भारतीय राजस्व सेवा से इस्तीफा दे राजनीतिक पारी की शुरुआत करने वाले उदित राज इस समय बेहद व्यथित बताए जा रहे हैं। खुद को दलितों का नेता मानने वाले उदित राज ने बड़े धूम-धड़ाके से ‘इंडियन जस्टिस पार्टी’ शुरू की थी, लेकिन उन्हें कुछ खास सफलता हाथ न लगी। भाजपा को सांप्रदायिक और कांग्रेस को दलित विरोधी कहने वाले उदित राज ने 2014 में आम चुनाव से ठीक पहले भाजपा का दामन थाम लिया। उत्तर पूर्व दिल्ली लोकसभा सीट से भाजपा के टिकट पर चुनाव जीते उदित राज का टिकट इस बार पार्टी ने काट डाला। जानकारों की मानें तो उदित राज ने पीएम मोदी से संपर्क साधने का प्रयास तब किया जब उनके टिकट काटे जाने की चर्चा मीडिया में शुरू हो गई थी। पीएम के बजाए उन्हें भाजपा के संगठन महामंत्री रामलाल से मिलने को कहा गया। रामलाल ने उन्हें अमित शाह से भेंट करने की सलाह दी। बेचारे उदित पार्टी अध्यक्ष को फोन मिलाते रह गए, लेकिन अमित शाह नहीं उपलब्ध हुए। हारकर उन्होंने नितिन गडकरी से संपर्क साधा। जानकार बताते हैं कि गडकरी ने दो टूक बोल डाला कि उन्हें टिकट नहीं दिया जा रहा है। यह भी बताया कि उन्हें कुछ निजी कारणों के चलते पार्टी चुनाव नहीं लड़ा रही है। बहरहाल उदित राज ने कांग्रेस से संपर्क साधा। दलितों को आकर्षित करने की नीयत से कांग्रेस ने उन्हें पार्टी में ले जरूर लिया लेकिन समय सीमा निकल चुकने के कारण वे लोकसभा का टिकट न पा सके।

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