- संतोष सिंह
पिछले तीन दशक से सड़क के लिए संघर्ष कर रहे चमोली जनपद के डुमक गांववासी अब आंदोलन पर उतर आए हैं। गत् लोकसभा चुनाव में ग्रामीणों ने इस मुद्दे पर ‘रोड नहीं तो वोट’ का नारा देकर चुनाव बहिष्कार की घोषणा भी की थी। तब प्रशासन द्वारा उन्हें आश्वासन देकर मना लिया गया, लेकिन अभी तक सड़क बनाने की कोई सुगबुगाहट न होने के चलते ग्रामीण अब आक्रोशित हो चले हैं
जोशीमठ विकासखण्ड का दूरस्थ डुमक गांव ऐसा गांव है जहां के बाशिंदे सड़क की मांग को लेकर तीन दशक से संघर्षरत हैं। बावजूद इसके उनकी सड़क की उम्मीद अब भी अधूरी बनीं हुई है। इस बाबत ग्रामीणों द्वारा पिछले चार माह से आंदोलन किया जा रहा है, लेकिन शासन- प्रशासन ने अभी तक ग्रामीणों की कोई सुध नहीं ली है। मजबूरन ग्रामीणों ने जिला कलेक्ट्रेट में धरना-प्रदर्शन कर आरपार की लड़ाई शुरू कर दी है। अब देखना है कि शासन-प्रशासन पर आंदोलन का कितना दबाव बन पाता है और ग्रामीणों का बरसों का संघर्ष साकार हो पाता है या नहीं?
देश में जहां आजादी का अमृत उत्सव जोर-शोर से मनाया जा रहा है। वहीं चमोली जिले के जोशीमठ ब्लॉक का सबसे दूरस्थ डुमक गांव आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए छटपटा रहा है। सड़क सुविधा न होने से गांव के लोग 22 किमी पैदल चलकर अपनी मूलभूत सुविधाओं को घोड़े-खच्चरों और अपनी पीठ पर लादकर गांव तक पहुंचाने को मजबूर हैं। ग्रामीणों को सबसे अधिक दिक्कतें तब होती है जब गांव में कोई व्यक्ति बीमार पड़ जाता है या फिर महिलाओं की प्रसुति होती है। ऐसे मामले में ग्रामीणों को बीमार व्यक्ति को डंडी-कंडी के सहारे 22 किमी पैदल सड़क तक पहुंचाया जाता है, इतना ही नहीं कई बार बीमार रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं।
जिला मुख्यालय गोपेश्वर से 30 किमी दूर डुमक गांव के लिए वर्ष 2009-10 में पीएमजीएसवाई के तहत घिंगराण-स्यूंण-डुमक मोटर मार्ग (32 किमी) सड़क स्वीकृति हुई थी, लेकिन 9 किलोमीटर सड़क बनाने के बाद ठेकेदार काम छोड़कर भाग गया। वर्ष 2015 में दोबारा इस सड़क के लिए टेंडर स्वीकृत किए गए। जिसमें स्टार कंस्ट्रक्शन कम्पनी ने 15 करोड़ 85 लाख रूपये से 23 किलोमीटर सड़क बनाने का टेंडर डाला गया। इस ठेकेदार द्वारा स्यूंण गांव तक 17 किमी सड़क बनाई गई जबकि कागजों में इसे डुमक तक दिखाया गया। यही नहीं डुमक गांव से चार किमी पहले ही सड़क को कलगोठ गांव के लिए मोड़ दिया गया। डुमक के ग्रामीणों के विरोध पर निर्माण कार्य आगे नहीं बढ़ पाया और विभाग व ठेकेदार द्वारा यहीं पर काम रोक दिया गया। गांव तक सड़क पहुंचाने के लिए ग्रामीणों द्वारा शासन-प्रशासन को कई पत्र लिखे गए लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। तब मजबूरन ग्रामीणों ने हाईकोर्ट की शरण ली। कोर्ट ने चार माह में सड़क निर्माण पूरा करने के निर्देश दिए। लेकिन वर्ष 2022 में पीएमजीएसवाई के अधिकारियों द्वारा नया पेंच अटका दिया गया। उन्होंने भूस्खलन क्षेत्र होने की बात कह कर हाथ खड़े कर दिए गए।
सड़क निर्माण शुरू करने की मांग को लेकर ग्रामीणों द्वारा 4 माह पूर्व से गांव के पंचायत भवन पर धरना- प्रर्दशन शुरू किया। शुरुआत में क्षेत्र के लोगों का ग्रामीणों को समर्थन मिला। गांव में किसी भी चुनाव का बहिष्कार करने की घोषणा की गई लेकिन इसी दौरान बदरीनाथ सीट पर उपचुनाव होने के चलते शासन- प्रशासन ने ग्रामीणों को झूठा आश्वासन दिया। जिस पर ग्रामीणों ने विधानसभा उपचुनाव का बहिष्कार करने के फैसले को बदलकर बढ़-चढ़कर मतदान किया और इस चुनाव में भाजपा के राजेंद्र भंडारी को हराकर कांग्रेस प्रत्याशी लखपत बुटोला विधायक बन गए। विधायक द्वारा भी आंदोलनकारियों के बीच पहुंच कर उनकी जायज मांग को अपना समर्थन दिया गया और मुख्यमंत्री से बात की गई तो सड़क निर्माण जल्द शुरू कराने का आश्वासन दिया गया। लेकिन लंबे समय बाद भी मांग पर कोई कार्रवाई नहीं होने पर आक्रोशित ग्रामीणों ने 19 नवंबर को जिला मुख्यालय में जुलूस प्रदर्शन कर जिलाधिकारी संदीप तिवारी से वार्ता की लेकिन कोई समाधान नहीं निकलने पर ग्रामीणों ने जिलाधिकारी कार्यालय परिसर में ही धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया है।
गांव के अनिरुद्ध सनवाल, अंकित भंडारी ने आमरण अनशन शुरू कर दिया है। ग्रामीण विकास संघर्ष समिति के अध्यक्ष राजेंद्र भंडारी ने कहा कि मांग पूरी होने पर ही आंदोलन स्थगित किया जाएगा। विगत कई दिनों से ग्रामीण आमरण अनशन पर बैठे हैं। जिसमें विक्रम सिंह सनवाल, मनोज सनवाल, कालिका नन्द महाराज (महाकाल) आदि शामिल हैं।
बात अपनी-अपनी
सरकार सोई हुई है उन्हें जनता की कोई चिंता नहीं है। सड़क को लेकर मैं स्वयं डुमक गांव के ग्रामीणों के बीच गया था। मैं इस बाबत मुख्य सचिव, जिलाधिकारी से मिला हूं लेकिन केवल आश्वासन दिया जा रहा है। ग्रामीणों की सड़क निर्माण की मांग को लेकर हम जनता के साथ खड़े हैं।
लखपत बुटोला, विधायक, बदरीनाथ
ग्रामीणों द्वारा तीन दशक से सड़क निर्माण को लेकर संघर्ष किया जा रहा है, बावजूद इसके अभी तक सड़क नहीं बन पाई है। विगत चार माह से ग्रामीणों द्वारा गांव के पंचायत भवन पर आंदोलन किया जा रहा था, लेकिन शासन-प्रशासन द्वारा कोई कार्रवाई नहीं करने पर ग्रामीणों को मजबूर होकर जिला मुख्यालय गोपेश्वर में धरना-प्रदर्शन कर 19 नवंबर से आमरण अनशन शुरू किया गया है। जबतक हमारी एकसूत्रीय मांग पूरी नहीं हो जाती तब तक हम आंदोलन पर डटे रहेंगे।
राजेन्द्र सिंह भंडारी, अध्यक्ष, विकास संघर्ष समिति, डुमक

