”कौन कहता है आसमान में सुराख़ हो नहीं सकता , एक पत्थर तो तबियत से उछालो यारों….” दुष्यंत कुमार...
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दुष्यंत ने जिस दौर में लिखना शुरू किया वह अज्ञेय और मुक्तिबोध का था। इन दोनों कवियों की कठिन...