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नशे के काले कारोबार का होता विस्तार

कुछ समय पहले तक चर्चा होती थी कि पंजाब के युवाओं में नशे का चलन बढ़ रहा है। इसके अलावा कुछ बड़े शहरों और महानगरों की हाई सोसायटी में इसका कल्चर था। लेकिन अब देशभर में नशे का कारोबार अमरबेल की तरह फैलता नजर आ रहा है। एक के बाद एक कई राज्य इसकी चपेट में आ रहे हैं। गत सप्ताह 10 अक्टूबर को पश्चिमी दिल्ली के रमेश नगर इलाके में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने छापेमारी की जिसमें 200 किलो कोकीन जब्त हुई जिसकी कीमत 2 हजार करोड़ रुपए आंकी जा रही है। ये ड्रग्स नमकीन के पैकेट में छिपाकर रखी गई थी। पिछले एक हफ्ते में ये दूसरी बार है जब दिल्ली पुलिस ने इतनी बड़ी मात्रा में ड्रग्स की जब्ती की है। इससे पहले बीते 2 अक्टूबर को दिल्ली पुलिस ने 562 किलो ड्रग्स बरामद की थी, जिसकी कीमत 5 हजार करोड़ से ज्यादा बताई गई थी

देश की राजधानी दिल्ली में कुछ ही दिनों के भीतर 7 हजार करोड़ की ड्रग्स का पकड़ा जाना नशे के काले कारोबार के तेजी से फैलने की पुष्टि कर रहा है। गौरतलब है कि गत् सप्ताह 10 अक्टूबर को पश्चिमी दिल्ली के रमेश नगर इलाके में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने छापेमारी की जिसमें 200 किलो कोकीन जब्त हुई जिसकी कीमत 2 हजार करोड़ रुपए आंकी जा रही है। ये ड्रग्स नमकीन के पैकेट में छिपाकर रखी गई थी। पिछले एक हफ्ते में ये दूसरी बार है जब दिल्ली पुलिस ने इतनी बड़ी मात्रा में ड्रग्स की जब्ती की है। इससे पहले बीते 2 अक्टूबर को दिल्ली पुलिस ने 562 किलो ड्रग्स बरामद की थी, जिसकी कीमत 5 हजार करोड़ से ज्यादा बताई गई थी।

दिल्ली पुलिस की इस बड़ी कार्रवाई पर अधिकारियों का कहना है कि जिस कार से कोकीन लाई गई थी उसमें जीपीएस लगा हुआ था। पुलिस ने लोकेशन ट्रैक किया और फिर ये जब्ती की। कहा जा रहा है कि कोकीन लाने वाला आरोपी लंदन भाग चुका है। अधिकारियों की मानें तो ये कोकीन भी उसी सिंडिकेट का हिस्सा है, जिसे पिछले हफ्ते पकड़ा गया था। यानी एक हफ्ते के भीतर राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से अब तक कुल 762 किलो कोकीन बरामद हो चुकी है। कोकीन के मामले में ये देश में अब तक की सबसे बड़ी बरामदगी भी है।

इस मामले में अब तक सात लोग गिरफ्तार किए जा चुके हैं, वहीं 2 अक्टूबर को दिल्ली पुलिस ने महिपालपुर इलाके में 562 किलो कोकीन और 40 किलो दूसरी ड्रग्स जब्त करने का दावा किया था उसमें पुलिस ने छापेमारी के दौरान ही चार लोगों को गिरफ्तार किया था। बाद में दो और लोगों को अमृतसर और चेन्नई से गिरफ्तार किया गया। दिल्ली पुलिस ने ड्रग्स तस्करी के केस में दुबई रहने वाले भारतीय मूल के एक व्यवसायी वीरेंद्र बसोया के खिलाफ ‘लुकआउट सर्कुलर’ भी जारी किया है।

इस बीच चार अक्टूबर को मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से 1 हजार 814 करोड़ रुपए की ड्रग्स पकड़ी गई है। इस मामले में राजनीति भी गरमा गई है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने एक प्रेस काॅन्फ्रेंस में कहा कि ड्रग्स तस्करी मामले में मंदसौर से पकड़ा आरोपी की एम जगदीश देवड़ा के साथ तस्वीरें सामने आई हैं और इस मामले सीएम मोहन यादव को तत्काल उप मुख्यमंत्री का इस्तीफा लेना चाहिए। पटवारी ने कहा कि पिछले दिनों मध्य प्रदेश के भोपाल में ड्रग्स का जखीरा मिला। इसकी कीमत 1800 करोड़ रुपए से ज्यादा बताई जा रही है। अब इससे जुड़ा एक नया खुलासा हुआ है। इस मामले में पकड़ा गया ड्रग्स का सौदागर हरीश आंजना भाजपा का सक्रिय कार्यकर्ता है। हरीश आंजना की पहुंच सीधे प्रदेश की भाजपा सरकार के डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा तक है। इसी आधार पर वो अधिकारियों पर दबाव बनाता रहा और ड्रग्स का अपना धंधा चलाता रहा। सवाल है इस ड्रग्स के सौदागर के पीछे कौन से बड़े लोग हैं? भाजपा का ये नेता इतने बड़े स्तर पर ड्रग्स का कारोबार चला रहा था और किसी को पता तक नहीं चला। आखिर इन्हें कौन संरक्षण दे रहा था? अडानी पोर्ट से लेकर देश के अलग-अलग हिस्सों में ड्रग्स की खेप पकड़ी जा रही है। कौन है जो ड्रग्स सप्लाई कर रहा है?’ सरकार की नीयत क्या है क्या वो मामले की लीपापोती कर रही है या दोषियों को सजा दी जाएगी, वहीं दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जनपद में स्थित जिला कारागार में 25 सितंबर को जब जिला जज और जिलाधिकारी ने जेल का निरीक्षण किया तो पता चला की जेल में नशे का कारोबार संचालित किया जा रहा था। इस मामले में अधिकारियों द्वारा निरीक्षण किए जाने के बाद डीआईजी जेल एसके मैत्रीय द्वारा भी मामले की जांच कराई गई। जांच में डिप्टी जेलर समेत चार लोगों की भूमिका संदिग्ध प्रतीत हुई। उसके बाद डीआईजी जेल द्वारा इस मामले में डिप्टी जेलर त्रिलोकी नाथ, हेड वार्डन फूलचंद यादव और जेल वार्डन उमेश कुमार तथा सौरभ को निलंबित कर दिया गया। निलंबित किए जाने के बाद चारों के खिलाफ जांच पड़ताल की जा रही है। कहा जा रहा है की जेल में बंद एक बंदी द्वारा उपरोक्त लोगों के खिलाफ जेल में गांजा बेचवाने का आरोप लगाया गया था। फिलहाल डीआईजी जेल द्वारा की गई कार्रवाई के बाद हड़कंप मचा हुआ है।

ऐसे मामले देश में पहली बार देखने को नहीं मिल रहे हैं। इससे पहले वर्ष 2021 में आंध्र प्रदेश, उड़ीसा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में बड़ी मात्रा में ड्रग्स जब्त की गई थी तो गौतम अडानी के स्वामित्व वाला मुंद्रा पोर्ट से 16 सितंबर 2021 को आरडीआई और कस्टम की टीम ने 2 कंटेनरों से करीब 3000 किलो हेरोइन बरामद की थी। इसे भारत क्या दुनियाभर में ड्रग्स की सबसे बड़ी बरामदगी बताया गया। ड्रग्स की ये खेप कितनी बड़ी थी इसे ऐसे समझा जा सकता है कि इसकी सही कीमत का पता लगाने में ही एजेंसियों को कई दिन लग गए थे। पहले इसकी कीमत इंटरनेशनल मार्केट में 9000 करोड़ रुपए बताई गई बाद में पता चला कि इसकी कीमत 21 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा है।

गौरतलब है कि गुजरात में अक्सर करोड़ों रुपए की ड्रग पकड़ी जाती है। इसी साल फरवरी महीने में गुजरात एटीएस और दूसरी केंद्रीय एजेंसियों ने संयुक्त अभियान में 3300 किलोग्राम ड्रग्स जब्त किया था। तब नौसेना ने बताया था कि इस आॅपरेशन में 3089 किलोग्राम चरस, 158 किलोग्राम मेथम्फेटामाइन और 25 किलोग्राम माॅर्फीन जब्त की गई। इसके बाद मार्च 2024 में पोरबंदर की समुद्री सीमा से 6 पाकिस्तानी पकड़े गए। आरोपियों के पास से 480 करोड़ रुपए का ड्रग्स बरामद किया गया। अप्रैल महीने के अंत में फिर गुजरात तट से आतंकवाद विरोधी दस्ते (एटीएस) और नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने संयुक्त आपरेशन के जरिए 86 किलोग्राम ड्रग्स बरामद की थी। इसकी बाजार में कीमत करीब 602 करोड़ रुपए आंकी गई थी। एटीएस और एनसीबी ने संयुक्त कार्रवाई कर 14 पाकिस्तानी नागरिकों को भी अरेस्ट किया था। इन दोनों बड़े आपरेशनों के साथ पिछले दिनों कच्छ में बीएसएफ को ड्रग्स की खेप मिली थी। ऐसे में सवाल खड़ा होता है कि आखिर गुजरात में ये ड्रग्स कौन भेजता है? सुरक्षा एजेंसियों की चैकसी के बाद भी इतनी बड़ी मात्रा में ड्रग्स क्यों गुजरात में आता है?

जानकारों का मानना है कि कोई छोटा मोटा आदमी या एक दो व्यक्ति इस मात्रा में ड्रग्स नहीं मंगा सकते हैं। अफगानिस्तान, ईरान, पाकिस्तान के रास्ते टन के हिसाब से ड्रग्स आ रहा है तो इसके पीछे आॅर्गेनाइज्ड गैंग होगा। यह भी आम धारणा है कि पुलिस और दूसरी एजेंसियां किसी प्रतिबंधित उत्पाद को पकड़ती हैं तो उनका औसत सौ में एक का होता है। यानी सौ खेप निकलेगी तो एक पकड़ी जाएगी तो जितनी ड्रग्स पकड़ी जा रही है उसको देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि बाजार में कितनी ड्रग्स जा रही है।

इसका जवाब है गुजरात में अलग ड्रग की डिलीवरी होती है तो फिर यहां से ड्रग माफिया इसे उत्तर भारत की तरफ ले जाते हैं। उसे आगे डिस्ट्रीब्यूट किया जाता है। गुजरात सरकार इसी ड्रग कारटेल को तोड़ने की कोशिश में जुटी हुई है लेकिन ड्रग की बड़े कंसाइनमेंट के पकड़े जाने के बाद भी यह सिलसिला नहीं टूट पा रहा है।

गौरतलब है कि पिछले हफ्ते दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल ने दक्षिण- पश्चिम दिल्ली के महिपालपुर एक्सटेंशन से 5 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा की ड्रग्स बरामद की है। पुलिस ने महिपालपुर में एक गोदाम से 562 किलोग्राम कोकीन और थाईलैंड से आया 40 किलोग्राम मारिजुआना (गांजा) बरामद किया है। पुलिस ने ड्रग तस्करों के अंतरराष्ट्रीय गिरोह का खुलासा करते हुए पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार लोगों की पहचान तुषार गोयल, भरत कुमार जैन, औरंगजेब सिद्दीकी, हिमांशु कुमार व जितेंद्र प्रीत गिल के रूप में हुई है। इसे गैरकानूनी तरीके से भारत लाया गया था तो वहीं दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल ने दस अक्टूबर को रमेश नगर इलाके में रेड की। मौके से पुलिस को 200 किलो कोकीन बरामद हुई जो गोदाम में रखी हुई थी। बरामद ड्रग्स की कीमत तकरीबन 2 हजार करोड़ रुपए बताई जा रही है। जानकारी के मुताबिक कुल मिलाकर अब तक 7 हजार करोड़ की ड्रग स्पेशल सेल जब्त कर चुकी है। ड्रग रैकेट का इंटरनेशनल कनेक्शन भी सामने आ चुका है। ईडी ने भी दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल केस की रिपोर्ट ली है और इस मामले में 4 आरोपियों को भी गिरफ्तार कर चुकी है। बताया जा रहा है कि देश में किसी भी जांच एजेंसी के जरिए पकड़ी गई ड्रग की यह सबसे बड़ी खेप है।

 

किस साल कितनी ड्रग्स पकड़ी गई?

इसी साल जुलाई में गृह मंत्री अमित शाह ने छत्तीसगढ़ के रायपुर में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) के एक कार्यक्रम में मादक पदार्थों के परिदृश्य पर समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की थी। इस दौरान गृह मंत्री शाह ने पिछले वर्षों में एनसीबी द्वारा पकड़ी गई ड्रग्स का ब्योरा दिया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2004 से 2014 तक कुल 1,250 केस दर्ज हुए जबकि 2014 से 2024 तक के 10 साल में 230 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 4,150 केस दर्ज हुए। 2004 से 2014 के बीच कुल 1,360 गिरफ्तारी हुई जो अब 6,300 हो गए हैं। इसी प्रकार, 2004 से 2014 के बीच 1 लाख 52 हजार किलोग्राम ड्रग्स पकड़ी गई जबकि 2014 से 2024 के बीच 257 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 5 लाख 43 हजार किलोग्राम ड्रग्स पकड़ी गई है। 2004 से 2014 के बीच जब्त की गई ड्रग्स का मूल्य 5,900 करोड़ रुपए था जबकि 2014 से 2024 के बीच जब्त की गई ड्रग्स का मूल्य 22,000 करोड़ रुपए है। शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में एक संगठित अप्रोच के तहत हम 10 साल में ड्रग्स के खिलाफ लड़ाई को एक अंजाम तक पहुंचाने में सफल रहे हैं।

कहां कितनी ड्रग्स पकड़ी गई?

जुलाई 2024 में राज्यसभा में एक प्रश्न के जवाब में केंद्रीय गृह मंत्रालय की तरफ से 2020 से 2022 तक तीन वर्षों में पकड़ी गई ड्रग्स के आंकड़े जारी किए गए थे। पकड़ी गई ड्रग्स में अफीम आधारित ड्रग्स, कैनबिस आधारित ड्रग्स, कोकेन, मनोवैज्ञानिक पदार्थ, दवाई बनाने वाले ड्रग्स, एसिटिक एनहाइड्राइड, अन्य दवाएं शामिल थीं। सबसे ज्यादा जब्ती वाले पांच राज्यों की बात करें तो 2020 में तमिलनाडु में सबसे ज्यादा 298682.785 किलोग्राम अफीम, कैनबिस और कोकेन जब्त की गई। उसके बाद राजस्थान में 145363.673 किग्रा, उत्तर प्रदेश में 144434.195 किग्रा, आंध्र प्रदेश में 106042.775 किग्रा, उड़ीसा में 81847.001 किग्रा पकड़ी गई।

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