Country

रघु राय का जाना औैर इतिहास का ठहर जाना

  • दि संडे पोस्ट डेस्क
भारत की आत्मा को उसकी सबसे सच्ची, जटिल और संवेदनशील छवियों में दुनिया के सामने रखने वाले महान फोटो पत्रकार रघु राय का 26 अप्रैल 2026 को नई दिल्ली में लम्बी बीमारी के बाद निधन हो गया। 83 वर्ष की आयु में उन्होंने अंतिम सांस ली। रघु राय ने अपने कैमरे के जरिए न केवल आम जनजीवन की अनदेखी परतों को उजागर किया बल्कि सत्ता, संघर्ष, आध्यात्म, पीड़ा और उम्मीद के उन क्षणों को भी अमर कर दिया जो आधुनिक भारत की सामूहिक स्मृति का हिस्सा बन चुके हैं। उनकी तस्वीरें केवल कला नहीं बल्कि एक ऐसे जीवित दस्तावेज हैं जिनमें भारत का सामाजिक-राजनीतिक इतिहास, उसकी आत्मा और उसके अंतर्विरोध स्पष्ट रूप से दिखाई देते हैं

भारतीय पत्रकारिता और कला जगत के लिए यह एक गहरे शोक का क्षण है। वह शख्स, जिसने दशकों तक भारत को अपनी आंखों से देखा और अपने कैमरे के माध्यम से दुनिया को दिखाया, अब हमारे बीच नहीं रहा। रघु राय का निधन एक व्यक्ति की मृत्यु भर नहीं है बल्कि उस दृष्टि का अंत है, जिसने भारत को समझने के तरीके को ही बदल दिया।

रघु राय की फोटोग्राफी को समझना दरअसल भारत को समझना है। वे केवल दृश्य नहीं पकड़ते थे, वे समय को पकड़ते थे। उनके कैमरे में कैद हर फ्रेम एक कहानी कहता है, कभी दर्द की, कभी विडम्बना की, कभी आशा की और कभी उस मौन की, जिसे शब्दों में व्यक्त करना सम्भव नहीं होता।
सड़कों से उठी एक असाधारण दृष्टि
रघु राय का कैमरा सबसे पहले सड़कों पर चला। कोलकाता की भीड़भाड़ वाली गलियों से लेकर दिल्ली के ऐतिहासिक मोहल्लों तक, उन्होंने जीवन को उसके सबसे वास्तविक रूप में देखा। वे उन जगहों पर जाते थे जहां अक्सर लोग देखने से बचते हैं जैसे गरीबी, भीड़, अव्यवस्था, संघर्ष लेकिन उन्होंने इन सबको केवल ‘दिखाया’ नहीं बल्कि उनमें छिपी मानवीय गरिमा और सौंदर्य को उजागर किया।
चांदनी चैक की एक प्रसिद्ध तस्वीर में शाम की नमाज के दौरान एक महिला को झुकते हुए दिखाया गया है और पीछे जामा मस्जिद की विशाल संरचना उभरती है। यह केवल एक धार्मिक क्षण नहीं बल्कि शहर, आस्था और समय का संगम है। यह वह दृष्टि है जो केवल एक संवेदनशील कलाकार के पास होती है।
साधारण में छिपा असाधारण
रघु राय का मानना था कि असली कहानी ‘बड़ी घटनाओं’ में नहीं बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी में छिपी होती है। यही कारण है कि उनकी कई तस्वीरें पहली नजर में साधारण लगती हैं लेकिन गहराई से देखने पर वे समाज की बड़ी सच्चाइयों को उजागर करती हैं। एक तस्वीर में एक सफाई कर्मचारी चुनावी पोस्टर हटा रहा है और उसमें इंदिरा गांधी का चेहरा झलक रहा है। यह दृश्य सत्ता के अस्थायित्व और जनता की वास्तविकता को एक साथ सामने लाता है।
उनकी तस्वीरों में हास्य भी है, कभी हल्का, कभी तीखा। एक फ्रेम में एक किन्नर पोज दे रहा है और पीछे से एक व्यक्ति उसकी गाल खींचता हुआ गुजर रहा है। यह दृश्य समाज की जटिलताओं और मानवीय व्यवहार के विरोधाभासों को सहजता से दिखाता है।
सत्ता के गलियारों का साक्षी
रघु राय की एक और बड़ी पहचान यह रही कि वे सत्ता के सबसे करीब रहे। इंदिरा गांधी के साथ उनका विशेष सम्बंध था और उन्हें प्रधानमंत्री आवास में स्वतंत्र रूप से काम करने की अनुमति थी।
उन्होंने सत्ता को केवल औपचारिक रूप में नहीं बल्कि उसके वास्तविक स्वरूप में दिखाया। एक तस्वीर में मंत्रीगण सिर झुकाए खड़े हैं और इंदिरा गांधी कागजों में व्यस्त हैं, यह दृश्य चाटुकारिता, शक्ति और दूरी के रिश्ते को स्पष्ट करता है।
इसी तरह मेनका गांधी के घर छोड़ने का दृश्य भारतीय राजनीति के निजी और सार्वजनिक जीवन के टकराव को सामने लाता है। यह केवल एक पारिवारिक घटना नहीं थी बल्कि एक राजनीतिक क्षण भी था और रघु राय ने इसे उसी गहराई से पकड़ा।
आध्यात्म की खोज
रघु राय के काम में आध्यात्मिकता एक महत्वपूर्ण तत्व थी। वे मानते थे कि कुछ क्षण और कुछ व्यक्तित्व ऐसे होते हैं जिनमें दिव्यता झलकती है। मदर टेरेसा की उनकी तस्वीरों में यह स्पष्ट दिखाई देता है। उनके अनुसार, मदर टेरेसा के आस-पास एक ‘प्रकाश’ था, जिसे उन्होंने अपने कैमरे में कैद करने की कोशिश की। इसी तरह दलाई लामा के पोर्टªेट्स में एक शांति और गहराई दिखाई देती है जो सामान्य फोटोग्राफी से परे है। ये तस्वीरें केवल चेहरों की नहीं बल्कि आत्मा की तस्वीरें लगती हैं।
इतिहास के सबसे करीब
रघु राय उन फोटोग्राफरों में थे जो हर महत्वपूर्ण क्षण पर मौजूद नजर आते हैं। 1970 के दशक के बाद का भारत जिसमें राजनीतिक उथल- पुथल, सामाजिक बदलाव और कई त्रासद घटनाएं शामिल थीं,उनकी तस्वीरों में दर्ज हैं।
वे केवल दर्शक नहीं थे बल्कि ‘रिंगसाइड व्यूअर’ थे, इतिहास के सबसे करीब खड़े हुए साक्षी। उनकी तस्वीरों के जरिए हम भारत के बदलते स्वरूप को देख सकते हैं, एक ऐसा देश जो संघर्ष करता है, टूटता है, फिर उठता है और आगे बढ़ता है।
धैर्य और क्षण की पहचान
एक महान फोटोग्राफर के लिए सबसे जरूरी गुण होता है धैर्य। रघु राय इस कला में निपुण थे। वे घंटों इंतजार कर सकते थे, केवल उस एक क्षण के लिए, जो पूरी कहानी कह सके। उनकी यही क्षमता उन्हें दूसरों से अलग बनाती थी। वे जानते थे कि सही समय कब है और जब वह समय आता था, वे तैयार होते थे।
एक पीढ़ी के शिक्षक
रघु राय का योगदान केवल उनकी तस्वीरों तक सीमित नहीं है। उन्होंने एक पूरी पीढ़ी को प्रभावित किया। उनके साथ काम करने वाले और उन्हें देखने वाले कई युवा फोटोग्राफर आगे चलकर बड़े नाम बने। वे सिखाते थे कि फोटोग्राफी केवल तकनीक नहीं है बल्कि दृष्टि है और यह दृष्टि संवेदनशीलता, धैर्य और जिज्ञासा से आती है।
विरासत जो अमर है
आज जब रघु राय हमारे बीच नहीं हैं, उनकी तस्वीरें ही उनकी सबसे बड़ी विरासत हैं। वे संग्रहालयों, किताबों और प्रदर्शनियों में जीवित रहेंगे लेकिन उससे भी ज्यादा, वे हमारे भीतर जीवित रहेंगे, हमारी स्मृतियों में, हमारी समझ में और उस नजरिए में जिससे हम अपने देश को देखते हैं।
एक युग का अंत, एक दृष्टि की शुरुआत
रघु राय का जाना निश्चित रूप से एक युग का अंत है लेकिन उनकी तस्वीरें हमें यह सिखाती हैं कि देखने का एक नया तरीका हमेशा सम्भव है। आज जब दुनिया तेजी से बदल रही है और तस्वीरें केवल ‘कंटेंट’ बनकर रह गई हैं, रघु राय की फोटोग्राफी हमें ठहरकर देखने की प्रेरणा देती है। उनकी आंखें बंद हो गई हैं, लेकिन उन्होंने जो दृष्टि हमें दी है, वह हमेशा खुली रहेगी और शायद यही एक सच्चे कलाकार की सबसे बड़ी जीत होती है, वह चला जाता है लेकिन उसका नजरिया दुनिया में जीवित रहता है।

You may also like