Uttarakhand

भीमताल में कई नेता ठोक रहे हैं ताल

उत्तराखण्ड विधानसभा चुनाव में अब एक वर्ष से भी कम का समय बचा है जिसके चलते विभिन्न राजनीतिक दलों के दावेदारों ने अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के लिए आगामी चुनाव चुनौती के रूप में सामने है। इसी जद्दोजहद के बीच दावेदारों की सक्रियता के चलते राजनीतिक माहौल गर्माने लगा है। नैनीताल जिले की भीमताल विधानसभा सीट भी इस माहौल से अछूती नहीं है। यहां मुख्य मुकाबला कांग्रेस और भाजपा के बीच ही माना जा रहा है लेकिन इस बार उत्तराखण्ड क्रांति दल की सक्रियता भी देखी जा रही है

वर्ष 2008 के परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई भीमताल विधानसभा सीट का अधिकांश हिस्सा पहले धारी विधानसभा में आता था। उस वक्त धारी विधानसभा सीट पहाड़ के साथ मैदानी क्षेत्र को भी कवर करती थी लेकिन अब भीमताल विधानसभा सीट में पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्र ही आता है। धारी विधानसभा क्षेत्र का अस्तित्व खत्म होने के बाद इसका एक बड़ा हिस्सा भीमताल और मैदानी क्षेत्र से लगने वाला हिस्सा लालकुआं और कालाढूंगी विधानसभा सीटों में जोड़ दिया गया। धारी विधानसभा क्षेत्र के समय 2002 में यहां से हरीशचंद्र दुर्गापाल और 2007 में गोविंद सिंह बिष्ट विधायक चुने गए थे। 2012 में भीमताल विधानसभा के लिए पहली बार चुनाव हुआ जिसमें भारतीय जनता पार्टी ने खण्डूड़ी सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे गोविंद सिंह बिष्ट जो उस वक्त टिकट के प्रबल दावेवार थे, का टिकट काट कर किसान नेता युवा दान सिंह भण्डारी को अपना उम्मीदवार बनाया। उस वक्त दान सिंह भण्डारी ने बहुजन समाज पार्टी के मोहन पाल को हराया था। कांग्रेस के राम सिंह कैड़ा तीसरे स्थान पर रहे थे। 2017 के विधान सभा चुनावों में राजनीतिक परिदृश्य बदला हुआ था। 2016 की राजनीतिक उथल- पुथल के चलते विधानसभा में शक्ति परिक्षण के दौरान भाजपा के भीमताल विधायक दान सिंह भण्डारी कांग्रेस के पक्ष में खड़े दिखाई दिए और हरीश रावत की सरकार को बचाने के तोहफे के रूप में उन्हें 2017 में कांग्रेस का उम्मीदवार बनाया गया तो भाजपा के प्रत्याशी गोविंद सिंह बिष्ट थे और राम सिंह कैड़ा ने कांग्रेस से बगावत कर निर्दलीय चुनाव लड़ा। इन चुनावों में राम सिंह कैड़ा ने 18878 वोट पाकर जीत हासिल की जबकि गोविंद सिंह बिष्ट दूसरे स्थान पर रहे। दान सिंह भण्डारी को तीसरे नम्बर पर संतोष करना पड़ा। 2022 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले रामसिंह कैड़ा भाजपा में शामिल हो गए। भाजपा ने भीमताल से राम सिंह कैड़ा को अपना उम्मीदवार बनाया जबकि दान सिंह भण्डारी कांग्रेस के प्रत्याशी बन मैदान में उतरे। इन चुनावों में भीमताल विधानसभा में भाजपा के अंदर बगावत का वो दौर दिखा जिसकी उम्मीद भाजपा के अंदर नहीं की जाती। पूर्व जिलाध्यक्ष मनोज साह और रामगढ़ के ब्लाॅक प्रमुख लाखन सिंह नेगी बागी प्रत्याशी के रूप में खड़े हो गए लेकिन रामसिंह कैड़ा भाजपा के टिकट पर जीतने में सफल रहे। भाजपा के बागियों ने कैड़ा के मत प्रतिशत विशेष असर नहीं डाला। इस बार रामसिंह कैड़ा की जीत का अंतर लगभग 10 हजार था। उन्होंने कांग्रेस के दान सिंह भण्डारी को हराया।

भीमताल विधानसभा सीट पर कांग्रेस कभी भी मजबूत स्थित में नहीं रही है। भीमताल विधानसभा के अस्तित्व में आने के बाद यहां दो बार भारतीय जनता पार्टी काबिज रही है। एक बार निर्दलीय के तौर पर राम सिंह कैड़ा चुने गए और दूसरी बार उन्होंने भाजपा प्रत्याशी के तौर पर जीत दर्ज की। अब 2027 विधानसभा चुनाव के मद्देनजर तमाम राजनीतिक दलों के दावेदार सक्रिय हो गए हैं। भारतीय जनता पार्टी की बात करें तो यहां वर्तमान में धामी सरकार में कैबिनेट मंत्री राम सिंह कैड़ा पर कोई बड़ा खतरा नजर नहीं आता। उनका मुख्यमंनी पुष्कर सिंह धामी से बेहतर तालमेल है और अपने क्षेत्र में जमीनी पकड़ उनकी दावेदारी को पुख्ता करती है। अपने सिटिंग विधायक के इतर भाजपा नया प्रत्यागी खोजने का जोखिम उठाएगी ऐसा लगता नहीं है। साथ ही एक कैबिनेट मंत्री का टिकट काटना भी भाजपा के लिए आसान नहीं होगा।
पूर्व मुख्यमंत्री भुवनचन्द्र खण्डूड़ी और रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ की सरकार में शिक्षा मंत्री रहे गोविंद सिंह बिष्ट भी इस बार दावेदारों में शुमार हैं। पूर्व में धारी विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए गोविंद सिंह बिष्ट का कहना है कि उनके द्वारा अपने कार्यकाल में भीमताल क्षेत्र में विकास के कार्य बड़े स्तर पर करवाए थे और भीमताल विधानसभा क्षेत्र की जनता उनको एक बार फिर भीमताल से विधायक देखना चाहती है। वो इस बात से इत्तेफाक नहीं रखते कि कैबिनेट मंत्री का टिकट काटना आसान नहीं है।  वे स्वयं का उदाहरण देते हैं कि जब उनका टिकट 2012 में काटा गया तो उस वक्त वो भी खण्डूड़ी सरकार में मंत्री थे अगर 2012 में बलवंत सिंह भौर्याल और खजान दास को भी पार्टी ने टिकट नहीं दिया था जबकि वो दोनों कैबिनेट मंत्री थे। 2012 में भाजपा के टिकट पर चुने गए दान सिंह भंडारी भी भीमताल विधानसभा क्षेत्र से भाजपा से टिकट की दावेदारी की दौड़ में शामिल हैं। 2016 में हरीश रावत की सरकार पर आए संकट के दौरान उन्होंने भाजपा छोड़कर कांग्रेस का साथ दिया था। हालांकि 2017 और 2022 में वो  विधानसभा चुनावों में कांग्रेस से चुनाव लड़े थे लेकिन उन्हें जीत हासिल नहीं हुई। इस बार वो भाजपा से दावेदारी के मूड में है। इस बीच भीमताल विधानसभा क्षेत्र से जिला पंचायत सदस्य हेमा भट्ट के पति कमलेश भट्ट जो कि सांसद अजय भट्ट के खास लोगों में शुमार हैं,  2027 के विधानसभा चुनाव में भीमताल से सशक्त दावेदार के रूप में उभर कर सामने आए हैं। पिछले पंचायत चुनावों में कमलेश भट्ट की पत्नी हेमा भट्ट ने जिला पंचायत सदस्य के चुनाव में भाजपा की अधिकृत प्रत्याशी भावना रजवार को हराया था लेकिन फिलहाल भाजपा के अन्य दावेदारों के मुकाबले रामसिंह कैड़ा का पड़ला भारी नजर आता है।
कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती इस सीट को अपनी झोली में डालने की है क्योंकि इस सीट पर कांग्रेस अपना खाता अभी तक नहीं खोल पाई है। 2012 से 2017 तक उसको दूसरे या तीसरे नम्बर पर ही संतोष करना पड़ा है। इस बार भी उसके लिए जीतने से ज्यादा चुनौती प्रत्याशी चयन में है क्योंकि रामगढ़ के पूर्व ब्लाॅक प्रमुख लाखन सिंह नेगी के कांग्रेस में शामिल होने के बाद कांग्रेस के अंदरूनी समीकरण गड़बड़ा गए हैं। वैसे भी रामसिंह कैड़ा के भाजपा में शामिल होने के बाद कांग्रेस के पास कोई ऐसा दमदार नहीं चेहरा नहीं था जो उसे भीमताल विधानसभा सीट जितवा सके।
कांग्रेस नेता हरीश पनेरू राज्य आंदोलनकारी रहे हैं और वे जनता की समस्याओं को लेकर अक्सर आंदोलन करते देखे जा सकते हैं। इस बार  वे कांग्रेस के प्रबल दावेदारों में से एक हैं। हरीश पनेरू लम्बे समय से भीमताल विधानसभा के हर क्षेत्र और ब्लॉक में देखे जा रहे हैं। उनका कहना है कि जो लम्बे समय से जमीन पर कांग्रेस के लिए संघर्ष कर रहे हैं पार्टी को उनमें से ही प्रत्याशी का चयन करना चाहिए। राकेश बृजवासी भी अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं। वरिष्ठ कांग्रेसी नेता गोपाल सिंह बिष्ट ने भी अपनी दावेदारी कांग्रेस से की है लेकिन लाखन सिंह नेगी के कांग्रेस में आने के बाद यहां समीकरण कुछ बदले हैं। जिला पंचायत नैनीताल के अध्यक्ष पद के चुनाव में जिस प्रकार अराजकता का माहौल रहा और जिस प्रकार लाखन सिंह नेगी की पत्नी पुष्पा नेगी के पक्ष के जिला पंचायत सदस्यों का कथित अपहरण हुआ उसने नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य और लाखन सिंह नेगी को करीब ला दिया है। 2022 में लाखन सिंह नेगी भाजपा से बगावत कर निर्दलीय चुनाव लड़े थे और 12 हजार के लगभग वोट लाए थे। अगर कांग्रेस उन्हें अपना प्रत्याशी बनाती है तो मुकाबला दिलचस्प होने की सम्भावना है बशर्ते कांग्रेस अपने यहां बगावत थाम सके। उत्तराखण्ड क्रांति दल से उसके प्रदेश संगठन मंत्री चंदन लोधियाल एकमात्र दावेदार हैं। हालांकि 2012 में बसपा प्रत्याशी के रूप में मोहन पाल 15 हजार मत और 2017 में ताराचंद्र पाण्डे ने साढ़े आठ हजार मत लाकर बहुजन समाज पार्टी की उपस्थिति जरूर दर्ज कराई थी लेकिन अब बहुजन समाज पार्टी इस विधानसभा में मजबूत ताकत के रूप में दिखाई नहीं देती।
कुल मिलाकर 2027 के विधानसभा चुनाव में अभी करीब नौ महीनों का समय शेष है लेकिन सभी राजनीतिक दलों के दावेदार अभी से अपनी ऊर्जा का इस्तेमाल अपनी दावेदारी को पुख्ता करने में जर्टि गए हैं। वर्तमान दौर की राजनीति का जो चरित्र बना है उसमें समीकरण बनने-बिगड़ने का दौर अंतिम क्षणों तक जारी रहेगा। सत्ताधारी दल उस चेहरे को तरजीह देगा जो इस सीट को दोबारा जिता सके तो वहीं विपक्षी कांग्रेस भी अपनी ताकत उस चेहरे पर लगाएगी जो सत्ताधारी दल को मात देने में सक्षम होगा।

You may also like