दशकों पहले एक कवितानुमा कुछ पढ़ा था, तंज था उन बुद्धिजीवियों पर जो महंगी शराब, वातानुकूलित कमरों और अन्य...
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देश की राजधानी में ही यदि निजाम की निजामत न रहे तो उसकी साख पर सवाल उठने लाजिमी हैं।...