उत्तर प्रदेश में पत्रकारिता खतरे में है । योगी सरकार आए दिन पत्रकारो पर फर्जी मामले दर्ज करा कर निष्पक्ष पत्रकारिता पर नकेल डालने की कोशिश कर रही है। इसे योगी सरकार का कलम पर काला कानून कहा जा रहा है।
उत्तर प्रदेश के मिरजापुर में मिड-डे-मील में नमक-रोटी बांटने का खुलासा करने वाले पत्रकार का मामला अभी ठंडा भी नहीं पड़ा था कि यूपी में अब खबर छापने और दिखाने पर 2 और पत्रकारों के खिलाफ पुलिस ने मामला दर्ज किया है। उत्तर प्रदेश पुलिस ने बिजनौर जिले में ‘दलित परिवार का मकान बिकाऊ’ होने की खबर को लेकर दो स्थानीय पत्रकारों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।
बताया जा रहा है कि स्थानीय पत्रकार शकील अहमद और आशीष तोमर ने दंबगों द्वारा दलितों के पानी बंद होने की खबर को दिखाया था। इसके बाद पुलिस ने दोनों के खिलाफ संगीन धाराओं में मंडावर थाने में मामला दर्ज किया है। पुलिस ने दोनों पत्रकारों पर मानहानि, घृणा फैलाने, आईटी ऐक्ट, अफवाह फैलाने के आरोप में मामला दर्ज किया है। शकील और आशीष तोमर के खिलाफ मामला दर्ज किए जाने के बाद बड़ी संख्या में पत्रकारों ने प्रदर्शन किया है।

दरअसल, इन पत्रकारों ने उस खबर को रिपोर्ट किया था, जिसमें बसी गांव के एक वाल्मीकि परिवार को गांव के नल से पानी भरने से रोका गया। उनके मकान पर लिखा हुआ था कि ‘हम पलायन करना चाहते हैं, ये मकान बिकाऊ है’।
बिजनौर पुलिस द्वारा दर्ज की गई प्राथमिकी में दो पत्रकारों (एक स्थानीय दैनिक के साथ काम करने वाले और एक अन्य इलेक्ट्रॉनिक समाचार चैनल के साथ जुड़े हुए हैं) के साथ ही तीन अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया । पुलिस ने कहा कि इस मुद्दे को पुलिस और गांव प्रधान ने सुलझा लिया था। उन पत्रकारों में से एक ने स्थानीय प्रशासन की छवि खराब पेश करने के लिए दीवार पर पलायन की धमकी दी थी।
जिन पत्रकारों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है, उनमें से एक ने बताया, ‘खबर रिपोर्ट करने के बाद पीड़ित पक्ष लगातार हमें फोन कर रहा है कि पुलिस मुझ पर दबाव बना रही है कि तुमने मकान पर ये क्यों लिखा है और जिसने लिखा है वो जेल जाए। हमारे पास सारे सबूत हैं कि पुलिस ने कहां-कहां पीड़ित पक्ष पर दबाव बनाया है। पीड़ित पक्ष से पुलिस ने कहा है कि अगर तुम जेल जाने से बचना चाहते हो तो तुम पत्रकारों का नाम लो कि उन्होंने इसे तुम्हारे मकान पर लिखा है।’

पीड़ित ने बताया, ‘उनका कहना है कि वे जेल जाएंगे, लेकिन हमारा मर्डर करके जाएंगे। मोहल्ले में एक ही नल है और उसी से पानी नहीं भरने देते हैं। हमारे बच्चे जाते हैं तो उनकी बाल्टी फेंक देते हैं।’
उधर सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में एक पत्रकार विशाल ने दावा किया है कि हमें 4 सितंबर को बस्सी गांव के एक प्रेमचंद वाल्मीकि का फोन आया। उन्होंने दावा किया कि गांव के कुछ प्रभावशाली व्यक्तियों ने उन्हें और उनके परिवार को अपने आवास के पास एक हैंडपंप का उपयोग नहीं करने की धमकी दी थी।
इस प्रकार, उन्होंने ‘बिक्री के लिए घर’ कहते हुए पोस्टर लगाए। हम तथ्यों को एकत्र करने के लिए गाँव गए और इस संबंध में एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी।

विशाल ने वीडियो में यह भी दावा किया है कि हमारे खिलाफ प्राथमिकी ने स्थानीय पुलिस के कुत्सित इरादों को उजागर किया है और प्रेस की स्वतंत्रता के लिए एक बड़ा झटका है। हम भयभीत नहीं हैं, लेकिन जिस तरह से मीडिया की आवाज़ का मज़ाक उड़ाया जा रहा है, वह एक खतरनाक संकेत है।
विशाल ने वीडियो में आगे कहा,
है कि हम चाहते हैं कि एफआईआर को खत्म कर दिया जाए और स्थानीय पुलिस के खिलाफ कार्रवाई की जाए, जो प्रेस के खिलाफ पक्षपाती हैं ।