- दि संडे पोस्ट डेस्क
पच्चीस अप्रैल को माली के रक्षा मंत्री सदिओ कमारा की फिल्मी अंदाज में हुई हत्या ने इस पश्चिम अफ्रीकी देश की पहले से जटिल सुरक्षा स्थिति को और गम्भीर बना दिया है। राजधानी के निकट अत्यधिक सुरक्षित माने जाने वाले सैन्य क्षेत्र में इस हमले का सफल होना इस बात का संकेत है कि उग्रवादी समूह न केवल संगठित हो रहे हैं बल्कि अब राज्य की शक्ति के केंद्रों को सीधे चुनौती देने की स्थिति में भी आ गए है
पश्चिम अफ्रीकी के देश माली में हिंसा और राजनीतिक अस्थिरत ने एक नया और खतरनाक मोड़ ले लिया है। देश के रक्षा मंत्री सदिओ कमारा की हत्या कर दी गई जिसने न केवल सरकार बल्कि पूरे सुरक्षा ढांचे को गहरा झटका दिया है। सरकारी प्रवक्ता के अनुसार यह हमला उस समय हुआ जब हमलावरों ने राजधानी बमाको से करीब 15 किलोमीटर दूर स्थित काती में उनके आवास को निशाना बनाया। यह क्षेत्र माली का प्रमुख सैन्य गढ़ माना जाता है जहां अंतरिम राष्ट्रपति असिमी गोईटा भी रहते हैं।
हमले की प्रकृति बेहद संगठित और योजनाबद्ध थी। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार आत्मघाती कार बम विस्फोट के साथ-साथ भारी हथियारों से लैस हमलावरों ने एक साथ कई स्थानों पर हमला किया। इन हमलों की जिम्मेदारी अलकायदा से जुड़े संगठन ‘जमा अत नुसरत अल इस्लाम वाॅमुस्लिमिन’ और तुआरेग विद्रोही समूह ‘आजवाद लिबरेशन फ्रंट’ से जुड़े लड़ाकों पर डाली जा रही है। यह तथ्य विशेष रूप से चिंताजनक है कि पहले आपस में संघर्ष करने वाले ये समूह अब एकजुट होकर माली राज्य के खिलाफ मोर्चा खोल रहे हैं।
इस हमले में रक्षा मंत्री के साथ उनके परिवार के सदस्यों की भी मौत हुई जिससे घटना का मानवीय पक्ष और अधिक गम्भीर हो जाता है। इसके साथ ही देश के कई अन्य हिस्सों जैसे बमाको, गाओ, किदाल और सेवारे में भी गोलीबारी और विस्फोटों की खबरें सामने आईं जो यह दर्शाती हैं कि यह हमला एक व्यापक अभियान का हिस्सा था, न कि कोई अलग-थलग घटना।
सदिओ कमारा माली की सैन्य सरकार के सबसे प्रभावशाली चेहरों में से एक थे। 2020 और 2021 में हुए सैन्य तख्तापलट के बाद बनी सरकार में उनकी भूमिका केंद्रीय रही थी और उन्हें भविष्य के सम्भावित नेता के रूप में भी देखा जा रहा था। ऐसे में उनकी हत्या केवल एक व्यक्ति की मौत नहीं बल्कि सत्ता संतुलन पर सीधा प्रहार मानी जा रही है। इस घटना को समझने के लिए माली की पृष्ठभूमि को देखना जरूरी है। पिछले एक दशक से माली लगातार अस्थिरता, सैन्य तख्तापलट और उग्रवादी हिंसा से जूझ रहा है। उत्तरी और मध्य क्षेत्रों में इस्लामी चरमपंथी समूहों की मजबूत पकड़ रही है, जबकि तुआरेग समुदाय लम्बे समय से स्वायत्तता या अलग राष्ट्र की मांग करता रहा है। राज्य की कमजोर उपस्थिति, सीमित संसाधन और राजनीतिक अस्थिरता ने इन समूहों को पनपने का अवसर दिया है।
स्थिति और जटिल तब हो गई जब 2020 और 2021 में सेना ने सत्ता अपने हाथ में ले ली। इसके बाद अंतरराष्ट्रीय सहयोग, विशेषकर फ्रांसीसी सैन्य उपस्थिति में कमी आई, जिससे सुरक्षा का एक बड़ा खालीपन पैदा हुआ। इस खालीपन का फायदा उठाते हुए उग्रवादी संगठनों ने अपनी पकड़ मजबूत कर ली और अब वे पहले से कहीं अधिक संगठित और आक्रामक नजर आ रहे हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि हाल के हमले इस बात का संकेत हैं कि उग्रवादी समूह अब केवल ग्रामीण या दूरदराज इलाकों तक सीमित नहीं रहना चाहते बल्कि वे रणनीतिक और प्रतीकात्मक रूप से महत्वपूर्ण लक्ष्यों जैसे सैन्य मुख्यालय और शीर्ष नेतृत्व को निशाना बना रहे हैं। इसके साथ ही विभिन्न विद्रोही गुटों का आपसी सहयोग यह दर्शाता है कि वे अपने मतभेद भुलाकर राज्य के खिलाफ साझा रणनीति अपना रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस घटना की कड़ी निंदा की गई है। अफ्रीकी संघ, इस्लामिक सहयोग संगठन,
यूरोपीय संघ और अमेरिका ने इसे क्षेत्रीय स्थिरता के लिए गम्भीर खतरा बताया है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस घटना की कड़ी निंदा की गई है। अफ्रीकी संघ, इस्लामिक सहयोग संगठन,
यूरोपीय संघ और अमेरिका ने इसे क्षेत्रीय स्थिरता के लिए गम्भीर खतरा बताया है।
कुल मिलाकर, माली में रक्षा मंत्री की हत्या केवल एक हिंसक घटना नहीं बल्कि उस गहरे संकट का प्रतीक है जिसमें राज्य की सम्प्रभुता, सुरक्षा और राजनीतिक स्थिरता लगातार चुनौती के घेरे में हैं। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि माली की सैन्य सरकार इस चुनौती का सामना कैसे करती है, क्योंकि वर्तमान परिस्थितियां यह संकेत दे रही हैं कि संघर्ष अभी और तेज हो सकता है।