म्यांमार के सैन्य तख्तापलट के विरोध-प्रदर्शनों की चर्चा हर जगह हो रही है। म्यांमार सेना के अत्याचार के आगे जनता के साहस की भी चर्चा विश्वभर में हो रही है। इसी बीच अब म्यांमार में सैन्य तख्तापलट का शांतिपूर्ण तरीके से विरोध कर रहे प्रदर्शनकारियों को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित किया गया है। नोबेल शांति पुरस्कार विश्व स्तर पर शांति स्थापित करने के लिए किये गए प्रयासों के लिए दिया जाता है। ये नॉमिनेशन 2022 के लिए है। नोबेल समिति का चयन नॉर्वे की संसद नॉर्वेजियन करती है। इस बात की जानकारी खुद नॉर्वे की अकादमिक संस्था द्वारा दी गई है। यह समिति फैसला करती है कि पुरस्कार किसे मिलेगा।
असिस्टेंस एसो ऑफ पॉलिटिकल प्राइजनर्स(AAPP) के अनुसार, अब तक म्यांमार में सेना द्वारा 320 लोगों से अधिक लोगों की जाने जा चुकी हैं। 3000 लोग भी सैन्य हिरासत में है। ओस्लो यूनिवर्सिटी में समाजशास्त्र की प्रोफेसर क्रिस्टियन स्टोक्की द्वारा कहा गया कि हालिया समय में बर्मी समाज की ओर से किया जा रहा ये प्रदर्शन कुछ दशकों में सबसे असरदार शांतिपूर्ण प्रदर्शन है।
जानकारी के अनुसार, म्यांमार के प्रदर्शनकारियों को वर्ष 2022 के लिए नामांकित किया जाएगा, क्योंकि वर्ष 2021 के लिए नामांकन की अंतिम तिथि 31 जनवरी 2021 तक थी। ।

