मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी प्रदेश में ‘जीरो टॉलरेंस’ स्थापित करने का प्रयास कर रहे हैं। जिसके तहत ही नदियों से खनन की निकासी के मामले में मिल रही अधिकारियों की धांधलेबाजी की शिकायतों पर अंकुश लगाने की कोशिशों चलते एक निजी कम्पनी को रमन्ना काटने और राजस्व वसूली करने का जिम्मा सौंपा गया था। साथ ही इस कम्पनी को खनन पट्टा वितरण में भी प्राथमिकता दी गई। लेकिन शासन और प्रशासन की मिली भगत से यह कम्पनी रक्षक से भक्षक बन बैठी है। हालात इतने विकट हैं कि माफिया से लेकर सफेदपोश तक इस अवैध खनन की ‘खन-खन’ में शामिल हो गए हैं

देहरादून जिले के कालसी में यमुना नदी पर आवंटित पट्टे में न केवल स्वीकृति से दोगुनी खनन सामग्री निकालने, बल्कि हाईकोर्ट के आदेशों की धज्जियां उड़ाते हुए भारी मशीनों का प्रयोग किया गया। इसकी रिपोर्ट उपजिलाधिकारी कालसी गौरी प्रभात ने जिलाधिकारी को भेज दी। जिलाधिकारी को पट्टा निरस्त करने का पूरा अधिकार है। बावजूद इसके उनके द्वारा कम्पनी पर पेनल्टी लगाने और पट्टा निरस्त करने की कार्रवाई शुरू कर देने की बजाय मामला शासन को भेज कर लीपापोती कर दी गई। फिलहाल मामला खनन निदेशक के पास विचाराधीन है। जिसमें आगामी 27 फरवरी की तारीख निर्धारित हुई है।
जानकारी के अनुसार 3 दिसम्बर 2024 को कैलाश रिवर बेड मिनिरल्स एलएलपी को कालसी के ग्राम ब्यासनहरी क्षेत्र में यमुना नदी में खनन विभाग ने रिवर ड्रेजिंग का पट्टा आवंटित किया गया था। लेकिन स्थानीय निवासी यहां पर अवैध खनन की निरंतर शिकायत कर रहे थे। इस पर कालसी की उपजिलाधिकारी द्वारा राजस्व विभाग की टीम बनाई गई। जिसमें उपजिलाधिकारी कालसी के साथ ही तहसीलदार कालसी, राजस्व निरीक्षक, राजस्व उपनिरीक्षक, नायब तहसीलदार एवं खनन विभाग के कुछ व्यक्ति सम्मिलित थे। संयुक्त टीम के द्वारा गत 31 जनवरी को खनन पट्टे का स्थलीय निरीक्षण किया। जिसमें पाया गया कि नदी में खनन (उपखनिज) सामग्री निकालने के लिए दो जेसीबीनुमा ट्रैक्टर/बुल/ मोडिफाइड एक्सकैवेटर का प्रयोग किया जा रहा है। साथ ही दो पोकलैंड मशीन भी पाई गई।
उपजिलाधिकारी कालसी ने अपनी रिपोर्ट में लिखा कि यह पट्टा कैलाश रिवर बेड मिनरल्स एलएलपी को आवंटित है। पट्टे के साथ यह शर्त शामिल थी कि अनुमन्य मशीनों के अतिरिक्त उपखनिज निकालने के लिए अन्य मशीनों का प्रयोग नहीं किया जाएगा। इसके बाद भी न सिर्फ स्वीकृति से भिन्न मशीनों का प्रयोग पाया गया, बल्कि पट्टे का संचालन बिना सीमाबंदी (सीमांकन) के ही किया जा रहा था। बिना सीमांकन निरंतर खनन किया जाना गंभीर है। इस मामले में जिला खान अधिकारी की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। बताया जा रहा है कि उन्होंने बिना सीमांकन के ही खनन सामग्री के परिवहन के लिए रवन्ना पोर्टल खोल दिया था। जांच में यह बात भी सामने आई है कि पट्टा क्षेत्र में स्वीकृति से दोगुना खनन किया गया है। कालसी उपजिलाधिकारी ने 1 फरवरी 2025 को देहरादून के जिलाधिकारी को सौंपी अपनी जांच रिपोर्ट में कहा है कि मौके पर उपस्थित ग्रामीणों द्वारा इस सम्बंध में अपने बयान दिए गए हैं। उनके द्वारा बताया गया कि यहां रात में भी अवैध खनन किया जाता है।
हमने इस मामले में पूरी जांच रिपोर्ट जारी की है। आप उसमें देख सकते हैं कि किस तरह से कई मामलों में अनियमितताएं हुई हैं। बिना सीमांकन के ही पोर्टल खोल जाना कानून सम्मत नहीं है। इसकी पूरी रिपोर्ट हमने डीएम साहब को सौंप दी है। इसमें एक शर्त जोड़ी गई है कि शासन स्तर से ही पट्टा निरस्त हो सकता है इसलिए डीएम साहब ने इस रिपोर्ट को शासन को दे दिया है। जिसमें अगली डेट भी लग चुकी है। जल्द ही इस पर कार्रवाई हो जाएगी।
गौरी प्रभात, ज्वाइंट मजिस्ट्रेट, कालसी, देहरादून
भूतत्व एवं खनिकर्म निदेशालय के पत्र संख्या -5524 दिनांक 3 दिसम्बर 2024 में स्पष्ट उल्लेख है कि पट्टा धारक कैलाश रिवर बेड मिनिरल्स एलएलपी को अनुमति देने की शर्तों में से एक शर्त यह है कि 4 रिवर ड्रेजिंग में भारी मशीनों का प्रयोग नहीं किया जाएगा।
उपजिलाधिकारी ने अपनी रिपोर्ट में उच्च न्यायालय नैनीताल द्वारा एक जनहित याचिका संख्या-184, 2024 में पारित 5 दिसम्बर 2024 के आदेशों का भी जिक्र किया है। जिसके तहत खनन कार्यों में मशीन से खनिज के उत्खनन को प्रतिबंधित किया गया है। इसके बावजूद भी खनन पट्टे में कई मशीन उत्खनन करती हुई पाई गई। हालांकि मौके पर पकड़ी गई दोनों पोकलैंड मशीनों को सीज करते हुए फर्द बनाकर पट्टा स्वामी के मुंशी के कब्जे में दे दिया गया।
इस मामले में मुझे पूरी जानकारी नहीं है। आप हमारे डायरेक्टर से बात कर सकते हैं।
अनिल कुमार, ज्वाइंट डायरेक्टर, खनन विभाग
सीमांकन के बिना ही हो रहा था खनन
खनन का पट्टा स्वीकृत होने के बाद राजस्व विभाग द्वारा उस क्षेत्र का स्थलीय निरीक्षण किया जाता है जहां पर पट्टा आवंटित हुआ होता है। राजस्व विभाग बाकायदा उसे पट्टे का सीमांकन करता है। उसी के बाद ही खनन शुरू किया जा सकता है। लेकिन यहां चैंकाने वाली बात यह रही की पट्टे का सीमांकन ही नहीं किया गया।
पिछले साल ही होना था सीमांकन
उपजिलाधिकारी कालसी द्वारा अपनी जांच रिपोर्ट में इस बात का भी खुलासा किया गया है कि जिला खनिज अधिकारी देहरादून के पत्र संख्या 911 में 27 नवम्बर 2024 को सीमा बंधन (सीमांकन) हेतु पत्र प्रेषित किया गया था। जिसके क्रम में दिनांक 2 दिसंबर 2024 की तिथि निर्धारित की गई थी। लेकिन राजस्व उप निरीक्षक कालसी द्वारा अपनी रिपोर्ट में बताया गया कि 2 दिसम्बर 2024 को जब वह मौके पर गए तो पट्टा स्वामी द्वारा पूर्व से ही बिना सीमांकन कराए खनन कार्य किया जा रहा था। इसकी सूचना तहसीलदार कालसी द्वारा जिला खान अधिकारी देहरादून को अपने पत्र संख्या 726 दिनांक 2 दिसम्बर 2024 को ही दे दी गई थी लेकिन उसके बावजूद भी खान अधिकारी द्वारा सीमांकन की निर्धारित तिथि के पहले से पट्टाधारक द्वारा खनन शुरू करने की रिपोर्ट पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।
दूसरी तिथि तय होने के बाद भी नहीं किया गया सीमांकन
उपजिलाधिकारी कालसी ने अपनी जांच रिपोर्ट में बताया है कि किस तरह सीमांकन के दूसरी बार आदेश भी दरकिनार किए गए। जांच रिपोर्ट में उन्होंने लिखा है कि 22 जनवरी 2025 को दोबारा से सीमांकन करने के आदेश दिए गए। यह आदेश पत्र उपजिलाधिकारी कालसी को एक फरवरी 2025 को प्राप्त हुआ है। इस समय तक भी सीमांकन नहीं हुआ था और सीमांकन के बिना ही जिला खान अधिकारी द्वारा रमन्ना हेतु पोर्टल खोल दिया गया। उप जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि पट्टाधारक द्वारा नियम विपरीत बिना सीमांकन के ही निरंतर खनन कार्य किया जा रहा है।
सीमांकन नहीं हुआ तो कैसे खुला पोर्टल?
जिस कम्पनी को खनन का पट्टा आवंटित किया जाता है उसके नाम पर पोर्टल खोला जाता है। इस पोर्टल में ही खनन करने के लिए अधिकार प्रदत्त किए जाते हैं। इसके तहत ही ई-रमन्ना भी इसी पोर्टल से जारी किए जाते हैं। जिसमें पोर्टल के जरिए यह भी अंकित किया जाता है कि कितना माल निकाला गया तथा कितने माल की रॉयल्टी विभाग को मिली है। यह पोर्टल तब खोला जाता है जब पट्टे का सीमांकन हो जाता है। लेकिन यहां चैंकाने वाली बात यह रही कि सीमांकन हुए बिना ही कम्पनी के नाम का पोर्टल खोला दिया गया। यह काम खान अधिकारी का होता है। इसके अलावा पोर्टल खोलने के लिए निदेशालय स्तर पर नोडल अधिकारी अनिल कुमार नियुक्त हैं। सवाल यह है कि खान अधिकारी और खनन निदेशालय द्वारा अपने अधिकारों का निर्वहन क्यों नहीं किया गया?
पट्टा कम्पनी का और चला रहा कमल?
इस मामले में चैंकाने वाली बात यह है कि जो पट्टा आवंटित किया गया है वह कम्पनी कैलाश रिवर बेड मिनरल्स एलएलपी है। लेकिन इस पट्टे का जो संचालन किया जा रहा है वह एक कमल सिंह रावत नामक व्यक्ति के द्वारा किया जा रहा है। कम्पनी द्वारा कमल सिंह रावत को यह पट्टा कैसे बेचा गया यह भी जांच का विषय है। भाजपा के ही सूत्रों की मानें तो उनकी पार्टी का एक प्रदेश महामंत्री कम्पनी और कमल सिंह रावत की डील के पीछे है। प्रदेश महामंत्री की संस्तुति पर ही यह पट्टा प्राइवेट ठेकेदार को दिया गया है।
मशीन चोरी – सीनाजोरी
क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि कालसी की उपजिलाधिकारी गौरी प्रभात ने अपने नायब तहसीलदार को जिस पोकलैंड मशीन की चोरी के आरोप में मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए हैं वह उसी कम्पनी (कैलाश रिवर बेड मिनरल्स एलएलपी) का मुंशी है जिसे सरकार द्वारा खनन विभाग की रॉयल्टी चेक करने और राजस्व वसूलने का जिम्मा सौंपा गया है। 31 जनवरी को अवैध खनन के मामले में दो पोकलैंड मशीन सीज की गई थीं। जिनमें से आश्चर्यजनक तरीके से एक मशीन चोरी हो गई। इस घटना से प्रशासन में हड़कम्प मच गया है। हड़कम्प मचना तय भी था क्योंकि पोकलैंड मशीनों को अवैध खनन में संलिप्त पाए जाने के बाद सीज किया गया था। सीज किए जाने के बाद लेकिन एक मशीन गायब कर दी गई। चोरी का आरोपित मुंशी हरियाणा निवासी सुनील बताया जा रहा है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या कम्पनी के मुंशी ने ही अपनी सीनाजोरी दिखाते हुए पोकलेन मशीन की सील तोड़कर उसे अपने कब्जे में ले लिया? पोकलैंड मशीन चोरी होने और कम्पनी के मुंशी के खिलाफ मुकदमा किया जाने से यह भी स्पष्ट होता नजर आ रहा है कि कैलाश रिवर बेड मिनरल्स एलएलपी को किसी का खौफ नहीं है।
शक के घेरे में कैलाश रिवर बेड डील
उत्तराखण्ड सरकार ने कैलाश रिवर बेड मिनरल्स एलएलपी जैसी निजी कम्पनियों को नदियों में खनन और रॉयल्टी संग्रहण के अधिकार सौंपे हैं, जिससे उन्हें खनन गतिविधियों के साथ-साथ रॉयल्टी वसूली और अवैध खनन की निगरानी का कार्य भी सौंपा गया है। यह व्यवस्था हितों के टकराव का उदाहरण है, क्योंकि खनन करने वाली कम्पनियां स्वयं ही अपनी गतिविधियों की निगरानी कर रही हैं। कैलाश रिवर बेड मिनरल्स एलएलपी के नामित साझेदार हैं, जयंत कोठापल्ली और चित्रैसेल्वम कुलराजसिंगम। यह कंपनी 18 जनवरी 2024 को स्थापित हुई थी और इसका पंजीकृत कायाज़्लय देहरादून, उत्तराखण्ड में स्थित है।
मार्च 2024 में, इस कम्पनी ने उत्तराखण्ड सरकार के साथ पांच वर्षीय अनुबंध पर हस्ताक्षर किए, जिसके तहत उन्हें चार जिलों में नदी तल खनिजों पर रॉयल्टी संग्रहण का अधिकार मिला। इससे पहले, दिसम्बर 2023 में, हैदराबाद स्थित पावर मेक प्रोजेक्ट्स लिमिटेड ने चार जिलों में खनिजों पर रॉयल्टी संग्रहण के लिए बोली जीती थी और बाद में कैलाश रिवर बेड मिनरल्स एलएलपी के साथ साझेदारी की। इस प्रक्रिया में, राज्य सरकार ने निजी कम्पनियों को रॉयल्टी संग्रहण और अवैध खनन की निगरानी के अधिकार सौंपे, जो हितों के टकराव का कारण बन सकता है, क्योंकि खनन करने वाली कम्पनियां स्वयं अपनी गतिविधियों की निगरानी कर रही हैं। हालांकि इन कम्पनियों पर नियमों के उल्लंघन के आरोप भी लगे हैं। फरवरी 2025 में, देहरादून जिले के कालसी क्षेत्र में कैलाश रिवर बेड मिनरल्स एलएलपी पर स्वीकृति से अधिक खनन और भारी मशीनों के अवैध उपयोग का सच उप जिला अधिकारी कालसी की जांच रिपोर्ट में सामने आ चुका है। जांच में पाया गया कि कम्पनी ने निर्धारित सीमाओं से अधिक खनन किया और बिना उचित सीमांकन के कार्य जारी रखा। कैलाश रिवर बेड मिनरल्स एलएलपी की स्थापना 18 जनवरी 2024 को हुई थी, जिसका पंजीकृत कार्यालय देहरादून, उत्तराखण्ड में स्थित है।
उत्तराखण्ड सरकार ने राज्य की नदियों में खनन से सम्बंधित रॉयल्टी संग्रहण और अवैध खनन की निगरानी के लिए निजी कम्पनियों को अधिकार सौंपे हैं। इस प्रक्रिया के तहत, हैदराबाद स्थित पावर मेक प्रोजेक्ट्स लिमिटेड ने चार जिलों- नैनीताल, हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर और देहरादून में नदी तल खनिजों पर रॉयल्टी संग्रहण के लिए ई-नीलामी प्रक्रिया में सफलतापूर्वक बोली लगाई। कम्पनी ने राज्य सरकार को इसके बदले 303.52 करोड़ रुपए का भुगतान करने का प्रस्ताव दिया। बाद में मार्च 2024 में पावर मेक प्रोजेक्ट्स लिमिटेड ने कैलाश रिवर बेड मिनरल्स एलएलपी के साथ साझेदारी की थी जिसने राज्य सरकार के साथ पांच वर्षीय अनुबंध पर हस्ताक्षर किए, जिससे उन्हें इन चार जिलों में रॉयल्टी संग्रहण का अधिकार मिला। यह व्यवस्था हितों के टकराव का उदाहरण है, क्योंकि रॉयल्टी संग्रहण करने वाली कम्पनियों को खनन के लिए प्राथमिकता दी गई है, जिससे वे अपनी ही गतिविधियों की निगरानी करने की स्थिति में हैं। इससे पर्यावरणीय चिंताएं और अवैध खनन के मामलों में वृद्धि की सम्भावना बढ़ती है।
(reporters-collective.in से साभार)

