दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल पर ईडी का शिकंजा कसता जा रहा है। जिससे ये कयास लगाए जा रहे हैं कि उन्हें भी अपने साथी नेता मनीष सिसोदिया और संजय सिंह के साथ जेल में रूम शेयर करना पड़ सकता है। ऐसे में ‘आप’ के नेताओं का कहना है कि अगर उनके लीडर को जेल में डाला जाएगा तो वहीं से सरकार चलेगी। अब सवाल यह है कि क्या जेल जाने की दशा में अरविंद केजरीवाल मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बने रहेंगे या उनको इस्तीफा देना पड़ेगा? जिसके चलते यह मुद्दा देशभर में चर्चा का विषय बन गया है।
देश की राजनीति में ऐसा पहली दफा नहीं है जब किसी राज्य के मुख्यमंत्री की गिरफ्तारी होने के आसार नजर आ रहे हों। इससे पहले भी चार मुख्यमंत्री इस दौर से गुजर चुके हैं जिनमें से कुछ गिरफ्तार हुए तो कुछ जांच के दौरान ही पकड़े गए। हालांकि गिरफ्तारी के चर्चाओं के बीच सभी मुख्यमंत्रियों ने जेल जाने से पहले इस्तीफा दे दिया था।
वर्ष 1997 में चारा घोटाले में जब सीबीआई ने अपनी चार्जशीट दाखिल की तो लालू यादव का नाम भी उसमें था। उस समय लालू यादव बिहार के मुख्यमंत्री थे। तब लालू ने गिरफ्तार होने के आसार के चलते अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। लालू यादव के इस्तीफे के बाद उनकी जगह पत्नी राबाड़ी देवी मुख्यमंत्री बनीं। राबाड़ी देवी को सीएम बनाने पर उस समय बहुत बड़ा बवाल खड़ा हो गया था जिसके चलते जनता दल में दरार आई। इसके बाद लालू यादव ने अपनी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल की स्थापना की और पार्टी के अध्यक्ष बने।
ऐसा ही वर्ष 2011 में भी देखने को मिला। जब कर्नाटक राज्य के लोकायुक्त की एक रिपोर्ट में सीएम ऑफिस को अवैध उत्खनन मामले में जुड़ा पाया गया था। उस समय कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा हुआ करते थे। राज्य में बीजेपी की सरकार थी।
लोकायुक्त की रिपोर्ट जब सीबीआई के पास गई तो बीजेपी ने येदियुरप्पा पर इस्तीफा देने का दबाव बनाया। उस समय कर्नाटक में बीजेपी के अध्यक्ष का कार्यभार नितिन गडकरी संभाल रहे थे। मीडिया रेपोर्ट्स के अनुसार गडकरी ने येदयुरप्पा को कुर्सी छोड़ कर इस्तीफा देने को कह दिया था। लेकिन, येदियुरप्पा कुर्सी छोड़ने को तैयार नहीं थे जिसके बाद
बीजेपी के राष्ट्रीय नेताओं ने उनको हटाने का फैसला लिया। यही कारण है कि येदियुरप्पा को न चाहते हुए भी इस्तीफा देना पड़ा था। इस्तीफे के कुछ ही दिन बाद येदियुरप्पा को जेल की हवा खानी पड़ी। उनके इस्तीफे के बाद बीजेपी ने डीवी सदानंद गौड़ा को कर्नाटक का नया मुख्यमंत्री बनाया।
तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता जयराम को भी जेल जाने की वजह से इस्तीफा देना पड़ा था। साल 2014 में जयललिता पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे जिसके बाद मामला कोर्ट में चला गया था, जहां कोर्ट ने आय से अधिक संपत्ति होने के मामले में जयललिता को दोषी करार दिया था। अदालत से फैसला आने के कुछ ही समय बाद जयललिता ने ओ पनीरसेल्वम को तमिलनाडु का नया सीएम बनाया। पनीरसेल्वम ने बतौर सीएम 72 दिनों तक तमिलनाडु का कार्यभार संभाला। जिसके बाद एडप्पडी के. पलानीस्वामी सीएम बनाए गए। जयललिता 20 दिनों तक जेल में रहीं। यह पहला किस्सा नहीं था जब जयललिता को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा हो। वर्ष 2001 में भी एक घोटाले में उनका नाम उछला था, जिसके बाद उनको कुर्सी छोड़नी पड़ी थी। जयललिता को तांसी भूमि सौदा मामले में दोषी पाया गया था जिसके चलते उन्हें जेल की हवा खानी पड़ी थी।
मध्य प्रदेश में दो दशक तक राज करने के बाद दिग्विजय सिंह को 2003 में बीजेपी ने सत्ता से बेदखल करके उमा भारती को मुख्यमंत्री बनाया था। कर्नाटक हाई कोर्ट के एक वारंट ने उमा को ज्यादा दिनों तक सीएम की कुर्सी पर बैठने नहीं दिया। भारती केवल 9 माह तक मुख्यमंत्री रहीं। गिरफ्तारी का फैसला आते ही बीजेपी ने उमा भारती पर इस्तीफे का दबाव बनाया और उन्हें यह भरोसा दिया कि उनके करीबी को मुख्यमंत्री बनाया जाएगा जिसके बाद उमा को कुर्सी छोड़नी पड़ी। उमा के इस्तीफे के बाद बाबूलाल गौर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री बने।
राजनीतिक विशेषज्ञों की मानें तो संविधान में यह कहीं भी नहीं लिखा है कि जेल जाने से पहले मुख्यमंत्री को इस्तीफा देना पड़ता है। राज्य के सीएम को पद से हटाने का अधिकार प्रदेश के राज्यपाल को होता है। राज्यपाल बहुमत न होने पर और संवैधानिक अराजकता नजर आने पर ही राज्य के सीएम को बर्खास्त कर सकता है। जेल से सरकार चलाना अधिकतर, फिल्मों में ही देखा गया है। अब अगर सीएम केजरीवाल को जेल जाना पड़ा तो यह उनके और उनकी पार्टी के ऊपर निर्भर करेगा कि आगे किस प्रकार की रणनीति से काम किया जाएगा।

