Corona की दूसरी लहर पर काबू पाने के लिए वैक्सीनेशन भी जोरों पर है। Corona की दूसरी लहर से पिछले कुछ हफ्तों से थोड़ी राहत मिलती दिख रही है, लेकिन यह पूरी तरह से ख़त्म नहीं हुई है। इस बीच अब देश में Corona की तीसरी लहर की आशंका के साथ ही डेल्टा प्लस वैरिएंट से खतरा और बढ़ गया है। इस बीच Corona वायरस के प्रकोप से जूझ रही दुनिया के लिए एक बुरी खबर है। हाल ही में हुए एक अध्यन्न में वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि पेड़ के पराग से कोरोना जैसे सैकड़ों वायरस फैल सकते हैं। हालांकि पराग से कोरोना का प्रसार भीड़-भाड़ वाले क्षेत्रों में अधिक रहता है।

दरअसल , साइप्रस में निकोसिया विश्वविद्यालय के एक अध्ययन में पाया गया कि पेड़ भी Corona वायरस फैला सकते हैं। कई वायरस, जैसे कि Corona, पेड़ के पराग से फैल सकते हैं। पराग से कोरोना का प्रसार भीड़-भाड़ वाले इलाकों में सबसे ज्यादा होता है। साइप्रस में निकोसिया विश्वविद्यालय के एक अध्ययन में चौंकाने वाली जानकारी सामने आई।

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Corona को फैलने से रोकने के लिए 6 फीट की दूरी काफी नहीं
भौतिक विज्ञानी तालिब उबोदक और इंजीनियर दिमित्रियस ड्रैकाकिस के एक अध्ययन में ऐसी विफलता का पता चला है। उन्होंने कंप्यूटर पर एक विलो पेड़ का एक मॉडल बनाया जो बड़ी संख्या में पराग को छोड़ता है और बताता है कि इसके कण कैसे फैलते हैं। हालाँकि, राहत की बात यह है कि पराग भीड़ से बहुत जल्दी दूर हो जाता है। निष्कर्षों के आधार पर शोधकर्ताओं ने कहा कि कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने के लिए हमेशा 6 फुट की सामाजिक दूरी पर्याप्त नहीं होती है।

एक व्यापक मॉडल के आधार पर एक कम्यूटर ड्राइंग बनाया
शोधकर्ताओं ने सुझाव दिया कि हवा में पराग के स्तर को कम करने के उपाय किए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि एक पेड़ औसतन एक दिन में 40 पराग प्रति क्यूबिक फुट हवा में छोड़ सकता है। इतना ही नहीं हर कण के अंदर हजारों वायरल कण होते हैं।

