से भ्रम की भावना पैदा हुई है, साथ ही यह निराशा भी बनी हुई है कि फिलिस्तीनियों और अरब देशों के मुसलमानों के खिलाफ नफरत भरी हिंसा प्राथमिकता बन गई है। अगर उन तीनों छात्रों ने केफियेह (अरेबिक या फिलिस्तीनी लिबास) नहीं पहने होते या अरबी नहीं बोलते तो उन पर गोली नहीं चलाई जाती उनकी पहचान एक मुसलमान के रूप में किया जाना उनके प्रति घृणा से भरने और उन्हें मार गिराने के लिए काफी है।’

कॉलेज और परिसरों में भी बढ़ रही घृणा

‘अल-जजीरा’ पर दिए गए इंटरव्यू में विशेषज्ञ बेरी बताते हैं कि ‘‘अमेरिका में दुनियाभर से छात्र पढ़ने तथा कारोबार करने के लिए आते हैं। लेकिन समय-समय पर उन्हें घृणा का सामना करना पड़ता है क्योंकि वह मुस्लिम समुदाय के होते हैं। अमेरिका में तेजी से फैल रहे इस्लामोफोबिया के कारण वहां के लोग मुसलामानों को ‘नष्ट कर देने’ वाली जाति के रूप में देखते हैं। जिस कारण पढ़ाई करने आए छात्रों को न केवल अपने सहयोगियों, बल्कि कॉलेज के प्रोफेसर और ऑफिस के सहकर्मियों से भी घृणा का सामना करना पड़ता है।’’

अमेरिका में घृणा अपराधों का पहला कानून

अमेरिका में घृणा अपराधों को संबोधित करने वाला पहला संघीय कानून 1960 के दशक के ‘नागरिक अधिकार आंदोलन के समय बनाया गया। जब देश में श्वेत वर्चस्ववादी हिंसा की लहर चल रही थी। इसके बाद वर्ष 1968 के नागरिक अधिकार अधिनियम ने किसी व्यक्ति को उनकी जाति, रंग, धर्म या राष्ट्रीय मूल के आधार पर शिक्षा और रोजगार जैसी संघीय संरक्षित गतिविधियों तक पहुंचने से रोकने के लिए बल के उपयोग या धमकी पर रोक लगा दी गई थी। अमेरिकी कांग्रेस ने घृणा अपराध सांख्यिकी अधिनियम पारित किया, जिसके तहत न्याय विभाग को उन अपराधों पर सालाना डेटा एकत्र करने और प्रकाशित करने का नियम बना जो ‘जाति, धर्म, यौन अभिविन्यास या जातीयता के आधार पर हो रहे हैं।’ 1 जून, 2015 को फीनिक्स, एरिजोना में इस्लामिक कम्युनिटी सेंटर में एक अंतर धार्मिक रैली निकाली गई जिसके बाद अन्य संघीय कानूनों में यौन उत्पीड़न, विकलांगता, लिंग या लिंग पहचान से प्रेरित कृत्यों को शामिल करने के लिए ‘घृणा अपराध’ की परिभाषा में व्यापक विस्तार किए जा चुके हैं।

एडीएल और सीएआईआर की रिपोर्ट अनुसार इन अपराधों से ग्रसित लोग प्राथमिकी दर्ज कराने में काफी संकोच करते हैं, क्योंकि उनका कहना है कि उन्हें ‘पुलिस के अविश्वास और प्रतिशोध का सामना करना पड़ता है जिससे वह प्राथमिकी दर्ज नहीं कराते हैं। कुछ अमेरिकी राज्यों में अभी भी घृणा आपराधिक कानून के अंतर्गत नहीं आता है।’ विशेषज्ञों के अनुसार ‘सरकार के अपने अनुमान के अनुसार, आमतौर पर हर साल लगभग 10,000 घृणा अपराध दर्ज किए जाते हैं, इन अपराधों की संख्या युद्ध के बाद 50 लाख के करीब होने की संभावना है।’

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