अयोध्या की तर्ज पर हरिद्वार की हरकी पौड़ी में भी राज्य स्थापना दिवस पर दीपोत्सव का आयोजन किया गया। गंगा के तट पर ढ़ाई लाख दीप प्रज्वलित कर धामी सरकार ने मां गंगा की भव्यता और उज्जवलता में चार चांद लगा दिए। लेकिन इस कार्यक्रम के आयोजनकर्ता नगर निगम ने बाजार भाव से कहीं अधिक कीमत पर दीये और तेल -बाती खरीद इस आयोजन की भव्यता और दिव्यता को भ्रष्टाचार के धुएं की जद में ला दिया है। बाजार कीमत से चार गुणा अधिक पर खरीदे गए दीयों और उनकी तेल-बाती ने विपक्षी पार्टी कांग्रेस को प्रशासन पर सवाल उठाने का मौका दे दिया
राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर हरिद्वार के गंगा घाटों पर दीपोत्सव के कार्यक्रम में नगर निगम अधिकारियों द्वारा दीपक सामग्री क्रय किए जाने के सम्बंध में बाजार मूल्य से 4 गुणा अधिक कीमत पर निविदा आमंत्रित किए जाने का बड़ा मामला सामने आया है। जिसमें एक ही दिन में कार्यालय लिपिक से लेकर नगर आयुक्त और जिलाधिकारी द्वारा इस मामले पर दी गई वित्तीय एवं प्रशासकीय स्वीकृति की प्रक्रिया भी मामले के घेरे में है। यही नहीं दीपोत्सव कार्यक्रम आयोजित किए जाने के लिए निकाली गई निविदा में भी बड़ा खेल सामने आ रहा है, जिस पर अधिकारी पर्दा डालने में जुटे हैं।
जानकारी के अनुसार हरकी पौड़ी सहित गंगा के तमाम घाटों पर दीप जलाने के लिए नगर निगम द्वारा किए गए टेंडर में भाजपा के दो निवर्तमान पार्षदों की भी संलिप्तता सामने आ रही है। जिसमें एक पार्षद ने टेंडर प्राप्त करने के लिए अपनी फर्म सहित अपने सगे साले और रिश्तेदार की फर्म का प्रयोग करते हुए टेंडर कोरम पूरा करने के लिए पूरा खेला कर दीया इत्यादि की सामग्री खरीद में घपला किया है। चौंकाने वाली बात यह है कि एक ही दिन (25 अक्टूबर) को पूरी पत्रावली पर सहमति दर्शाने वाले बाबू से लेकर आईएएस अधिकारियों तक पार्षदों के इस खेल पर आश्चर्यजनक रूप से चुप्पी साधे रहे। यही नहीं बल्कि मात्र तीन निविदा प्राप्त होने पर दो निविदादाताओं के पक्ष में दीपोत्सव कार्यक्रम के टेंडर की स्वीकृति कर डाली गई।
जानकारी के अनुसार राज्य स्थापना दिवस समारोह मनाए जाने के लिए गढ़वाल मंडल के आयुक्त द्वारा 23 अक्टूबर को सम्पन्न बैठक में कार्यदायी विभागों को जिम्मेदारी दी थी। जिसके तहत नगर निगम हरिद्वार को उत्तराखण्ड गंगा दीपोत्सव कार्यक्रम किए जाने के लिए निर्देशित किया गया था। जिसके तहत समस्त घाटों को जोन एवं सेक्टर में विभाजित करते हुए जोनल एवं सेक्टर मजिस्ट्रटों की नियुक्ति के सम्बंध में भी आदेश दिए गए थे। इसी बैठक के दौरान घाटों पर दीपक जलाने के सम्बंध में 2.5 लाख दीपक का अनुमान लगाते हुए दीपक, घी, बत्ती, मोमबत्ती व माचिस का प्रबंध करने की जिम्मेदारी नगर निगम हरिद्वार को सौंपी गई और असली खेल यहीं से शुरू हुआ। धर्मनगरी में 11 नवम्बर को मनाए गए राज्य स्थापना दिवस कार्यक्रम में दीयों को जलाने में 50 लाख का तेल खर्च दिखाया। दावा किया गया कि कार्यक्रम में 50 से अधिक घाटों पर हरिद्वार नगर निगम द्वारा ढाई लाख से अधिक दिए जलाए गए थे।
शाम को हरकी पौड़ी पर द्रोण शो सहित कन्हैया मित्तल नाइट का आयोजन किया गया था। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी शामिल हुए थे। इन कार्यक्रमों पर लाखों रुपए खर्च हुए। अकेले दीपोत्सव पर ही 60 लाख से अधिक की धनराशि खर्च कर दी गई जिस पर लोग सवाल भी उठा रहे हैं। गौरतलब है कि 23 अक्टूबर को जिलाधिकारी कार्यालय में हुई गढ़वाल मंडल आयुक्त की बैठक के दौरान जिलाधिकारी कर्मेन्द्र सिंह ने नगर निगम को व्यवस्थाएं करने के लिए निर्देशित किया। डीएम के पत्र के पश्चात नगर निगम सेनीटेशन सेल के लिपिक विकास कुमार ने गढ़वाल आयुक्त की बैठक का हवाला देते हुए 25 अक्टूबर को एक नोटिग तैयार की। जिसमें उल्लेख किया गया कि निगम क्षेत्र अन्तर्गत लगभग 80 घाट हैं। जिन पर दीपक जलाए जाने हेतु निम्नानुसार सामग्री की आवश्यकता होगी। जिसका अनुमानित व्यय होना संभव दर्शाते हुए 2.5 लाख मिट्टी के दीयों की अनुमानित 6 रुपए प्रति नग दर्शाते हुए 15 लाख रुपए की अनुमानित धनराशि आकी गई। जबकि मिट्टी का यही दीया बाजार में एक रुपए प्रति नग की धनराशि पर आसानी से उपलबध है। यही नहीं बीस हजार लीटर तिल के तेल की अनुमानित व्यय धनराशि 250 रुपए लीटर के दृष्टिगत 50 लाख रुपए आकी गई। दीये की 2.5 लाख बत्ती की अनुमानित 5 लाख रुपए यानी 2.5 रुपए प्रति नग आकी गई। जबकि यही बत्ती बाजार में 50 पैसा प्रति नग में आसानी से उपलब्ध है। माचिस की खरीद में भी मनमर्जी दर्शाते हुए अनुमानित व्यय 2 रुपए प्रति नग तीन हजार माचिस दर्शाई गई। जबकि खुले बाजार में यही माचिस एक रुपए प्रति नग के हिसाब से मिलती है।
नगर निगम अधिकारियों द्वारा जिस प्रकार बाजार रेट से चार गुना अधिक कीमतों पर अनुमानित व्यय दर्शाते हुए टेंडर प्रक्रिया प्रारम्भ किए जाने में जल्दबाजी दिखाई गई वह सवालों के घेरे में है। निगम अधिकारी अब सूचना अधिकार में इस प्रक्रिया का खुलासा होने पर अपना दोष एक-दूसरे के सर मढ़ते नजर आ रहे हैं। जिस प्रकार सेनीटेशन सेल के लिपिक विकास द्वारा अनुमानित व्यय के संबंध में पत्रावली चलाई गई और उसमें उल्लेख किया गया कि उक्त सारणी के अनुसार सामग्री क्रय किए जाने के लिए 70,36,000 के व्यय हेतु प्रशासकीय एवं वित्तीय स्वीकृति दी गई जिसमें जाने में एक दिन में ही पूरा खेल किया गया वह भी बड़े सवाल खड़े कर रहा है? जिस दीपोत्सव का आयोजन नगर निगम द्वारा किया गया था उसके लिए 6 रुपए प्रति की दर से ढाई लाख दीये खरीदे जाने का अनुमान निगम अधिकारियों द्वारा किस आधार पर लगाया गया यह भी घपले की ओर इशारा करता है। वहीं ढ़ाई सौ रुपए प्रति लीटर के हिसाब से बीस हजार लीटर तिल का तेल खरीदे जाने का अनुमानित व्यय दर्शाया गया वह भी चर्चा का विषय बना हुआ है। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार दीपोत्सव कार्यक्रम हेतु वित्तीय एवं प्रशासकीय स्वीकृति देने वाले अधिकारियों की लापरवाही का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि क्रय की गई सामग्री पूरी तरह से प्रयोग भी नहीं हो पाई है। लोग इस पर भी सवाल उठा रहे हैं।
आरटीआई कार्यकर्ता रमेश चंद्र शर्मा ने इस मामले में बड़ा खुलासा करते हुए पूरे आयोजन में जनता के धन के दुरुपयोग का आरोप लगाया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि खुदरा बाजार में ही तिल का तेल 185 रुपए प्रति लीटर है, जिसे ढाई सौ रुपए प्रति लीटर की दर से खरीदा गया। जबकि होलसेल बाजार में दो हजार लीटर तेल की कीमत काफी कम होनी चाहिए। जिससे सामग्री की खरीद में अनियमितता और भ्रष्टाचार दृष्टिगोचर हो रहा है जिसकी जांच की जानी चाहिए।
बात अपनी-अपनी
दीपोत्सव के नाम पर हरि के द्वार पर जमकर धांधलेबाजी की गई है। पहले तो जो टेंडर किए गए उनमें ही सरकार की मंशा गलत थी। फिर दूसरा भाजपा के पाषर्द ने भी टेंडर अपने और अपने रिश्तेदारों के नाम कराकर बहती गंगा में हाथ धो लिए। जो दीए पचास पैसे या एक रूपए का आता है वह छह रूपए में दिखाए गए। सबसे चौकाने वाली बात यह है कि बीस हजार लीटर तिलका तेल कहां जला और कहां गया यह किसी को पता नहीं।
करण माहरा, प्रदेश अध्यक्ष उत्तराखण्ड कांग्रेस
जिला प्रशासन द्वारा 2.5 लाख दीये, तेल, बत्ती और माचिस की व्यवस्था हेतु निर्देशित किया गया था। जिसको निविदा प्रक्रिया के माध्यम से सम्पादित किया गया। पूरी प्रक्रिया विधिवत पूर्ण कराई गई है। जहां तक बाजार से अधिक मूल्य पर क्रय की गई सामग्री की अनुमानित व्यय तैयार करने का सवाल है तो इस बारे में मैं कोई बयान नहीं दे सकता। इसके लिए आप जिलाधिकारी और एमएनए से पूछिए वही कुछ बता पाएंगे।
रविन्द्र दयाल, सहायक नगर आयुक्त, हरिद्वार
पूरी प्रक्रिया दोषपूर्ण है, यह सरकारी धन की बर्बादी है। राज्य महोत्सव के दौरान इस प्रकार सरकारी धन का खर्च किया जाना कर्ज से डूबे इस राज्य के लिए अच्छा संकेत नहीं है। पूरी प्रक्रिया की जांच कराई जाए तो बड़ा मामला सामने आएगा। सरकार को इस टेंडर प्रक्रिया की जांच करानी चाहिए।
रतन मणी डोभाल, वरिष्ठ पत्रकार एवं सामाजिक कार्यकर्ता, हरिद्वार
जिस प्रकार घाटों पर दीपोत्सव कार्यक्रम किए जाने का दावा किया गया उसमें भी बड़ा झोल है। रात 11 बजे से पूर्व नगर निगम से अनुबंधित कम्पनी के सफाई कर्मचारियों ने जलाए गए दीपकों के स्थान पर झाडू मारकर सारे दीपक गंगा में बहा दिए। मेरे द्वारा सूचना अधिकार में जब इस सम्बंध में जानकारी मांगी गई तो बड़ा मामला निकल कर सामने आया। भ्रष्टाचार के विरुद्ध मेरा यह संघर्ष जारी रहेगा।
रमेश चन्द्र शर्मा, सूचना अधिकार कार्यकर्ता, हरिद्वार
दीपोत्सव कार्यक्रम के बहाने पैसे की भारी बंदरबांट हुई है। यह इस राज्य के लिए शुभ संकेत नहीं है। राज्य के लिए अपनी जान देने वाले शहीदों का शायद यह सपना तो नहीं था। पूरी प्रक्रिया की जांच कराकर अविलम्ब दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही करनी चाहिए।
अमन गर्ग, महानगर अध्यक्ष, कांग्रेस कमेटी हरिद्वार

