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दो बड़ी वेबसीरीज और दर्शकों का फैसला

फिल्म ‘फैमिलीमैन-3’ के प्रमोशन के दौरान मनोज वाजपेयी फिल्म ‘महारानी-4’ के एक दृश्य में हुमा कुरैशी
‘महारानी’ सीजन 4 (सोनीलीव) को दर्शकों से उम्मीद से बेहतर प्रतिक्रिया मिली जबकि ‘द फैमिली मैन’ सीजन 3 (अमेजन प्राइम वीडियो) पर लोगों की राय बंटी नजर आई। एक तरफ दमदार अभिनय की तारीफ तो दूसरी ओर कहानी की धीमी रफ्तार और कमजोर क्लाइमैक्स की आलोचना ने दोनों सीरीज के अगले सीजन की तैयारियों को लेकर कलाकारों ने सकारात्मक संकेत दिए हैं


पिछले कुछ हफ्तों में ओटीटी प्लेटफार्म्स पर दो ऐसी वेब सीरीज रिलीज हुईं जिनका इंतजार लम्बे समय से था। ‘महारानी’ सीजन 4, जो सोनीलीव पर आई और ‘द फैमिली मैन’ सीजन 3 जो अमेजन प्राइम वीडियो पर जारी हुई। दोनों ही अलग-अलग धाराओं की कहानियां हैं। एक भारत की राजनीति की नब्ज टटोलती सीरीज है, दूसरी एक जासूसी दुनिया में उलझे एक साधारण से परिवार का दिखने वाले अफसर की कहानी। दोनों सीरीज का अपना अलग दर्शक वर्ग है, अपनी अलग विरासत है और दोनों ने ही पहले के सीजनों में एक मजबूत स्तर स्थापित किया था। इसीलिए जब ये नए सीजन रिलीज हुए तो दर्शकों की नजर स्वाभाविक रूप से इन पर टिक गई। लेकिन दोनों सीरीज पर दर्शकों ने कैसा फैसला सुनाया? क्या लोगों ने इन्हें पसंद किया, क्या इनसे उनकी उम्मीदें टूटीं या फिर पहले की तरह सराहना का सिलसिला जारी रहा? और सबसे महत्वपूर्ण कि क्या इनका अगला सीजन आएगा?

‘महारानी’ का चौथा सीजन रिलीज होते ही सोशल मीडिया पर इसकी चर्चा शुरू हो गई। पिछले तीन सीजनों ने अपनी राजनीति केंद्रित कहानी और हुमा कुरैशी के सशक्त अभिनय की वजह से इस शो को लगातार चर्चा में रखा था। चौथे सीजन के आने से पहले भी दर्शकों की उम्मीद थी कि कहानी अब और गहरी होगी और शक्ति संघर्ष और तीखा होगा। रिलीज के साथ ही शुरुआती प्रतिक्रियाओं ने साफ कर दिया कि शो ने अपना प्रभाव इस बार भी बरकरार रखा है। दर्शक और समीक्षक, दोनों, खास तौर पर हुमा कुरैशी के अभिनय की तारीफ कर रहे हैं कि इस बार वह और भी अधिक आत्मविश्वास और नियंत्रण में दिखती हैं। राजनीति, अपराध, सत्ता और व्यक्तिगत रिश्तों के बीच जिस तरह कहानी घूमती है, वह दर्शकों को आकर्षित करती है। कई दर्शकों ने इसे अब तक का सबसे मजबूत सीजन बताया, खासकर इस वजह से कि कहानी का दायरा पटना और बिहार से निकलकर बड़े राजनीतिक मंच पर पहुंचने लगा है।

हालांकि आलोचना भी कुछ हिस्सों में दिखाई दी। फिल्म समीक्षकों का मानना है  कि कुछ एपिसोड धीमे हैं, कहानी कुछ जगहों पर खिंचती हुई महसूस होती है और राजनीति के कई मोड़ एक समान पैटर्न दोहराते दिखते हैं। लेकिन इन कमियों के बावजूद सीजन का समग्र प्रभाव सकारात्मक रहा। सोशल मीडिया पर हैशटैग ‘महारानी 4’ ट्रेंड करता रहा और दर्शकों ने इसे एक जरूरी राजनीतिक थ्रिलर के रूप में स्वीकार किया। यह साफ दिखाई दिया कि शो की लोकप्रियता अभी भी स्थिर है और इसके चरित्र, संवाद और राजनीतिक टकराव इसके मुख्य आकर्षण बने हुए हैं।

उधर अमेजन प्राइम वीडियो पर रिलीज हुआ ‘द फैमिली मैन’ सीजन 3 एक बिल्कुल अलग प्रवाह की कहानी समेटे हुए आया। मनोज वाजपेयी इस शो के चेहरे हैं और एक साधारण से दिखने वाले लेकिन बेहद कुशल इंटेलिजेंस अधिकारी श्रीकांत तिवारी का किरदार अब भारतीय ओटीटी का प्रतीक बन चुका है। इसीलिए तीसरे सीजन को लेकर उत्सुकता बहुत ज्यादा थी। रिलीज के साथ ही पहले दिन से सोशल मीडिया पर तेज बहस शुरू हो गई। एक बड़ा वर्ग ऐसा था जिसने मनोज बाजपेयी के अभिनय को फिर से बेहतरीन कहा और शो के कई तनावपूर्ण दृश्यों, जांच-पड़ताल वाले हिस्सों और टीम-डायनामिक्स को सराहा। कई दर्शकों ने कहा कि शो का एक्शन अब पहले से ज्यादा यथार्थवादी लगता है और जासूसी की दुनिया को दिखाने में विस्तार बढ़ा है। लेकिन इसके साथ ही आलोचना की एक बड़ी लहर भी सामने आई। बहुत से दर्शकों ने कहा कि कहानी इस बार उतनी कसी हुई नहीं है, जितनी पहले दो सीजनों में थी। खासकर क्लाइमैक्स को लेकर लोगों ने निराशा जताई है। अधिकांश दर्शकों का कहना था कि कहानी कुछ महत्वपूर्ण मोड़ों पर अधूरी छूटती है, कुछ किरदारों की यात्रा पूरी तरह सार्थक तरीके से बंद नहीं होती और अंतिम एपिसोड में वह निश्चितता नहीं दिखाई देती जिसकी उम्मीद ‘द फैमिली मैन’ जैसे मजबूत ब्रैंड से रहती है। कुछ समीक्षकों ने इसे ‘कमजोर’ सीजन बता रहे हैं जहां अभिनय तो दमदार है लेकिन कहानी अपनी ताकत और गहराई को पूरी तरह पकड़ नहीं पाती।

फिर भी  इन मिश्रित प्रतिक्रियाओं का यह मतलब बिल्कुल नहीं कि शो की लोकप्रियता कम हो गई है। इसके विपरीत, दर्शकों की आलोचना ही यह साबित करती है कि इस शो से अपेक्षा कितनी बड़ी है। तीन सीजन के बाद भी ‘द फैमिली मैन’ के अगले सीजन को लेकर उत्सुकता बताती है कि दशकों में इसकी क्रेज बनी हुई है। जो दर्शक कहानी से निराश हुए, वे भी अभिनय, टेक्निकल काम और शो की पहचान को लेकर सकारात्मक थे।
अब सवाल यह है कि इन दोनों सीरीज का अगला सीजन कब आएगा? खबरों की मानें तो ‘महारानी’ सीजन 5 की तैयारियां अनौपचारिक तौर पर शुरू मानी जा रही हैं। कई इंटरव्यू में कलाकारों ने इशारा दिया है कि कहानी की यात्रा अभी खत्म नहीं हुई है और आगे का विस्तार तय है। इंडस्ट्री रिपोर्ट्स का अनुमान है कि इसका अगला सीजन 2026 के अंत तक आ सकता है, हालांकि आधिकारिक घोषणा अभी नहीं हुई है। लेकिन जिस तरह से सीजन 4 को दर्शकों ने स्वीकार किया है, यह लगभग तय माना जा रहा है कि इसका अगला अध्याय आएगा ही।
दूसरी ओर ‘द फैमिली मैन’ सीजन 4 को लेकर स्थिति और भी स्पष्ट है। मनोज बाजपेयी ने खुद कई बार कहा है कि कहानी में बहुत से सवाल अब भी अनसुलझे हैं और अगला सीजन इनका समाधान लाएगा। शो के निर्माता राज और डीके की टीम भी आगे की कहानी पर काम कर रही है, और उम्मीद की जा रही है कि 2026-27 के बीच नया सीजन आ सकता है। ‘द फैमिली मैन’ वह दुर्लभ भारतीय वेबसीरीज है जिसने शुरुआत से ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है और इसकी लोकप्रियता को देखते हुए प्लेटफार्म इसे आसानी से खत्म नहीं करेगा।

इन दोनों सीरीज की तुलना अगर पत्रकारिता की भाषा में करें तो यह साफ दिखता है कि जहां ‘महारानी’ अपने राजनीतिक स्वरूप के कारण बढ़ती परिपक्वता की राह पर है, वहीं ‘द फैमिली मैन’ अपनी जासूसी कथा में नई चुनौतियों से जूझ रहा है। एक तरफ महारानी परिपक्व राजनीतिक ड्रामा बन चुकी है, वहीं दूसरी तरफ ‘द फैमिली मैन’ का संघर्ष यह है कि उसने पहले दो सीजनों में जो ऊंचा स्तर स्थापित किया, उसे बनाए रखना आसान नहीं है। फिर भी दोनों सीरीज भारतीय ओटीटी के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं और अलग-अलग श्रेणियों में मानक स्थापित करने का काम करती हैं।

दर्शकों की पसंद आखिरकार इस बात पर निर्भर रहती है कि वे किस तरह की कहानी चाहते हैं। अगर उन्हें राजनीति, सत्ता संघर्ष और नेतृत्व की जटिलताओं वाली कहानी चाहिए तो ‘महारानी’ उनका पहला चुनाव हो सकती है। अगर वे तनाव, एक्शन, जासूसी और परिवार के बीच फंसे एक अधिकारी की मनोवैज्ञानिक यात्रा देखना चाहते हैं तो ‘द फैमिली मैन’ उनकी पसंद बनेगी। दोनों का अपना अलग स्वाद है और दोनों ही भारतीय मनोरंजन उद्योग के लिए मूल्यवान हैं।

सबसे दिलचस्प बात यह है कि दोनों सीरीज अपने-अपने संसार में आगे बढ़ने के लिए तैयार दिखती हैं। दर्शकों की प्रतिक्रियाएं चाहे मिली-जुली हों या सकारात्मक, लेकिन दोनों सीरीज में वह जादू अब भी मौजूद है जो भारतीय ओटीटी प्लेटफॉर्म्स को लगातार मजबूत बना रही है। इसीलिए उम्मीद है कि अगले साल या उससे आगे, इन दोनों कहानियों का अगला अध्याय नई चालों, नए संघर्ष, नई चुनौतियां और नई बहसों को लेकर फिर दर्शकों के सामने होगा।

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