लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा द्वारा अपने उम्मीदवारों की जीत की राह को निष्कंटक करने के लिए थोक के भाव में कांग्रेस और अन्य दलों के नेताओं को पार्टी में शामिल किया गया था। अनुमान है कि करीब 15 हजार छोटे-बड़े अन्य पार्टियों के नेता और कार्यकर्ता भाजपा में शामिल हए हैं। अब यह आयातित नेता भाजपा के लिए सिरदर्द का वायरस बन चुके हैं जिससे न सिर्फ भाजपा की फजीहत हो रही है, बल्कि पार्टी के समर्पित कार्यकर्ताओं और नेताओं में खासा रोष पनप रहा है। नेताओं की आपसी रार खुलकर सामने आ रही है। इसे भाजपा में आने वाले समय का बड़ा तूफान का संकेत माना जा रहा है
उत्तराखण्ड भाजपा के तीन बड़े ऐसे मामले सामने आए हैं जिसमें नेताओं द्वारा अपनी ही पार्टी के नेताओं के खिलाफ न सिर्फ बयानबाजी हुई है, बल्कि उनके परिवार रिश्तेदारों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाने के लिए भी जोर-आजमाइश का नजारा देखने को मिला है।इसमें सबसे पहले टिहरी के भाजपा विधायक किशोर उपाध्याय और कांग्रेस सरकार में मंत्री रहे दिनेश धनै के बीच विवाद और आरोपों का मामला चर्चाओं में है। इस मामले में भाजपा जिला संगठन पर भी गंभीर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। किशोर उपाध्याय द्वारा टीएचडीसी के कार्यकारी निदेशक एलपी जोशी को एक पत्र लिखा गया जिसमें उन्होंने कहा है कि ‘अभी एक बैठक में पूर्व मंत्री दिनेश धनै जी ने आपका नाम लेते हुए मुझे आरोपित किया है कि मेरे और मेरे समर्थकों के टीएचडीसी में करोड़ों के ठेके चल रहे हैं जिससे मुझे गहन पीड़ा हुई है। अगर इस तरह की बातें लोगों के बीच हैं तो मेरी छवि पर गंभीर नकारात्मक असर पड़ता है।’
इस पत्र में विधायक किशोर उपाध्याय ने यह भी लिखा है कि ‘अतः मेरी अपेक्षा है कि इस सम्बंध में आपकी ओर से वस्तु स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए तथा मेरी भी यह अपेक्षा रहेगी कि आपके यहां कौन-कौन ठेकेदार काम कर रहे हैं और किसकी अनुशंसा पर कर रहे हैं। मुझे अवगत कराने का कष्ट करेंगे तो मैं आभारी रहूंगा।’
जानकारी अनुसार टिहरी में भाजपा जिला संगठन की एक बैठक के दौरान पूर्व मंत्री और नए-नए भाजपा में आए दिनेश धनै ने भाजपा जिला अध्यक्ष राजेश नौटियाल के समाने ही किशोर उपाध्याय पर आरोप लगाते हुए कहा था कि टीएचडीसी के डायरेक्टर ने उनको बताया है कि विधायक किशोर उपाध्याय और उनके समर्थकों के ठेके चल रहे हैं। इस बात को लेकर किशोर उपाध्याय और दिनेश धनै के बीच विवाद बढ़ गया। धनै और किशोर के बीच विवाद कोई नया नहीं है। पूर्व में भी दोनों के विवाद सड़क पर भी देखे गए। दोनों ही नेता एक-दूसरे के राजनीतिक प्रतिद्वंदी रहे हैं। 2012 में धनै से किशोर महज 252 मतों से चुनाव हारे जबकि 2022 में किशोर उपाध्याय भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़े और धनै को हराकर अपना बदला पूरा किया।
टीएचडीसी को लिखा गया किशोर उपाध्याय का पत्र
दिनेश धनै को लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा में शामिल करवाने के पीछे भी टिहरी जिला भाजपा संगठन के पदाधिकारियों का ही हाथ रहा है। सूत्रों की मानंे तो भाजपा दिनेश धनै को निकाय चुनाव में उम्मीदवार के तौर पर उतार सकती है जिसके लिए उपाध्याय विरोधी गुट अभी से हवा बनाने में लगा हुआ है। जबकि भाजपा के कई अन्य नेता जो कि निकाय चुनाव में उम्मीद लाए हुए थे उनको दिनेश धनै के भाजपा में आने के बाद अपनी दावेदारी खतरे में पड़ती नजर आ रही है। इसके चलते टिहरी में अब भाजपा दो गुटों बंट चुकी है जिसमें एक उपाध्याय के समर्थन में है तो दूसरा दिनेश धनै के पक्ष में काम करता नजर आ रहा है।
इस आग में घी डालाने का काम भाजपा प्रदेश कार्य समिति के सदस्य और 2012 में टिहरी विधानसभा सीट से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ चुके खेम सिंह चैहान द्वारा किया गया। उन्होंने दिनेश धनै को भाजपा में शामिल करने पर अपनी नाराजगी सोशल मीडिया में पोस्ट कर की है। साथ ही भाजपा जिला के पदाधिकारियों पर भी तंज कसा है। दिनेश धनै को भाजपा में शामिल करने पर खेम सिंह चौहान ने अपने फेसबुक पेज पर लिखा कि अपराधी प्रवृति, चाकू मारने वाले, 307 जैसी गंभीर धारा में हवालात की सजा काटने वाले, क्षेत्रवाद और जातिवाद की राजनीति, क्रशर पार्टनर वाले दूसरी पार्टी से आए चाटुकार पार्टी नेता हो सकते हैं। साथ ही यह भी लिखा है कि क्या हमने ऐसे ही उत्तराखण्ड का सपना देखा था।
खेम सिंह चौहान का इशारा साफ तौर पर पूर्व मंत्री दिनेश धनै और भाजपा के जिला स्तर के पदाधिकारियों की ओर था। भाजपा सूत्रों की मानें तो टिहरी जिला स्तरीय संगठन के नेताओं की भूमिका दिनेश धनै के समर्थन पर रही है। माना जाता है कि किशोर उपाध्याय भाजपा के टिकट पर चुनाव जीतने के बाद जिला संगठन और उनके बीच संबंध बेहतर नहीं रहे हैं जिसके चलते दिनेश धनै को भाजपा में शामिल करने के लिए जिला संगठन की भूमिका रही है।
मतदान खत्म होने के बाद भाजपा ने कांग्रेस नेता हरक सिंह रावत की पुत्रवधू अनुकृति गुसांई को पार्टी में शामिल कर लिया जिसका विरोध दिलीप रावत द्वारा किया जा रहा था। माना जा रहा है कि अनुकृति गुसांई को पार्टी में चुनाव के दौरान ही शामिल करने की तैयारी हो चुकी थी लेकिन विधायक दिलीप रावत के भारी विरोध और स्थानीय कार्यकर्ताओं के चुनाव में छिटकने के डर से अनुकृति को पार्टी में शामिल करने की योजना पर रोक लगा दी। लेकिन मतदान के बाद अचानक ही अनुकृति को पार्टी में शामिल कर लिया गया। इस पर दिलीप रावत ने अपनी नाराजगी को सोशल मीडिया में जाहिर करने में देर नहीं की और तंज कसते हुए लिखा कि ‘राम तेरी गंगा मैली हो गई, पापियों के पाप धोते-धोते। दलीप रावत यहीं पर नहीं रुके उन्होंने यहां तक लिख दिया कि नमामि गंगे यहीं से ही शुरू होगी क्या?
सतीश नैनवाल के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने थाने पहुंचे कैलाश पंत और दीपक करगेती
दूसरे मामले में रानीखेत से भाजपा विधायक प्रमोद नैनवाल के भाई सतीश नैनवाल और भांजे संदीप बुधानी पर मिचोली के ग्राम प्रधान संदीप खुल्बे द्वारा मारपीट करने के आरोप लगाते हुए भतरौंजखान थाने में शिकायत दी। लेकिन उनकी शिकायत पर रिपोर्ट दर्ज न होने पर सरकार में दायित्वधारी कैलाश पंत ने अपने समर्थकों के साथ प्रधान संदीप खुल्बे के पक्ष में भतरौंजखान थाने पहुंच एफआईआर दर्ज करवा दी। सतीश नैनवाल और कैलाश पंत के बीच पूर्व से ही राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता चली आ रही है। भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष, निवर्तमान नैनीताल सांसद अजय भट्ट और प्रमोद नैनवाल के बीच पुरानी राजनीतिक द्वंदता रही है। गौरतलब है कि 2017 के विधानसभा चुनाव में प्रमोद नैनवाल भाजपा से बगावत कर चुनाव लड़े जिसके चलते ही अजय भट्ट चुनाव हारे थे। 2022 में नैनवाल भाजपा में आ गए और रानीखेत सीट से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ कर जीते। जबकि कैलाश पंत भी प्रबल दावेदार थे लेकिन उनको टिकट नहीं मिला और नैनवाल सांसद अजय टम्टा की मदद से टिकट पाने में सफल रहे जिसका असर आज भी देखा जा रहा है।
अपनी पार्टी के विधायक के भाई के खिलाफ थाने में मुकदमा दर्ज करवाने के पीछे भी आपसी राजनीतिक प्रतिद्वंदिता को ही बताया जा रहा है। इसको लेकर पार्टी में खासा हंगामा मचा हुआ है। पार्टी नेता और कार्यकर्ताओं में दो फाड़ हो चुके हैं जिसमें एक गुट को नैनवाल का तो दूसरे को कैलाश पंत का समर्थन है। राजनीतिक जानकार इसे भाजपा में आने वाले समय के बड़े तूफान का संकेत मान रहे हैं। प्रदेश भाजपा संगठन शायद अभी से आने वाले तूफान की आहट को अच्छी तरह से समझ चुका है। इसके चलते प्रदेश भाजप अध्यक्ष महेंद्र प्रसाद भट्ट द्वारा किशोर उपाध्याय, दिनेश धनै, कैलाश पंत्र और प्रमोद नैनवाल एवं खेम सिंह चैहान को पार्टी मुख्यालय में तलब करके उनको अनुशासन का पाठ पढ़ाते हुए पार्टी की नीतियों और रीतियों पर चलने की नसीहत दी है।
भले ही महेंद्र प्रसाद भट्ट ने मामले को संभालने का प्रयास किया हो लेकिन लैंसडाउन विधायक दिलीप रावत से उनके सोशल मीडिया पर डाली गई पोस्ट पर कोई जवाब अभी तक नहीं मांगने से यह भी साफ हो गया है कि भाजपा को ऐसे मामलों पर जवाब देने के लिए तैयार रहना होगा और ‘पार्टी विद डिफरेंस’ से ‘पार्टी विद आॅल’ बनने से बचना बड़ी चुनौती होगी।