Uttarakhand

टीनशेड में भविष्य गढ़ते नौनिहाल

रामनगर का राजकीय प्राथमिक विद्यालय कंजर पड़ाव उत्तराखण्ड के शिक्षा विभाग के तमाम दावों की पोल खोलता नजर आता है। जर्जर हालात, सीमित संसाधन और उपेक्षा के बीच कमजोर आर्थिक पृष्ठभूमि के बच्चे मेहनत के दम पर शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं लेकिन विडम्बना यह है कि क्षेत्रीय विधायक मंदिर निर्माण के लिए निधि देने में तत्पर दिखते हैं जबकि ‘शिक्षा के मंदिर’ की सुध लेने वाला कोई नहीं


उत्तराखण्ड सरकार शिक्षा व्यवस्था को सुधारने के भले ही बड़े-बड़े दावे करती हो, जमीनी हकीकत लेकिन ठीक उलट है। नैनीताल जिले के रामनगर का राजकीय प्राथमिक विद्यालय कंजर पड़ाव तमाम सरकारी दावों की पोल खोल देता है। रामनगर शहर के बीचों-बीच बने इस विद्यालय में बच्चे खुले टीनशेड के नीचे पढ़ने के लिए मजबूर हैं। जिस टीनशेड के नीचे बच्चे पढ़ रहे हैं, वह कब गिर जाए इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है। स्कूल की दीवारें खोखली और कमरे जर्जर हो चुके हैं। भवन में बने कमरों की दीवारें बेहद कमजोर हैं। छत से प्लास्टर टूटकर नीचे गिर रहा है। ऐसे में यहां पढ़ने वाले बच्चे हर समय खौफ के साए में रहते हैं। प्रधानाचार्य ने बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए उन्हें जर्जर कमरों में नहीं बैठाकर बाहर खुले आसमान के नीचे पढ़ाना शुरू कर दिया है।

वर्ष 2005 से शिक्षा गारंटी केंद्र के रूप में संचालित यह विद्यालय वन विभाग की जमीन पर 2007 में बनाया गया था। यहां कक्षा एक से पांच तक के कुल 38 बच्चे हैं और इन बच्चों पर सिर्फ एक अध्यापक। बच्चे जहां पढ रहे हैं वहां गाड़ियों का शोर है, अराजक तत्वों का जमवाड़ा है। सर्दियों में शीतलहर, गर्मियों में तपती लू और बरसात में टीन के नीचे बैठे बच्चों की पीड़ा शायद हुक्मरानों को नहीं सुनाई देती है। जहां स्कूल है वहीं झाड़ियों का झुरमुट है, वहां सांप-बिच्छू का भय बना रहता है। इन तमाम अभावों के बावजूद स्कूल के कई बच्चे जिला स्तर प्रतियोगिताओं में पुरस्कार जीत चुके हैं। अलग-अलग कक्षाएं संचालित करने के लिए कमरों के निर्माण को लेकर कोई बजट न होने व अफसरों की अनदेखी की वजह से भी प्रधानाध्यापक तारा चंद्र खुले में टीन शेड के नीचे गरीब समुदाय के बच्चों का भविष्य संवार रहे हैं।

वो बताते हैं कि ‘‘2005 से मैं यहां कार्यरत हूं, तब से यहां पढ़ने वाले सभी बच्चों का रिजल्ट प्राइवेट स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की तुलना में कई गुना अच्छा रहता है।’’ उनके द्वारा कई बार स्थानीय विधायक, अन्य जनप्रतिनिधियों, शिक्षा विभाग के अनेकों उच्च अधिकारियों को इस सम्बंध में अवगत कराया गया है लेकिन सुध लेने वाला कोई नहीं है। आलम ये है कि बरसात के मौसम में टीनशेड से टपकते पानी का बचाव करने के लिए बच्चों को छाता लेकर बैठना पड़ता है।

यहां अध्यनरत छात्र-छात्राओं ने बताया कि ‘‘गर्मी के मौसम में टीनशेड तपता है जिस कारण बहुत गर्मी लगती है क्योंकि कोई पंखा भी नहीं है। ठंड के मौसम में चारों तरफ से खुले स्थान में बैठकर पढ़ाई करना बहुत मुश्किल होता है। स्कूल में कोई शौचालय न होने से छोटे बच्चे खुले में शौच करने को मजबूर हैं जिससे स्कूल के आस-पास इस कदर गंदगी है कि बच्चे आए दिन बीमार भी पड़ जाते हैं।’’

उन्होंने बताया कि जहां उनकी कक्षाएं संचालित होती हैं वो प्रांगण चारों तरफ से खुला है जिसमें रोड पर चलते वाहनों, अनेकों गतिविधियों के होने से पढ़ाई करने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। पीने के पानी के उचित इंतजाम न होने से कई बार प्यासा भी रहना पड़ता है, इन सब मूलभूत सुविधाओं के अभाव में अपना अध्ययन कर रहे अत्यंत आर्थिक रूप से पिछड़े परिवारों के नौनिहाल पढ़ाई में शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं। कई बच्चों की लेख, पेंटिंग इतनी खूबसूरत है कि मोटी फीस वाले बड़े प्राइवेट स्कूलों के बच्चों को टक्कर दे रहे हैं। पढ़ाई की लग्न व सीखने की चाह रखने वाले इन बच्चों की रुचि केवल पढ़ाई तक ही सीमित नहीं है, कई बच्चे गायन, खेल व सभी प्रकार के सांस्कृतिक कार्यक्रम में भी अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं।
 
मंदिर बनाने में व्यस्त विधायक

प्राइमरी स्कूल कंजर पड़ाव के समीप एक मंदिर है जिसकी मरम्मत, मंदिर कक्ष के निर्माण कार्य का खर्चा विधायक निधि से हो रहा है। इसके लिए लगभग 5 लाख की धनराशि आवंटित हुई है। एक तरफ शिक्षा के मंदिर की दुर्दशा हो रही है, वहीं दूसरी तरफ मंदिर कक्षों का निर्माण हाईटेक रूप से किया जा रहा है।
 
असामाजिक तत्व करते हैं माहौल खराब

स्कूल के प्रधानाचार्य के अनुसार आस-पास रहने वाले असामाजिक तत्व स्कूल के खंडहर रसोई घर से कई बार राशन अन्य चीजों को चोरी करके ले जा चुके हैं। ऐसी स्थिति में समान के साथ-साथ बच्चे भी असुरक्षित हैं। खुले प्रांगण में चल रही कक्षाओं के बीच में कभी नशेड़ियों की हरकतों, गाड़ियों के शोरगुल से बच्चों की पढ़ाई भी काफी हद तक प्रभावित हो रही है। विद्यालय परिसर में रात में जहां-तहां फेकी गई शराब की बोतलें इसका प्रमाण हैं। हर रोज विद्यालय आने वाले छात्रों को पहले इसकी सफाई करनी पड़ती है और उसके बाद ही उनकी पढ़ाई शुरू हो पाती है। कुछ असमाजिक तत्वों द्वारा खंडहर पड़े स्कूल के रसोई घर की दीवारों पर अभद्र भाषा लिखकर दीवार को गंदा किया जाता है।

प्रधानाचार्य तारा चन्द्र कहते हैं कि ‘‘विद्यालय परिसर को असामाजिक तत्वों की अड्डेबाजी से बचाने के लिए कई बार शासन स्तर तक भी कमरों के निर्माण व अन्य चीजों की फाइले पहुंचाने का कार्य किया गया लेकिन अभी तक कुछ सार्थक हुआ नहीं है।’’ वे खेद जताते हुए कहते हैं कि विद्यालय की स्थिति काफी खराब है। फिर भी इस पर स्थानीय जनप्रतिनिधियों का ध्यान नहीं जाता है। जल्द यदि इस पर कोई कार्यवाही नहीं हुई तो यहां दुर्घटना की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

बात अपनी-अपनी

विद्यालय का मामला मेरे संज्ञान में है। यह वन भूमि पर स्थित है इसलिए पक्का निर्माण वन विभाग से भूमि हस्तांतरण के बाद ही सम्भव  है।

दीवान सिंह बिष्ट, विधायक, रामनगर

प्राथमिक विद्यालय कंजर पड़ाव की स्थिति अच्छी है, बच्चों की संख्या और शैक्षिक प्रदर्शन दोनों उत्कृष्ट हैं लेकिन वन भूमि पर होने के कारण निर्माण कार्य नहीं हो पा रहा है। जिला प्रशासन को पत्र लिखा गया है, वन विभाग की अनापत्ति प्रमाण पत्र के बिना निर्माण सम्भव नहीं है। यही समस्या वन विभाग के 31 खत्तों के अर्धस्थायी आवासों में भी है जहां शौचालय, क्रीड़ा प्रांगण, क्लासरूम नहीं बन पा रहे हैं।

हवलदार प्रसाद, खण्ड शिक्षा अधिकारी, रामनगर

सरकार के नियंत्रण में होने के कारण, भारत सरकार को प्रस्ताव भेजना होगा। देहरादून में नोडल अधिकारी हैं जो इस पर कार्रवाई कर सकते हैं। एजुकेशन के लिए प्राथमिकता है, इसलिए वन भूमि स्थानांतरण का प्रस्ताव बनाना होगा। अनापत्ति प्रमाण पत्र देने का अधिकार नहीं है लेकिन प्रस्ताव बनाकर भेजने से कार्रवाई हो सकती है।

ध्रुव मर्तोलिया, डीएफओ, कोसी रेंज रामनगर

मेरे द्वारा 2005 से विद्यालय में सेवा दी जा रही है। विद्यालय के निर्माण को लेकर 137 पन्नों की फाइल तैयार कर विभागों तक पहुंचा दी गई है, पर कोई कार्यवाही नहीं हुई है। जिला प्रशासन स्तर पर सुनवाई न होना और असामाजिक तत्वों द्वारा माहौल खराब करने की कोशिश प्रशासनिक ढिलाई को दर्शाता है। यह गरीब बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है, जिस पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है।

तारा चन्द्र, प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय कंजर पड़ाव, रामनगर

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