अमित चौहान, उपाध्यक्ष, जिला पंचायत, हरिद्वार
धर्मनगरी हरिद्वार में जमीनों की कीमत आसमान छू रही है। यहां खेती और किसानों की जमीन के साथ ही हरे-भरे बागों को उजाड़कर कंक्रीट के जंगल खड़े किए जा रहे हैं। गंगा की अविरल धारा को रोकने और अवैध खनन करने वालों के विरुद्ध पिछले तीन दशक से लड़ाई लड़ रहा मातृ सदन अब भू-माफियाओं के खिलाफ तनकर खड़ा हो गया है। मातृ सदन के अनुसार ग्राम नूरपुर पंजनहेड़ी में कृषि भूमि और बाग उजाड़कर टाउनशिप का अवैध निर्माण हो रहा है। ऊषा टाउनशिप के मालिक और जिला पंचायत उपाध्यक्ष अमित चैहान पर आरोप है कि उन्होंने 14 बीघा जमीन स्वीकृति की आड़ में 70 बीघा से अधिक भूमि पर अवैध रूप से बागों का कटान कर काॅलोनी बना दी। इसकी जांच करने जब प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची तो वहां फायरिंग शुरू हो गई। जिलाधिकारी के आदेश पर फिलहाल मामले की जांच चल रही है


हरिद्वार पुलिस के अनुसार 28 जनवरी की सुबह पंजनहेड़ी गांव में प्रशासन की टीम सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे की शिकायत पर जांच करने पहुंची थी। गांव के पास अमित चैहान द्वारा उषा टाउनशिप के नाम से काॅलोनी विकसित की जा रही है। दूसरे पक्ष के अतुल चैहान द्वारा न्यायालय में याचिका डाली गई है। उसी के सम्बंध में जांच के लिए प्रशासन की टीम को आना था। दो पक्षों अतुल चैहान और उनके भतीजे भाजयुमो के प्रदेश मंत्री तरुण चैहान की हरिद्वार जिला पंचायत के उपाध्यक्ष अमित चैहान से बहस हो गई थी। दोनों पक्षों के बीच बढ़ते तनाव के बीच अचानक फायरिंग की घटना हुई, जिसमें सचिन चैहान और किशनपाल को गोली लग गई। सचिन चौहान हरिद्वार जिला पंचायत के उपाध्यक्ष अमित चौहान का भाई है, वहीं किशनपाल, अमित चौहान के मामा हैं। गोली लगने से दोनों गम्भीर रूप से घायल हो गए थे जिन्हें हरिद्वार के हाॅस्पिटल में भर्ती कराया गया था। जहां से डॉक्टरों ने उन्हें हायर सेंटर रेफर कर दिया था।


उधर दूसरी तरफ नूरपुर पंजनहेड़ी निवासी अतुल चौहान की पत्नी ने कनखल थाना पुलिस को एक तहरीर दी जिसमें उन्होंने बताया है कि उनके पति अतुल चौहान लम्बे समय से क्षेत्र में बागों की अवैध कटाई एवं कृषि भूमि पर हो रही अवैध प्लाॅटिंग के खिलाफ प्रशासन और हरिद्वार रुड़की विकास प्राधिकरण में शिकायतें कर रहे थे। इस सम्बंध में उन्होंने नैनीताल हाईकोर्ट में जनहित याचिका भी दाखिल की थी। इसी कारण भू माफिया और उनसे जुड़े लोग उनसे रंजिश रखने लगे हैं। उनकी ओर से दी गई तहरीर में जिला पंचायत उपाध्यक्ष अमित चौहान और उनके साथियों पर गम्भीर आरोप लगाए गए हैं। गत् 9 फरवरी को हरिद्वार के जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने इस मामले में जांच के आदेश अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) की अध्यक्षता में टीम गठित कर दी।

गौरतलब है कि नब्बे के दशक के अंत में जब हरिद्वार में गंगा नदी के आंचल में मातृ सदन की स्थापना हो रही थी, लगभग उसी समय योग गुरु बाबा रामदेव भी हरिद्वार में अपने पैर जमा रहे थे। तब उन्होंने योग सिखाने के साथ ही भ्रष्टाचार को इतना बड़ा मुद्दा बनाया कि पूरा देश उनके साथ खड़ा हो गया था। एक संयोग ये भी है कि 2011 में जब बाबा रामदेव भ्रष्टाचार के खिलाफ भूख हड़ताल कर रहे, ठीक उसी समय मातृ सदन के स्वामी निगमानंद भी भूख हड़ताल पर थे। बाबा रामदेव दस दिन की भूख हड़ताल के बाद ही पस्त हो गए और उन्हें हिमालयन हाॅस्पिटल में भर्ती करवा दिया गया तो वहीं दूसरी तरफ स्वामी निगमानंद को भी उसी हिमालयन अस्पताल में 115 दिन के अनशन बाद जबरन भर्ती कराया गया था जहां से 13 जून 2011 को बाबा रामदेव स्वस्थ होकर निकले और ठीक इसी दिन स्वामी निगमानंद की मौत हो गई। बाबा रामदेव का आश्रम आज हरिद्वार के सबसे बड़े आश्रमों में से एक है। उनका योग केंद्र आज दुनिया के सबसे बड़े योग केंद्रों में शामिल है और उनके ट्रस्ट का टर्नओवर देश के सबसे बड़े उद्योगपतियों और काॅरपोरेट कम्पनियों को पीछे छोड़ रहा है। स्पष्ट है कि बाबा रामदेव कालेधन और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दे को भी भुला चुके हैं। लेकिन मातृ सदन अभी भी अपने सिद्धांतों पर अडिग है।

इन दिनों मातृ सदन न्यायपालिका में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलनरत है। इस आंदोलन की शुरुआत गत् 28 जनवरी को हुई। इस दिन हरिद्वार के ग्राम नूरपुर पंजनहेडी के खसरा नम्बर 154 और 158 में हो रही अवैध प्लाटिंग की पैमाइश के लिए तहसीलदार और प्रशासनिक अधिकारियों की टीम आई हुई थी। लेकिन वहां दो पक्षों में फायरिंग शुरू हो गई। इसमें मातृ सदन के स्वामी सुधानंद सहित कई लोगों पर मुकदमें दर्ज हुए।
 
हालांकि स्वामी सुधानंद को इस मामले में जमानत मिल चुकी है लेकिन निष्पक्ष जांच कराने तथा जिला जज के द्वारा की गई अमर्यादित टिप्पणियों को लेकर मातृ सदन के संत ब्रह्माचारी आत्मबोधानंद अनशन पर जा बैठे हैं। फिलहाल हरिद्वार के जिला जज नरेंद्र दत्त के खिलाफ किए जा रहे इस अनशन को लेकर मातृ सदन सुर्खियों में आ गया। क्या है इसके पीछे का सच, जानने के लिए थोड़ा पीछे जाना पड़ेगा।

14 जनवरी 2026 को मातृ सदन द्वारा हरिद्वार के जिलाधिकारी तथा हरिद्वार रुड़की विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष को एक पत्र लिखा गया, जिसमें ग्राम नूरपुर पंजनहेड़ी के खसरा संख्या 154 और 158, में अवैध प्लाटिंग की जानकारी दी गई थी। इस सम्बंध में गूगल अर्थ से प्राप्त प्रमाणित छायाचित्र भी उपलब्ध कराए गए थे। गत् 17 जनवरी को हरिद्वार रुड़की विकास प्राधिकरण के सचिव द्वारा हरिद्वार के तहसीलदार और राजस्व अधिकारियों को आदेशित किया गया कि उक्त मामले में तत्काल प्रभाव से एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। बावजूद इसके 27 जनवरी तक इस मामले में कोई रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की गई। इस चलते 27 जनवरी  को मातृ सदन के प्रतिनिधि ब्रह्माचारी सुधानंद तहसीलदार सचिन कुमार से मिले। तत् पश्चात मातृ सदन को बताया गया कि 28 जनवरी 2026 को सुबह 10 बजे जांच के लिए टीम पहुंचेगी।

सूत्रों की मानें तो अकेले हरिद्वार के ग्राम नूरपुर पंजनहेड़ी एवं ग्राम जियापोता में लगभग 100 बीघा आम के बाग अवैध रूप से काटे गए हैं और लगभग 250 बीघा से अधिक कृषि भूमि को  सर्वोच्च न्यायालय एवं उच्च न्यायालय के आदेशों के विरुद्ध गैर-कृषि उपयोग में लाया गया। आरोप है कि यह सब तहसील प्रशासन, जिला प्रशासन एवं उत्तराखण्ड शासन के अधिकारियों की मिलीभगत से किया गया।

वर्तमान प्रकरण में ग्राम नूरपुर पंजनहेड़ी में अमित कुमार पुत्र उदेश कुमार, सचिन कुमार पुत्र उदेश कुमार, नीलिमा पत्नी अमित कुमार, शिवानी पत्नी सचिन कुमार, उषा देवी माता अमित कुमार, मनोज कुमार पुत्र महावीर सिंह आदि द्वारा बड़े पैमाने पर अवैध रजिस्ट्रियां करवाने की बात स्थानीय कह रहे हैं। यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि कई मामलों में भू-उपयोग परिवर्तन के बिना ही रजिस्ट्रियां कर दी गईं तथा हरिद्वार रुड़की विकास प्राधिकरण द्वारा ऐसे नक्शे भी स्वीकृत किए गए जिनमें भू-उपयोग परिवर्तन था ही नहीं। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि इन दोनों ग्रामों में प्राधिकरण द्वारा दी गई स्वीकृतियां सम्बंधित मास्टर प्लान के प्रतिकूल थीं। मातृ सदन द्वारा इस सम्बंध में निरंतर शिकायतें एवं लीगल नोटिस दिए जाते रहे। जिसके परिणामस्वरूप यह निर्णय लिया गया कि अब किसी भी भू-उपयोग परिवर्तन की अनुशंसा हरिद्वार रुड़की विकास प्राधिकरण द्वारा नहीं की जाएगी और यह कार्य शासन स्तर पर ही किया जाएगा।

बावजूद इसके ग्राम नूरपुर पंजनहेड़ी के खसरा संख्या 154 एवं 158  में स्थित 8973 वर्ग मीटर कृषि भूमि का भू-उपयोग परिवर्तन प्राधिकरण की 83वीं बोर्ड बैठक में स्वीकृत किया गया। इतना ही नहीं यहां पर 14 बीघा स्वीकृति की आड़ में 70 बीघा से अधिक भूमि पर अवैध रूप से बागों का कटान कर काॅलोनी विकसित की जा रही थी, जिसकी शिकायत मातृ सदन द्वारा लगातार की गई।

स्वामी का हाथ, चौहान के साथ

हरिद्वार का चौहान बाहुल्य गांव है नूरपुर पंजनहेड़ी। इस गांव में जब ‘दि संडे पोस्ट’ टीम पहुंची तो ग्रामीणों ने जो कुछ बताया उसके अनुसार जिन दो पक्षों में ऊषा टाउनशिप जमीन विवाद पर फायरिंग हुई है वह एक ही परिवार के हैं। जिला पंचायत उपाध्यक्ष अमित चौहान और भाजपा के नेता अतुल चौहान, दोनों चाचा-ताऊ के लड़के हैं। दोनों ही पूर्व में जिला पंचायत का चुनाव लड़ने के लिए अपनी-अपनी दावेदारी कर रहे थे। भाजपा ने जिला पंचायत का अधिकृत प्रत्याशी अमित चौहान को घोषित किया। इसके पीछे हरिद्वार ग्रामीण के पूर्व विधायक स्वामी यतीश्वरानंद का हाथ बताया गया। स्वामी यतीश्वरनानंद की कृपा से अमित चौहान न केवल जिला पंचायत का चुनाव जीतने में सफल हुआ बल्कि वह जिला पंचायत में उपाध्यक्ष भी बनाया गया। चर्चा यह है कि जिस दिन से स्वामी यतीश्वरानांद ने अमित चौहान के सर पर हाथ रखा है तब से उनकी आमदनी दिन दूनी, रात चैगुनी बढ़ी है। देखते ही देखते अमित चैहान बड़े बिल्डर और काॅलोनाइजर बन गए हैं।
 
बात अपनी-अपनी

28 जनवरी की घटना कोई एकांगी घटना नहीं थी। प्रशासन की मौजूदगी में हथियारों से लैस माफियाओं का सरकारी पैमाइश के दौरान हमला करने को तैयार रहना, तहसीलदार सचिन कुमार की स्पष्ट भूमिका जो ब्रह्मचारी सुधानंद को उनके द्वारा किए गए कॉल से स्पष्ट है, घटनास्थल पर प्रशासनिक वाहनों की उपस्थिति के बीच गोलीबारी व हाथापाई तथा घटना के दिन अचानक मातृ सदन को फोन कर दबाव बनाने की चेष्टा करना, यह सब पूर्व नियोजित थीं। मातृ सदन ने इस सम्बंध में समस्त सम्बंधितों के फोन कॉल रिकॉर्ड की जांच की मांग की है। घटना के दिन अतुल चैहान के पास लाइसेंसी पिस्तौल होने से ही उनकी जान बच सकी अन्यथा जान-माल की बड़ी हानि निश्चित थी। पूर्व में भी सचिन  चौहान द्वारा अतुल चैहान पर जानलेवा हमला किया जा चुका है जिसका वीडियो प्रमाण उपलब्ध है। घटना से पूर्व आज तक तहसीलदार सचिन कुमार द्वारा कभी भी मातृ सदन को फोन नहीं किया गया, न कभी किसी मैसेज का जवाब दिया गया, लेकिन घटना के दिन सुबह 10ः21 बजे प्रथम बार तहसीलदार सचिन कुमार ने मातृ सदन को फोन किया और इस बात पर जोर दिया कि यदि आप घटनास्थल पर नहीं आए तो हम अपने मन-मुताबिक रिपोर्ट बनाकर वापस जा रहे हैं। यानी मातृ सदन के प्रतिनिधि पर हथियारों से लैस माफियाओं से जानलेवा हमला करवाने की पूरी तैयारी थी। यह भी विदित हो कि शासन-प्रशासन से जब भी उक्त माफियाओं के सम्बंध में शिकायत की गई तो एक ही बात बार-बार दोहराई गई कि यह स्वामी यतीश्वरानंद का मामला है। मातृ सदन यह स्पष्ट करता है कि घटना को तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत करने से दोषी अधिकारी व माफिया न्याय के चंगुल से बच नहीं सकते।

स्वामी शिवानंद, संरक्षक मातृ सदन

जिस समय त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की प्रक्रिया चल रही थी, उस समय अतुल  चौहान और उनका भतीजा तरुण  चौहान ने भारतीय जनता पार्टी के जिला अध्यक्ष डाॅ जयपाल सिंह चौहान जी के कार्यालय जगजीतपुर पर हमला किया, उनकी गाड़ी को क्षतिग्रस्त भी किया। इनके कुकृत्य का वीडियो भी खूब वायरल हुआ और सभी समाचार पत्रों में खबरें भी आई। इन्होंने हमेशा पार्टी के प्रत्याशी के खिलाफ काम किया। जिला पंचायत चुनाव में टिकट नहीं मिलने पर चुनाव में भी इन्होंने विरोध में काम किया। लेकिन सम्मानित जनता ने जिले में सबसे ज्यादा मतों से जीतने पर पार्टी ने उपाध्यक्ष भी बनवाकर सम्मानित मतदाताओं का सम्मान भी बढ़ाया। आज हर गली-मोहल्ले की सड़कों को सुधार करने का काम किया जा रहा है। मैं मातृसदन संस्था का सम्मान करता हूं लेकिन उन्होंने अपने सिद्धांतों से हटकर राजनीतिक द्वेष रखने वाले और तमाम काॅलोनियों में आरटीआई लगाकर प्राॅपर्टी डीलर को ब्लैकमेल करने वालों का साथ देना दुर्भाग्यपूर्ण है। मातृसदन वाले कभी ढाई, तीन हजार करोड़ की सम्पत्ति अर्जित करने वालों पर आरोप नहीं लगाते, कभी ये सवाल नहीं उठाते कि इतनी सम्पत्ति कहां से आई। उनके बयानों से लगता है कि सुनियोजित तरीके से स्वामी जी और उनके साथ काम करने वालों को बदनाम करने का ठेका लिए हुए हैं। यह चंद खनन माफियाओं की कठपुतली बनकर दूसरों पर आरोप लगाते हैं।

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