Uttarakhand

आधुनिकता की भेंट चढ़ रही रिश्तों की मर्यादा

आधुनिकता की ओर बढ़ते समाज में रिश्तों का सम्मान और रिश्तों की मर्यादाएं भी इस आधुनिकता की भेंट चढ़ रही है। कबीर ने यूं ही नहीं कहा था:

प्राचार्य डॉ प्रेम प्रकाश टम्टा

“गुरु गोविंद दोनों खड़े काके लागों पांव,

बलिहारी गुरु आपने गोविंद दियो बताय। “

लेकिन गुरु-शिष्य परम्परा की पवित्रता की धज्जियां इस पवित्र रिश्ते से जुड़े लोग ही उड़ा रहे है। कुछ ऐसा ही एकवाकया नैनीताल जिले के कोटाबाग स्थिति राजकीय डिग्री कॉलेज के प्राचार्य डॉ प्रेम प्रकाश टम्टा की हरकतों से प्रकाश में आया है। सेवानिवृति की दहलीज पर खड़े प्रेमप्रकाश टम्टा अपनी मर्यादाओं को भूल अपनी बेटियों की उम्र की अपनी ही छात्राओं को अश्लील मैसेज कर बैठे। उनकी इन हरकतों से परेशान पीड़ित छात्राओं ने कालाढूंगी थाने में प्राचार्य के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई। छात्राओं की शिकायत पर पुलिस नेप्राचार्य के विरुद्ध धारा 353 और 504 में मुकद्दमा दर्ज कर लिया है। छात्राओं का आरोप है कि प्राचार्य छात्राओं को वाट्सप पर अश्लील मैसेज भेजते हैं साथ ही फोन पर अभद्र भाषा का प्रयोग करते हैं। प्राचार्य की इस हरकत के बावजूद कुछ लोग ऐसे भी थे जो गुपचुप रूप से प्राचार्य के पक्ष में खड़े थे तथा मामले को दबा देना चाहते थे लेकिन कोटाबाग के कनिष्ठ ब्लॉक प्रमुख और युवा नेता कुलदीप सिंह तड़ियाल के हस्तक्षेप से ये मामला राजनीति की भेंट चढ़ने से बच गया वरना कुछ लोग प्राचार्य की घिनौनी हरकत के बावजूद उन्हें बचाने में लग गए थे। दबाव के बावजूद छात्राओं ने प्राचार्य के खिलाफ थाने में रिपार्ट दर्ज कराने की हिम्मत जुटाई।

 

बताया जाता है कि डॉ प्रेम प्रकाश टम्टा एक वर्ष पूर्व कोटाबाग डिग्री कॉलेज के प्राचार्य बनकर आये थे और छात्राओं को तभी से परेशान कर रहे थे। छात्राएं सामाजिक भय से कुछ कहने से डर रहीं थी। लेकिन प्राचार्य की बढ़ती हरकतों ने छात्राओं को शिकायत करने पर मजबूर कर दिया और कनिष्ठ प्रमुख कुलदीप सिंह तड़ियाल के सक्रिय रूप से सामने आने पर छात्राओं ने हिम्मत जुटाई।मामले को तूल पकड़ता देख निदेशक उच्च शिक्षा डॉ कुमकुम रौतेला ने तीन सदस्यीय जांच समिति बनाई है जिसमें राजकीय महाविद्यालय की डॉ शशिप्रभा शर्मा, रानीखेत महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ हेमा प्रसाद और डॉ एच एस नयाल सहायक निदेशक उच्च शिक्षा शामिल है। इस समिति ने कॉलेज पहुँच कर छात्राओं का पक्ष जाना। इस बीच डॉ प्रेमप्रकाश टम्टा को निदेशालय से सम्बद्ध कर दिया गया है। सामाजिक संगठनों और छात्र संगठनों ने प्राचार्य के विरुद्ध कठोर करवाई की मांग की है। गुरु-शिष्य परम्परा का ऐसा क्षरण कई सवाल खड़े करता है। इस घटना से गुरु जैसे प्रतिष्ठित रिश्ते के प्रति समाज और अभिभावकों का विश्वास तो टूटा ही है साथ ही महाविद्यालय जैसी संस्था के माहौल के प्रति लोगों में सन्देह पैदा किया है।

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